भारत-वियतनाम सैन्य इंजीनियरिंग सहयोग: पीपुल्स आर्मी प्रतिनिधिमंडल ने साझा किए IED, आपदा राहत अनुभव
सारांश
मुख्य बातें
वियतनाम की पीपुल्स आर्मी के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में भारतीय सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की और सेना के इंजीनियरिंग कॉलेज का दौरा किया। 6 नवंबर 2026 को संपन्न इस विनिमय कार्यक्रम में युद्धक इंजीनियरिंग, तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IED) को निष्क्रिय करने की तकनीक और आपदा राहत अभियानों पर गहन चर्चा हुई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ती व्यापक रणनीतिक साझेदारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यह दौरा सैन्य विशेषज्ञों के बीच विषय-आधारित आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य सैन्य इंजीनियरिंग के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कार्य-अनुभव साझा करना था, साथ ही दोनों देशों के अधिकारियों को एक-दूसरे की क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करना था।
गौरतलब है कि यह दौरा उस उच्च-स्तरीय बैठक के बाद हुआ है जिसमें भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन त्रुओंग थांग से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों देशों के बीच मित्रता को सुदृढ़ करने और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
मुख्य विषय और तकनीकी आदान-प्रदान
प्रतिनिधिमंडल ने युद्धक इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इसमें सैन्य अभियानों के दौरान इंजीनियरिंग सहायता, बाधाओं से निपटने की रणनीति और मिशन की सफलता में सैन्य इंजीनियरों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहे।
IED का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की तकनीकों पर भी विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। यह विषय समकालीन संघर्षों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन और आपदा राहत
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में इंजीनियरिंग सहायता और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों से जुड़े अनुभव भी साझा किए गए। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र मिशनों में सक्रिय योगदान देते हैं, और इस क्षेत्र में अनुभव-साझेदारी भविष्य के संयुक्त अभियानों में समन्वय को सुगम बना सकती है।
दोनों देशों के प्रतिनिधियों को अपनी-अपनी सेनाओं में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को आपस में समझने का अवसर मिला, जो दीर्घकालिक सैन्य सहयोग की नींव रखता है।
भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों पर असर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के विषय-आधारित कार्यक्रम दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को मज़बूत करते हैं। भारत और वियतनाम के रक्षा संबंध हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से गहरे हुए हैं, जिसमें रक्षा सचिव स्तरीय बैठकें और इस तरह के सैन्य-से-सैन्य विनिमय कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह सहयोग ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और दोनों देश इस क्षेत्र की स्थिरता में साझा हित रखते हैं। भविष्य में सैन्य इंजीनियरिंग और HADR क्षेत्रों में और गहरे द्विपक्षीय सहयोग की उम्मीद जताई जा रही है।