आरजी कर कांड: संदीप घोष पर ईडी की कार्रवाई का रास्ता साफ, पश्चिम बंगाल सरकार ने दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को 1 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार से आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के विरुद्ध करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता मामले में आरोप तय करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त हो गई। यह मंजूरी उस लंबी कानूनी बाधा को दूर करती है जिसके चलते धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में सुनवाई महीनों से ठप पड़ी थी।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी ने पीएमएलए विशेष अदालत के न्यायाधीश को सूचित किया कि राज्य सरकार ने घोष के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आरंभ करने की अनुमति दे दी है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने यह अनुमति लंबे समय तक रोके रखी थी। नियमों के अनुसार, राज्य के किसी महत्वपूर्ण पद पर रहे व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए संबंधित राज्य विभाग की सहमति अनिवार्य होती है — इस मामले में राज्य स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी आवश्यक थी।
घोष को पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद ईडी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच में प्रवेश किया। ईडी के पहले आरोप पत्र में घोष को वित्तीय अनियमितताओं का मुख्य आरोपी बताया गया था, साथ ही दो मीडिया उपकरण ठेकेदारों — बिप्लब सिन्हा और सुमन हाजरा — के नाम भी शामिल किए गए हैं।
नई सरकार की भूमिका
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले और अगस्त 2024 में उसी अस्पताल में एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में त्वरित जांच एवं न्याय सुनिश्चित करने की सभी बाधाएं दूर की जाएंगी। राज्य स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी मिलना इसी वादे की अनुपालना के रूप में देखा जा रहा है।
सीबीआई की समानांतर जांच
इस बीच सीबीआई ने भी इस मामले में अपना आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस प्रकार दो केंद्रीय एजेंसियां — ईडी और सीबीआई — एक साथ इस मामले की जांच आगे बढ़ा रही हैं। गौरतलब है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें उस व्यापक कांड से जुड़ी हैं जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अब पीएमएलए विशेष अदालत में घोष के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। यह कार्यवाही आरजी कर कांड में जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। न्यायिक प्रक्रिया में आई तेजी से पीड़ित परिवार और न्याय की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।