आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट की नई खंडपीठ करेगी सुनवाई, CBI ने माँगी फाँसी
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सजॉय पॉल ने 17 मई 2025 को आदेश दिया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक के बलात्कार और हत्या से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तिर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच करेगी। पीड़िता के परिवार की नई याचिका, दोषी संजय रॉय की अपील और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की मृत्युदंड माँग — तीनों पक्षों की सुनवाई एक साथ इसी बेंच के समक्ष होगी।
मामले का पृष्ठभूमि और नई बेंच का गठन
9 अगस्त 2024 को कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। अगले दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर जाँच CBI को सौंपी गई।
18 जनवरी 2025 को सियालदह अदालत ने संजय रॉय को दोषी करार दिया और 20 जनवरी 2025 को न्यायाधीश अनिरबान दास ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इससे पहले ही पीड़िता के परिवार ने CBI जाँच की गुणवत्ता को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी।
यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट की अलग-अलग बेंचों के बीच विचाराधीन रहा। 12 मई 2025 को न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की डिवीजन बेंच ने स्वयं को सुनवाई से अलग करते हुए कहा कि 'इस महत्वपूर्ण मामले की शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए।' इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने नई बेंच का गठन किया।
पीड़िता परिवार की माँगें
पीड़िता के परिवार ने दो प्रमुख माँगें रखी हैं — पहली, CBI जाँच की स्वतंत्र समीक्षा; और दूसरी, उस स्थान का दोबारा दौरा करने की अनुमति जहाँ महिला डॉक्टर का शव मिला था। न्यायमूर्ति मंथा की बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि CBI को इस दौरे पर कोई आपत्ति नहीं है, फिर पश्चिम बंगाल सरकार क्यों विरोध कर रही है, जबकि वह इस मामले में पक्षकार भी नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, परिवार के वकील सोमवार को नई बेंच के समक्ष मामले की शीघ्र सुनवाई की माँग कर सकते हैं।
CBI की फाँसी की माँग और संजय रॉय की अपील
CBI ने निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को अपर्याप्त मानते हुए उच्च न्यायालय में मृत्युदंड की माँग करते हुए आवेदन दाखिल किया है। दूसरी ओर, दोषी संजय रॉय ने खुद को निर्दोष बताते हुए अपनी सजा के विरुद्ध अपील दायर की है। न्यायमूर्ति मंथा की बेंच पहले ही कह चुकी थी कि इन दोनों याचिकाओं की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार
पीड़िता के माता-पिता ने एक समय सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया था कि एक ही याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय — दोनों में एक साथ सुनवाई क्यों हो। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट ही करेगा, और तब से यह मामला वहीं लंबित है।
आगे की राह
नई डिवीजन बेंच के समक्ष अब तीन अलग-अलग पक्षों की याचिकाएँ एक साथ आएँगी — पीड़िता परिवार की CBI जाँच पर सवाल उठाने वाली याचिका, CBI की फाँसी की माँग और संजय रॉय की बरी होने की अपील। यह मामला भारत में चिकित्सा संस्थानों में महिला सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता दोनों पर व्यापक बहस का केंद्र बना हुआ है।