आरजी कर केस: संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, पीड़िता के पिता ने नए आंदोलन की दी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जमानत दिए जाने के बाद, कोलकाता की उस जूनियर डॉक्टर के पिता शेखर देबनाथ ने शनिवार, 18 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल में एक नए आंदोलन की चेतावनी दी है। उनकी बेटी अगस्त 2024 में इसी सरकारी अस्पताल में दुष्कर्म और हत्या की शिकार हुई थी। यह फैसला उस मामले में न्याय की माँग कर रहे परिजनों और समर्थकों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को संदीप घोष को जमानत प्रदान की। अदालत ने अपने फैसले में दो प्रमुख आधार रखे — उनका लंबे समय तक हिरासत में रहना और मुकदमे की अत्यंत धीमी गति। पीठ ने पाया कि यद्यपि संदीप घोष दो वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं, तथापि इस मामले में दर्ज 147 गवाहों में से केवल कुछ के ही बयान अब तक दर्ज किए जा सके हैं। इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था।
पीड़िता के पिता की चेतावनी
जमानत की खबर मिलते ही पीड़िता के पिता शेखर देबनाथ ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा, 'मैं इसे अंत तक देखूँगा। अगर ज़रूरत पड़ी, तो मैं इस मुद्दे पर राज्य में एक नया आंदोलन शुरू करूँगा और सड़कों पर उतरूँगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक परिस्थितियाँ उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय माँगने से नहीं रोक सकतीं।
राजनीतिक पेचीदगी
इस मामले में एक विशेष राजनीतिक जटिलता यह है कि पीड़िता की माँ रत्ना देबनाथ पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की विधायक हैं। जब शेखर देबनाथ से पूछा गया कि क्या उनका प्रस्तावित आंदोलन वर्तमान राज्य सरकार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन माना जाएगा, तो उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा, 'इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वह सत्ताधारी दल का हिस्सा हैं। मैं न्याय के लिए जो भी ज़रूरी होगा, वह करूँगा।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीतिक स्थिति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है।
आरजी कर मामले की पृष्ठभूमि
अगस्त 2024 में सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, कोलकाता में एक जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले के बाद संस्थान में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सामने आईं। गौरतलब है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में संदीप घोष इस अस्पताल के प्रिंसिपल के पद पर थे। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने कथित भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था। पीड़िता के माता-पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मृत्यु में प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता रही।
आगे क्या होगा
जमानत मिलने के बाद संदीप घोष के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं का मुकदमा अदालत में जारी रहेगा। CBI की जाँच की स्थिति और शेष गवाहों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया पर सबकी नज़र होगी। पीड़िता के पिता की आंदोलन की चेतावनी के बाद, पश्चिम बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। यह मामला चिकित्सा संस्थानों में महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के व्यापक सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।