आरजी कर केस: पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ बोलीं — सीबीआई विरोधी सोशल मीडिया अभियान से कोई संबंध नहीं
सारांश
मुख्य बातें
आरजी कर बलात्कार एवं हत्या मामले की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने 26 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में यह स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे अभियान में उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल उनकी जानकारी या अनुमति के बिना किया जा रहा है। उन्होंने इस अभियान के आयोजन, प्रचार या प्रबंधन में किसी भी प्रकार की भागीदारी से साफ़ इनकार किया।
मुख्य घटनाक्रम
देबनाथ के अनुसार, फेसबुक समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर उनके नाम और तस्वीर से जुड़े पोस्टर वायरल हो रहे हैं, जिनमें 12 नवंबर को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया है। इन पोस्टरों में एक भाजपा विधायक का नाम भी शामिल बताया गया है।
यह अभियान तब तेज़ हुआ जब सर्वोच्च न्यायालय ने इसी महीने की शुरुआत में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व और विवादित प्राचार्य संदीप घोष को सीबीआई द्वारा दर्ज वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जमानत दी। घोष पर कथित तौर पर उक्त संस्थान में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त होने का आरोप है।
पीड़िता की मां का बयान
रत्ना देबनाथ ने कहा, 'वॉइस ऑफ अभया' और 'वॉइस ऑफ वुमन' नामक सोशल मीडिया अभियानों में उनके नाम से जुड़ी टिप्पणियों पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वे अपने नाम और तस्वीर के इस दुरुपयोग की कड़ी निंदा करती हैं और यह 'भ्रामक प्रचार' है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका और पश्चिम बंगाल सरकार पर पूरा भरोसा है। उनके अनुसार, 'हर मुद्दे का समाधान कानून और संविधान का सम्मान करते हुए होना चाहिए।'
सीबीआई पर अभियान के आरोप
इस सोशल मीडिया अभियान में सीबीआई पर आरजी कर केस की लापरवाही से जांच करने का आरोप लगाया गया है। अभियान के समर्थकों का तर्क है कि सीबीआई की इसी कमज़ोर जांच के कारण सर्वोच्च न्यायालय को संदीप घोष को जमानत देनी पड़ी। हालांकि, रत्ना देबनाथ ने इस तर्क से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु चिकित्सक की बलात्कार और हत्या का यह मामला देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक बन चुका है। इस केस ने देशभर में महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर व्यापक आंदोलन को जन्म दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब जांच की गति और दिशा दोनों पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे की स्थिति
रत्ना देबनाथ ने स्पष्ट किया कि वे नहीं जानतीं कि 12 नवंबर के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल होगा और उनका उन किसी भी आयोजकों से कोई संबंध नहीं है। यह स्पष्टीकरण उस आंदोलन के भविष्य और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है, जो सार्वजनिक रूप से पीड़िता की मां का समर्थन प्राप्त होने का दावा कर रहा था।