कलकत्ता हाई कोर्ट: न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग

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कलकत्ता हाई कोर्ट: न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टर दुष्कर्म-हत्या मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया — यह इस मामले में दूसरी बार है जब किसी पीठ ने हाथ खींचे हैं। पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह अभी भी लंबी बनी हुई है।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने 12 मई 2026 को आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया।
यह इस मामले में दूसरा रिक्यूज़ल है — इससे पहले मार्च 2025 में न्यायमूर्ति देबांशु बासक की पीठ भी हट चुकी है।
सीबीआई ने उच्च न्यायालय को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
संजय रॉय को 20 जनवरी 2025 को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है।
राज्य सरकार मामले के निपटारे के लिए न्यायिक आयोग गठित करने पर विचार कर सकती है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई से 12 मई 2026 को खुद को अलग कर लिया। पीठ का मत था कि न्याय के हित में इस मामले की सुनवाई उस पीठ द्वारा की जानी चाहिए जो इस पर पर्याप्त समय दे सके।

मामले से अलग होने की वजह

न्यायमूर्ति मंथा की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले को उचित न्यायिक समय और ध्यान मिलना आवश्यक है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसी पीठ ने इस मामले से खुद को अलग किया हो। इससे पहले मार्च 2025 में न्यायमूर्ति देबांशु बासक की खंडपीठ ने भी समय की कमी का हवाला देते हुए पीड़ित परिवार की ओर से दायर मामले की सुनवाई से हाथ खींच लिए थे। परिवार ने शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें पूरी सुनवाई का अवसर नहीं मिल पाया था।

सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट और जांच की स्थिति

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति मंथा की पीठ ने कहा था कि यदि आवश्यक हुआ तो सीबीआई आरजी कर मामले में दोषी और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर सकती है। सीबीआई ने भी स्पष्ट किया था कि वह जांच को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने में सक्षम है।

मुख्य घटनाक्रम: 9 अगस्त 2024 से अब तक

महिला डॉक्टर का शव 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, कोलकाता से बरामद किया गया था। अगले ही दिन कोलकाता पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली।

18 जनवरी 2025 को सियालदह अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया और संजय रॉय को दोषी करार दिया। न्यायाधीश अनिर्बन दास ने 20 जनवरी 2025 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाओं का सफर

सियालदह अदालत का फैसला आने से पहले ही पीड़ित के माता-पिता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ के समक्ष एक आवेदन दायर किया था, जिसमें सीबीआई जांच से जुड़े कई सवाल उठाए गए थे। न्यायमूर्ति घोष ने यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि यह मामला उस समय सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन था।

इसके बाद पीड़ित परिवार ने वही याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की। सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया कि यही याचिका सर्वोच्च न्यायालय में क्यों सुनी जाए और निर्देश दिया कि इसकी सुनवाई उच्च न्यायालय में हो। तब से यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय में चल रहा है।

आगे क्या होगा

रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार इस मामले के निपटारे के लिए एक न्यायिक आयोग गठित करने पर विचार कर सकती है। अब यह मामला किसी अन्य पीठ को सौंपे जाने की संभावना है। पीड़ित परिवार के लिए न्याय की यह लंबी प्रतीक्षा तब तक जारी रहेगी जब तक कोई सक्षम पीठ इस मामले की नियमित और पूर्ण सुनवाई सुनिश्चित नहीं करती।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर उच्च न्यायालय की कई पीठों और सर्वोच्च न्यायालय के बीच भटकता रहा — और हर बार उन्हें पूर्ण सुनवाई नहीं मिली। दोषी को सजा मिल चुकी है, लेकिन सीबीआई जांच के बाकी पहलुओं पर जवाबदेही अभी अधूरी है। सवाल यह है कि क्या न्यायिक आयोग का विकल्प वास्तव में न्याय को तेज़ करेगा या यह एक और प्रशासनिक विलंब की शुरुआत होगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर मामले से खुद को क्यों अलग किया?
पीठ का मत था कि न्याय के हित में इस मामले की सुनवाई उस पीठ द्वारा होनी चाहिए जो इसे पर्याप्त समय दे सके। यह इस मामले में दूसरी बार है जब किसी उच्च न्यायालय की पीठ ने सुनवाई से हाथ खींचे हैं।
आरजी कर मामले में अब तक क्या हुआ है?
महिला डॉक्टर का शव 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज से बरामद हुआ था। संजय रॉय को दोषी पाया गया और 20 जनवरी 2025 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सीबीआई जांच अभी भी जारी है और मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
आरजी कर मामले में सीबीआई की क्या भूमिका है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने यह जांच अपने हाथ में ली थी। सीबीआई ने उच्च न्यायालय को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है और कहा है कि वह जांच आगे बढ़ाने के लिए किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है।
पीड़ित परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका क्यों दायर की थी?
उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने सुनवाई से इनकार कर दिया था क्योंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन था। इसके बाद परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की, लेकिन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इसे वापस उच्च न्यायालय भेज दिया।
आगे इस मामले की सुनवाई कौन करेगा?
न्यायमूर्ति मंथा की पीठ के हटने के बाद यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय की किसी अन्य पीठ को सौंपे जाने की संभावना है। रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार एक न्यायिक आयोग गठित करने पर भी विचार कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस