CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल विजिलेंस की जांच, कांग्रेस ने हटाने की रणनीति तेज की
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक विवाद को 6 नवंबर 2026 को एक नया आयाम मिल गया, जब केरल के विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उनके राज्य सरकार में अधिकारी रहने के दौरान के एक कथित रिश्वत मामले में प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए। इसी दौरान कांग्रेस नेतृत्व उन्हें पद से हटाने की माँग को और तेज करने की रणनीति बना रहा है।
केरल विजिलेंस की जांच का पूरा मामला
केरल विजिलेंस ने पूर्व ठेकेदार साजन वी.ओ. की शिकायत पर यह जांच शुरू की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब ज्ञानेश कुमार केरल में PWD सचिव के पद पर थे, तब उन्होंने ₹2 करोड़ की रिश्वत माँगी थी। साजन वी.ओ. 'पैटीबेल' नाम की उस कंपनी से जुड़े थे, जो केरल राज्य परिवहन परियोजना के सड़क निर्माण कार्यों में शामिल थी।
शिकायत के अनुसार, कथित रूप से रिश्वत की माँग पूरी न होने पर करोड़ों रुपये के चार बिल रोक दिए गए। विजिलेंस निदेशक मनोज अब्राहम ने 'स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट-1' को इस मामले में जांच शुरू करने और 2007 की पुरानी विजिलेंस जांच से जुड़े दस्तावेजों तथा बयानों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। यह उल्लेखनीय है कि ये आरोप करीब दो दशक पुराने हैं और अब तक कथित तौर पर अप्रमाणित हैं।
कांग्रेस की रणनीतिक बैठक
कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक आयोजित कर रहे हैं, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य शीर्ष पदाधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। आधिकारिक तौर पर इसे दीपावली मिलन समारोह बताया गया है, लेकिन CEC के खिलाफ पार्टी की अगली रणनीति तय करने के लिहाज से यह बैठक महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन भी इस बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुँच गए हैं। उनकी उपस्थिति यह संकेत देती है कि केरल की विजिलेंस जांच और केंद्रीय राजनीतिक अभियान के बीच तालमेल बनाने पर भी चर्चा हो सकती है।
विपक्ष का व्यापक अभियान
'इंडिया' ब्लॉक पहले से ही CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर मुहिम चला रहा है। विपक्ष ने 31 अक्टूबर को एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग आयोजित किया था और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली भी की थी।
गौरतलब है कि इस महीने के अंत में संसद का अगला सत्र होने की संभावना है, और 'इंडिया' ब्लॉक संसद में CEC के खिलाफ नए कदम उठाने पर भी विचार कर रहा है।
राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ
यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता पर बहस पहले से ही तेज है। केरल की जांच — भले ही अभी प्रारंभिक चरण में है — CEC के खिलाफ चल रही व्यापक राजनीतिक लड़ाई को एक नई कानूनी धार दे सकती है।
आलोचकों का कहना है कि इस जांच का समय संदिग्ध है और यह राजनीति से प्रेरित हो सकती है, जबकि शिकायतकर्ता का पक्ष है कि यह एक पुराने और दबे हुए मामले को न्याय दिलाने का प्रयास है। आने वाले दिनों में संसद सत्र और जांच की प्रगति — दोनों इस विवाद की दिशा तय करेंगे।