आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट की नई खंडपीठ करेगी सुनवाई, CBI ने माँगी फाँसी

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आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट की नई खंडपीठ करेगी सुनवाई, CBI ने माँगी फाँसी

सारांश

आरजी कर बलात्कार-हत्या मामला एक बार फिर नई अदालती पारी में प्रवेश कर गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट की नई डिवीजन बेंच के सामने अब तीन मोर्चे हैं — पीड़िता परिवार की CBI जाँच पर याचिका, CBI की फाँसी की माँग और दोषी संजय रॉय की बरी होने की अपील। न्याय की यह लड़ाई नौ महीने बाद भी जारी है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सजॉय पॉल ने आरजी कर रेप-मर्डर केस न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तिर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच को सौंपा।
CBI ने दोषी संजय रॉय की आजीवन कारावास की सजा के विरुद्ध मृत्युदंड की माँग करते हुए उच्च न्यायालय में आवेदन दाखिल किया।
संजय रॉय ने खुद को निर्दोष बताते हुए उच्च न्यायालय में अलग से अपील दायर की है।
पीड़िता के परिवार ने CBI जाँच की गुणवत्ता पर नई याचिका दायर की और घटनास्थल के दौरे की अनुमति माँगी।
12 मई 2025 को न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की बेंच ने खुद को मामले से अलग कर लिया था, जिसके बाद नई बेंच का गठन हुआ।
मूल घटना 9 अगस्त 2024 की है; सियालदह अदालत ने 20 जनवरी 2025 को संजय रॉय को आजीवन कारावास सुनाया था।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सजॉय पॉल ने 17 मई 2025 को आदेश दिया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक के बलात्कार और हत्या से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तिर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच करेगी। पीड़िता के परिवार की नई याचिका, दोषी संजय रॉय की अपील और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की मृत्युदंड माँग — तीनों पक्षों की सुनवाई एक साथ इसी बेंच के समक्ष होगी।

मामले का पृष्ठभूमि और नई बेंच का गठन

9 अगस्त 2024 को कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। अगले दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर जाँच CBI को सौंपी गई।

18 जनवरी 2025 को सियालदह अदालत ने संजय रॉय को दोषी करार दिया और 20 जनवरी 2025 को न्यायाधीश अनिरबान दास ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इससे पहले ही पीड़िता के परिवार ने CBI जाँच की गुणवत्ता को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी।

यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट की अलग-अलग बेंचों के बीच विचाराधीन रहा। 12 मई 2025 को न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की डिवीजन बेंच ने स्वयं को सुनवाई से अलग करते हुए कहा कि 'इस महत्वपूर्ण मामले की शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए।' इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने नई बेंच का गठन किया।

पीड़िता परिवार की माँगें

पीड़िता के परिवार ने दो प्रमुख माँगें रखी हैं — पहली, CBI जाँच की स्वतंत्र समीक्षा; और दूसरी, उस स्थान का दोबारा दौरा करने की अनुमति जहाँ महिला डॉक्टर का शव मिला था। न्यायमूर्ति मंथा की बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि CBI को इस दौरे पर कोई आपत्ति नहीं है, फिर पश्चिम बंगाल सरकार क्यों विरोध कर रही है, जबकि वह इस मामले में पक्षकार भी नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, परिवार के वकील सोमवार को नई बेंच के समक्ष मामले की शीघ्र सुनवाई की माँग कर सकते हैं।

CBI की फाँसी की माँग और संजय रॉय की अपील

CBI ने निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को अपर्याप्त मानते हुए उच्च न्यायालय में मृत्युदंड की माँग करते हुए आवेदन दाखिल किया है। दूसरी ओर, दोषी संजय रॉय ने खुद को निर्दोष बताते हुए अपनी सजा के विरुद्ध अपील दायर की है। न्यायमूर्ति मंथा की बेंच पहले ही कह चुकी थी कि इन दोनों याचिकाओं की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार

पीड़िता के माता-पिता ने एक समय सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया था कि एक ही याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय — दोनों में एक साथ सुनवाई क्यों हो। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट ही करेगा, और तब से यह मामला वहीं लंबित है।

आगे की राह

नई डिवीजन बेंच के समक्ष अब तीन अलग-अलग पक्षों की याचिकाएँ एक साथ आएँगी — पीड़िता परिवार की CBI जाँच पर सवाल उठाने वाली याचिका, CBI की फाँसी की माँग और संजय रॉय की बरी होने की अपील। यह मामला भारत में चिकित्सा संस्थानों में महिला सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता दोनों पर व्यापक बहस का केंद्र बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि परिवार अभी भी घटनास्थल देखने की बुनियादी अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रहा है। राज्य सरकार का उस दौरे पर आपत्ति जताना — जबकि वह मामले में पक्षकार भी नहीं — न्यायपालिका की नज़र में भी सवाल खड़े कर चुका है। असली परीक्षा यह है कि नई बेंच इन तीनों धाराओं को एकसाथ कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से आगे बढ़ाती है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरजी कर रेप-मर्डर केस क्या है?
9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया और बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने जाँच अपने हाथ में ली।
संजय रॉय को क्या सजा मिली है?
सियालदह अदालत ने 18 जनवरी 2025 को संजय रॉय को दोषी करार दिया और 20 जनवरी 2025 को न्यायाधीश अनिरबान दास ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। CBI इस सजा को अपर्याप्त मानते हुए मृत्युदंड की माँग के साथ कलकत्ता हाईकोर्ट पहुँची है।
कलकत्ता हाईकोर्ट में नई बेंच क्यों बनाई गई?
12 मई 2025 को न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए खुद को मामले से अलग कर लिया कि 'इस महत्वपूर्ण मामले की जल्द सुनवाई होनी चाहिए।' इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सजॉय पॉल ने न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तिर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच गठित की।
पीड़िता के परिवार की नई माँगें क्या हैं?
परिवार ने CBI जाँच की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय में नई याचिका दायर की है। साथ ही उन्होंने उस स्थान का दोबारा दौरा करने की अनुमति भी माँगी है जहाँ महिला डॉक्टर का शव मिला था, जिस पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई है।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका रही है?
पीड़िता के माता-पिता ने एक समय सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने स्पष्ट किया कि एक ही याचिका पर दोनों अदालतों में सुनवाई उचित नहीं है और मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में ही सुना जाएगा। तब से यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
राष्ट्र प्रेस
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