आरजी कर केस: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ईडी को संदीप घोष पर कार्रवाई की मंजूरी दी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 18 मई 2026 को कोलकाता के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल दुष्कर्म-हत्या मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी। यह मंजूरी उस मामले में दी गई है जिसमें 9 अगस्त 2024 को अस्पताल परिसर में एक प्रशिक्षु चिकित्सक 'सिस्टर अभया' के साथ क्रूर दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई थी।
मुख्यमंत्री की घोषणा और एक्स पर पोस्ट
मुख्यमंत्री अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर स्वयं यह जानकारी साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा — 'आज मुख्यमंत्री के रूप में एक महान और सकारात्मक कदम उठाने पर मैं खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ ईडी को कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति दी गई है — अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।'
अधिकारी ने यह भी कहा कि पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने इस मामले की जाँच प्रक्रिया को 'जबरदस्ती और अनैतिक रूप से' लंबे समय तक रोके रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा — 'कानून से ऊपर कोई नहीं है। सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।'
तीन आईपीएस अधिकारी निलंबित
ईडी को अभियोजन स्वीकृति से पहले मुख्यमंत्री अधिकारी इस मामले में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर चुके हैं। इनमें तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (उत्तरी डिवीजन) अभिषेक गुप्ता और तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (मध्य डिवीजन) इंदिरा मुखर्जी शामिल हैं।
तीनों के विरुद्ध विभागीय जाँच शुरू करने का आदेश भी दिया गया है।
ममता बनर्जी की भूमिका की समीक्षा
मुख्यमंत्री अधिकारी ने संकेत दिया है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पद संभालने के बाद उन्होंने मुख्य सचिव और राज्य गृह सचिव से आरजी कर मामले और घटना के बाद के घटनाक्रमों पर विस्तृत लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या की इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले ने कोलकाता और पश्चिम बंगाल में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था, और चिकित्सा समुदाय ने अस्पतालों में सुरक्षा की माँग को लेकर आंदोलन किया था। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार पुराने मामलों की जाँच में तेज़ी ला रही है।
आगे क्या होगा
ईडी को अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद संदीप घोष के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत औपचारिक कार्यवाही की राह खुल गई है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि वे चाहते हैं कि 'सिस्टर अभया के असली दोषियों की जल्द से जल्द पहचान हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले।' इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।