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सीआरपीएफ की अद्वितीय वीरता: एक कंपनी ने कैसे परास्त किया दुश्मन की एक ब्रिगेड

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सीआरपीएफ की अद्वितीय वीरता: एक कंपनी ने कैसे परास्त किया दुश्मन की एक ब्रिगेड

सारांश

क्या एक पुलिस की कंपनी दुश्मन की एक पूरी ब्रिगेड को परास्त कर सकती है? जानिए सीआरपीएफ के अद्वितीय साहस की कहानी और शौर्य दिवस की महत्ता को।

मुख्य बातें

सीआरपीएफ का गठन 1939 में हुआ था।
9 अप्रैल को सीआरपीएफ शौर्य दिवस मनाया जाता है।
सीआरपीएफ की दो कंपनियों ने दुश्मन की एक पूरी ब्रिगेड को परास्त किया।
इस घटना ने भारत की सैन्य वीरता को दर्शाया।
सीआरपीएफ के जवानों की वीरता को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के इतिहास में वीरता और पराक्रम की अनगिनत कहानियाँ हैं। इनमें से कुछ ऐसी हैं, जो तिथियों को अमिट बना देती हैं। ऐसी ही एक कथा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की वीरता की है, जिसने 9 अप्रैल को हिंदुस्तान के इतिहास में एक सुनहरी पन्ना जोड़ दिया।

इस बल की स्थापना 1939 में क्राउन रिप्रजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी, जिसे भारत की आजादी के बाद 1949 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नाम दिया गया। समय-समय पर सीआरपीएफ ने अपने साहस और क्षमता को साबित किया है।

कल्पना कीजिए कि क्या एक पुलिस की कंपनी किसी देश की सेना की एक ब्रिगेड को परास्त कर सकती है। भारत की धरती ऐसे वीरों को जन्म देती है जो ऐसे असंभव कार्य कर सकते हैं। यही अद्भुतता सीआरपीएफ के जवानों ने गुजरात के कच्छ के रण में दिखाई थी।

9 अप्रैल को कच्छ के सरदार पोस्ट पर पाकिस्तानी सेना ने अचानक हमला किया। सीआरपीएफ की केवल दो कंपनियों ने इस हमले को विफल कर दिया। दुश्मन की सेना सीआरपीएफ के जवानों की संख्या से कई गुना अधिक थी, फिर भी जवानों ने अद्भुत साहस के साथ लड़ाई की। उन्होंने पाकिस्तान के 34 सैनिकों को मार गिराया और चार को जीवित पकड़ लिया।

1965 में कच्छ के रण में पाकिस्तानी आक्रमण देखते हुए, 2 बटालियन की चार कंपनियों को सीमा चौकी स्थापित करने का आदेश दिया गया। 8 और 9 अप्रैल की मध्य रात्रि में, पाकिस्तान की 51वीं इन्फेंटरी ब्रिगेड के 3500 जवानों ने गुप्त रूप से हमारी सीमा पर आक्रमण किया।

ऑपरेशन 'डिजर्ट हॉक' की योजना बनाने वालों ने इसे सफल बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन वे सीआरपीएफ की छोटी टुकड़ी की दृढ़ता और साहस का अंदाजा नहीं लगा सके।

उस समय हवलदार रणजीत सिंह मशीन गन के साथ ड्यूटी पर थे। उन्होंने उत्तर दिशा में हलचल देखी और दुश्मन को चुनौती दी, जिसके बाद फायरिंग शुरू हो गई।

पाकिस्तानी बलों ने सीआरपीएफ की दो बटालियन पर पूरी ताकत से हमला किया। हमारे वीर जवानों ने साहसिकता से मोर्चा संभाला।

सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चे पर संघर्ष करते हुए दुश्मन को पीछे धकेल दिया। इस दौरान दुश्मन ने तीन बार पोस्ट पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भारी जनहानि के साथ वापस लौटना पड़ा।

इस संघर्ष में छह वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी। इस दिन को सीआरपीएफ शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो उनकी वीरता को समर्पित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे देश के साहसी जवानों की शक्ति और दृढ़ता को भी दर्शाती है। यह घटना इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे हर भारतीय को गर्व से याद रखना चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआरपीएफ शौर्य दिवस कब मनाया जाता है?
सीआरपीएफ शौर्य दिवस हर वर्ष 9 अप्रैल को मनाया जाता है।
सीआरपीएफ की स्थापना कब हुई थी?
सीआरपीएफ की स्थापना 1939 में हुई थी।
कच्छ के रण में सीआरपीएफ ने किस घटना को अंजाम दिया?
कच्छ के रण में सीआरपीएफ ने 9 अप्रैल को पाकिस्तानी सेना की एक ब्रिगेड को परास्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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