6 नवंबर 2026
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भारत-वियतनाम सैन्य इंजीनियरिंग सहयोग: पीपुल्स आर्मी प्रतिनिधिमंडल ने साझा किए IED, आपदा राहत अनुभव

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भारत-वियतनाम सैन्य इंजीनियरिंग सहयोग: पीपुल्स आर्मी प्रतिनिधिमंडल ने साझा किए IED, आपदा राहत अनुभव

सारांश

वियतनाम की पीपुल्स आर्मी का चार सदस्यीय दल नई दिल्ली पहुँचा और भारतीय सैन्य इंजीनियरिंग कॉलेज का दौरा किया। युद्धक इंजीनियरिंग, IED निष्क्रियकरण और आपदा राहत पर हुई यह विशेषज्ञ-स्तरीय चर्चा दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को नई गहराई देती है।

मुख्य बातें

वियतनाम पीपुल्स आर्मी के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कॉलेज का दौरा किया।
दोनों देशों के विशेषज्ञों ने युद्धक इंजीनियरिंग , IED निष्क्रियकरण और आपदा राहत (HADR) पर तकनीकी अनुभव साझा किए।
यह दौरा सैन्य विशेषज्ञों के विषय-आधारित आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया था।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन त्रुओंग थांग की नई दिल्ली में हुई पूर्व बैठक इस सहयोग की पृष्ठभूमि है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वियतनाम की पीपुल्स आर्मी के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में भारतीय सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की और सेना के इंजीनियरिंग कॉलेज का दौरा किया। 6 नवंबर 2026 को संपन्न इस विनिमय कार्यक्रम में युद्धक इंजीनियरिंग, तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IED) को निष्क्रिय करने की तकनीक और आपदा राहत अभियानों पर गहन चर्चा हुई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ती व्यापक रणनीतिक साझेदारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

यह दौरा सैन्य विशेषज्ञों के बीच विषय-आधारित आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य सैन्य इंजीनियरिंग के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कार्य-अनुभव साझा करना था, साथ ही दोनों देशों के अधिकारियों को एक-दूसरे की क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करना था।

गौरतलब है कि यह दौरा उस उच्च-स्तरीय बैठक के बाद हुआ है जिसमें भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन त्रुओंग थांग से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों देशों के बीच मित्रता को सुदृढ़ करने और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।

मुख्य विषय और तकनीकी आदान-प्रदान

प्रतिनिधिमंडल ने युद्धक इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इसमें सैन्य अभियानों के दौरान इंजीनियरिंग सहायता, बाधाओं से निपटने की रणनीति और मिशन की सफलता में सैन्य इंजीनियरों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहे।

IED का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की तकनीकों पर भी विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। यह विषय समकालीन संघर्षों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन और आपदा राहत

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में इंजीनियरिंग सहायता और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों से जुड़े अनुभव भी साझा किए गए। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र मिशनों में सक्रिय योगदान देते हैं, और इस क्षेत्र में अनुभव-साझेदारी भविष्य के संयुक्त अभियानों में समन्वय को सुगम बना सकती है।

दोनों देशों के प्रतिनिधियों को अपनी-अपनी सेनाओं में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को आपस में समझने का अवसर मिला, जो दीर्घकालिक सैन्य सहयोग की नींव रखता है।

भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों पर असर

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के विषय-आधारित कार्यक्रम दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को मज़बूत करते हैं। भारत और वियतनाम के रक्षा संबंध हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से गहरे हुए हैं, जिसमें रक्षा सचिव स्तरीय बैठकें और इस तरह के सैन्य-से-सैन्य विनिमय कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

यह सहयोग ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और दोनों देश इस क्षेत्र की स्थिरता में साझा हित रखते हैं। भविष्य में सैन्य इंजीनियरिंग और HADR क्षेत्रों में और गहरे द्विपक्षीय सहयोग की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय और विषय-चुनाव सोचा-समझा है। IED निष्क्रियकरण और युद्धक इंजीनियरिंग पर ज़ोर बताता है कि दोनों देश सिर्फ सांकेतिक सैन्य कूटनीति नहीं, बल्कि परिचालन-स्तर की क्षमता-साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती मुखरता के बीच भारत और वियतनाम — दोनों को जिससे सीधी भू-सामरिक चुनौती है — का यह सैन्य क़रीबी आना महज़ संयोग नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज इसे 'रूटीन एक्सचेंज' बताकर छोड़ देती है, जबकि असली कहानी यह है कि रक्षा सचिव स्तरीय बैठक के तुरंत बाद का यह व्यावहारिक अनुसरण दर्शाता है कि द्विपक्षीय रक्षा ढाँचा अब घोषणाओं से आगे निकलकर क्रियान्वयन की पटरी पर आ रहा है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वियतनाम पीपुल्स आर्मी का भारत दौरा किस उद्देश्य से हुआ?
यह दौरा सैन्य विशेषज्ञों के विषय-आधारित आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत हुआ, जिसका उद्देश्य सैन्य इंजीनियरिंग क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान और कार्य-अनुभव साझा करना था। इसमें दोनों देशों के अधिकारियों ने एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने का प्रयास किया।
इस दौरे में किन विषयों पर चर्चा हुई?
दोनों देशों के विशेषज्ञों ने युद्धक इंजीनियरिंग, तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IED) का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की तकनीक, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में इंजीनियरिंग सहायता और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों पर विस्तृत चर्चा की।
भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों की ताज़ा स्थिति क्या है?
हाल ही में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन त्रुओंग थांग के बीच नई दिल्ली में बैठक हुई थी। उस बैठक में व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी, जिसका व्यावहारिक अनुसरण इस सैन्य इंजीनियरिंग विनिमय दौरे के रूप में सामने आया।
इस सैन्य सहयोग का क्षेत्रीय महत्व क्या है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत और वियतनाम की बढ़ती सैन्य क़रीबी दोनों देशों के साझा भू-सामरिक हितों को दर्शाती है। इस तरह के विषय-आधारित कार्यक्रम दीर्घकालिक सैन्य समन्वय और आपसी समझ की नींव रखते हैं।
भारत का सेना इंजीनियरिंग कॉलेज कहाँ स्थित है और इसकी भूमिका क्या है?
वियतनामी प्रतिनिधिमंडल ने भारत के सेना के इंजीनियरिंग कॉलेज का दौरा किया, जो सैन्य इंजीनियरिंग प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। इस कॉलेज में युद्धक इंजीनियरिंग, IED प्रबंधन और HADR जैसे विषयों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है, और यह भारत के रक्षा कूटनीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन रहा है।
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