कारगिल विजय दिवस 2025: जम्मू-कश्मीर LG मनोज सिन्हा और 5 राज्यों के CM ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
कारगिल विजय दिवस पर 26 जुलाई 2025 को देशभर में ऑपरेशन विजय के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गोवा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने उन वीर सैनिकों को नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह दिवस 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की निर्णायक जीत की 27वीं वर्षगाँठ के रूप में मनाया जा रहा है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का संदेश
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'कारगिल विजय दिवस पर, मैं उन शहीदों को नमन करता हूँ, जिन्होंने ऑपरेशन विजय के दौरान माँ भारती की आज़ादी और सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारी सेना का असाधारण साहस आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करेगा।' उन्होंने शहीदों के परिवारों को भी 'निस्वार्थ समर्पण का स्थायी प्रतीक' बताते हुए उन्हें गहरी श्रद्धा से नमन किया।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, 'कुछ जीतें वापस हासिल किए गए इलाके से मापी जाती हैं। कारगिल को हिम्मत, कुर्बानी और देश के लिए प्यार से मापा गया था।' उन्होंने उन सैनिकों को नमन किया जिन्होंने 'नामुमकिन मुश्किलों का सामना किया और तिरंगा हमेशा ऊँचा रहे, इसके लिए अपनी जान दे दी।'
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कारगिल युद्ध के नायकों की 'असाधारण बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान' को 'भारत के इतिहास में गर्व का अध्याय' बताया। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 'बेमिसाल साहस और बलिदान से मिली ऐतिहासिक जीत के 27 वर्ष' पूरे होने पर शहीदों को दिल से श्रद्धांजलि दी।
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सैनिकों ने 'हिमालय की खतरनाक ऊँचाइयों से बहादुरी का सुनहरा अध्याय लिखा।' अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, 'कारगिल की जीत सिर्फ एक मिलिट्री सफलता नहीं थी — यह डर पर साहस, आराम पर कर्तव्य और खुद पर देशभक्ति की जीत थी।'
कारगिल विजय दिवस का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि ऑपरेशन विजय मई से जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया था, जब पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने कारगिल की ऊँची चोटियों पर कब्ज़ा कर लिया था। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने सभी चोटियाँ वापस हासिल कर विजय की घोषणा की थी। यह ऐसे समय में आया था जब दोनों देश परमाणु शक्ति-संपन्न थे, जिससे यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर अत्यंत संवेदनशील बन गया था।
शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान
कई नेताओं ने केवल सैनिकों को ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के 'मौन बलिदान' को भी अपनी श्रद्धांजलि का हिस्सा बनाया। उपराज्यपाल सिन्हा और मुख्यमंत्री खांडू दोनों ने सेवारत सैनिकों, वेटरन्स और उनके परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। आने वाले दिनों में विभिन्न राज्यों में सैनिक सम्मान समारोह और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।