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सीआरपीएफ का 47 साल बाद ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 12 महीने में शून्य ऑपरेशनल मौत

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सीआरपीएफ का 47 साल बाद ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 12 महीने में शून्य ऑपरेशनल मौत

सारांश

सीआरपीएफ ने 47 साल बाद एक दुर्लभ उपलब्धि दर्ज की — 12 महीने में शून्य ऑपरेशनल मौत। लेकिन इस जश्न के पीछे एक गहरा सवाल है: 2025 में 59 जवानों की आत्महत्या और पाँच वर्षों में 281 मौतें — क्या यह रिकॉर्ड पूरी तस्वीर दिखाता है?

मुख्य बातें

सीआरपीएफ ने 47 वर्षों बाद लगातार 12 महीनों में शून्य ऑपरेशनल मौत का रिकॉर्ड दर्ज किया।
बल में अंतिम ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी; इससे पहले का ऐसा रिकॉर्ड जनवरी 1979 में समाप्त हुए दौर में था।
डीजी जीपी सिंह ने एक्स पर उपलब्धि साझा की; आधुनिक उपकरण, बेहतर प्रशिक्षण और त्वरित चिकित्सा प्रतिक्रिया को श्रेय दिया।
आत्महत्या के मामले ऑपरेशनल मौतों में नहीं गिने जाते; 2025 में 59 जवानों ने आत्महत्या की — पाँच वर्षों में सर्वाधिक।
पिछले पाँच वर्षों में कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 216 ड्यूटी पर थे।
NHRC ने गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ महानिदेशक को नोटिस जारी कर आत्महत्या के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने 47 वर्षों बाद एक दुर्लभ उपलब्धि दर्ज की है — लगातार 12 महीनों तक एक भी ऑपरेशनल मौत नहीं हुई। नई दिल्ली में 2 नवंबर 2026 को सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस सामूहिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए समस्त जवानों को बधाई दी। बल में अंतिम ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को दर्ज हुई थी, और इससे पहले ऐसा रिकॉर्ड जनवरी 1979 में समाप्त हुए एक दौर में दर्ज किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

महानिदेशक जीपी सिंह ने एक्स पर लिखा, 'सीआरपीएफ के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बल में लगातार 12 महीने (एक वर्ष) तक कोई ऑपरेशनल मौत नहीं हुई है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस दौरान बल देश के प्रमुख ऑपरेशनल क्षेत्रों में सक्रिय रूप से अभियान चलाता रहा और उल्लेखनीय सफलताएँ भी अर्जित करता रहा।

सफलता के कारण

महानिदेशक के अनुसार, इस उपलब्धि के पीछे कई कारक सहायक रहे — आधुनिक और अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और किसी भी घटना के बाद त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली। इसके अतिरिक्त, घायल जवानों को तेज़ी से द्वितीय और तृतीय स्तर की चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँचाने की व्यवस्था को भी इस सफलता का अहम कारण बताया गया।

उपलब्धि का महत्व

यह ऐसे समय में सामने आई है जब सीआरपीएफ लगातार कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर समेत देश के संवेदनशील इलाकों में तैनात रहती है। सिंह ने कहा, 'हम देश के सभी नागरिकों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' गौरतलब है कि यह उपलब्धि इसलिए भी असाधारण है क्योंकि बल की तैनाती और अभियानों में कोई शिथिलता नहीं आई।

आंतरिक चुनौती: जवानों की आत्महत्या

हालाँकि, यह उपलब्धि एक गहरी आंतरिक चुनौती के साये में आई है। आत्महत्या के मामलों को आधिकारिक ऑपरेशनल मौतों की श्रेणी में नहीं गिना जाता, और इस मोर्चे पर बल की स्थिति चिंताजनक रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में आत्महत्या से 59 जवानों की मौत हुई — पिछले पाँच वर्षों में सर्वाधिक। पिछले पाँच वर्षों में कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 216 ड्यूटी पर तैनात थे।

वर्षवार आँकड़े इस प्रकार हैं: 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जनवरी से मई 2026 के बीच पाँच महीनों से कम समय में 19 जवानों की आत्महत्या की एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। अगस्त 2026 में आयोग ने टिप्पणी की कि यदि रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है, तो यह देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में कार्यरत जवानों के जीवन के अधिकार से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है। आयोग ने गृह मंत्रालय के गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी।

ऑपरेशनल मोर्चे पर मिली यह ऐतिहासिक सफलता बल के नेतृत्व की उन्नत रणनीति और प्रशिक्षण का प्रमाण है, किंतु जवानों के मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती चुनौती एक ऐसा मोर्चा है जिस पर आने वाले दिनों में बल की असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु 'ऑपरेशनल मौत' की परिभाषा ही एक अंतर्निहित विरोधाभास को उजागर करती है — जिस वर्ष यह रिकॉर्ड बना, उसी वर्ष 2025 में आत्महत्या से सर्वाधिक 59 जवान गए। आत्महत्या को ऑपरेशनल मौत न मानना प्रशासनिक वर्गीकरण तो है, पर यह उन जवानों की पीड़ा और सेवा की दशाओं की असली परीक्षा से बचने का रास्ता भी बन सकता है। NHRC का हस्तक्षेप और पाँच वर्षों में 281 आत्महत्याओं का आँकड़ा यह स्पष्ट करता है कि बल का असली संकट बाहरी दुश्मन नहीं, भीतरी दबाव है। नेतृत्व की असली कसौटी तब होगी जब वह ऑपरेशनल सफलता के साथ-साथ जवानों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए उतनी ही गंभीर रणनीति प्रस्तुत करे।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआरपीएफ का शून्य ऑपरेशनल मौत का रिकॉर्ड क्या है?
सीआरपीएफ ने 47 वर्षों बाद लगातार 12 महीनों तक एक भी ऑपरेशनल मौत दर्ज नहीं होने की उपलब्धि हासिल की है। बल में अंतिम ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी, और इससे पहले का ऐसा रिकॉर्ड जनवरी 1979 में समाप्त हुए एक दौर में था।
इस उपलब्धि का श्रेय किन कारणों को दिया गया है?
डीजी जीपी सिंह ने आधुनिक और अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और घटना के बाद त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को इसका श्रेय दिया। घायल जवानों को तेज़ी से द्वितीय और तृतीय स्तर की चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँचाने की व्यवस्था को भी अहम कारण बताया गया।
सीआरपीएफ में आत्महत्या की क्या स्थिति है?
आँकड़ों के अनुसार, 2025 में आत्महत्या से 59 जवानों की मौत हुई, जो पिछले पाँच वर्षों में सर्वाधिक है। पाँच वर्षों (2021–2025) में कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 216 ड्यूटी पर तैनात थे। आत्महत्या के मामले आधिकारिक ऑपरेशनल मौतों में नहीं गिने जाते।
NHRC ने सीआरपीएफ को नोटिस क्यों जारी किया?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि जनवरी से मई 2026 के बीच पाँच महीनों में सीआरपीएफ के 19 जवानों ने आत्महत्या की। आयोग ने इसे जवानों के जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ महानिदेशक को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट माँगी।
ऑपरेशनल मौत और आत्महत्या में क्या फ़र्क होता है?
ऑपरेशनल मौत वह होती है जो अभियान या ड्यूटी के दौरान शत्रु कार्रवाई, हिंसा या संबंधित कारणों से होती है। आत्महत्या को इस श्रेणी में आधिकारिक तौर पर नहीं गिना जाता, इसलिए शून्य ऑपरेशनल मौत का रिकॉर्ड बल में आत्महत्या की घटनाओं की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करता।
राष्ट्र प्रेस
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