जयशंकर ने भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग के 19वें सत्र में कहा — वियतनाम 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का अहम साझेदार
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग पर भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग के 19वें सत्र की बैठक को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। जयशंकर ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और हिंद-प्रशांत रणनीति में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है।
द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति
जयशंकर ने बैठक में कहा कि तीन वर्ष पूर्व हुई पिछली संयुक्त आयोग की बैठक के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में वियतनाम की ओर से दो महत्वपूर्ण राजकीय यात्राएँ आयोजित हुईं।
इनमें सबसे हाल की यात्रा वियतनाम के महासचिव एवं राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा रही। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने परस्पर संबंधों को नई ऊँचाई देते हुए 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक पहुँचाया।
वियतनाम — क्षेत्र में पहला देश
विदेश मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वियतनाम इस पूरे क्षेत्र में पहला ऐसा देश है जिसके साथ भारत के संबंध 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के उच्चतम स्तर तक पहुँचे हैं — यह एक कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
जयशंकर के अनुसार, 19वीं संयुक्त आयोग बैठक का उद्देश्य अब तक किए गए वादों और समझौतों की समीक्षा करना है, ताकि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा निर्मित सकारात्मक माहौल को आम नागरिकों के लिए ठोस और वास्तविक परिणामों में परिवर्तित किया जा सके।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी और हिंद-प्रशांत में वियतनाम की भूमिका
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए वियतनाम 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', 'महासागर' दृष्टिकोण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समग्र रणनीति का एक अभिन्न साझेदार है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वियतनाम आसियान के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने में भी एक अहम सहयोगी की भूमिका निभाता है।
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत अपनी पूर्व-उन्मुख विदेश नीति को और अधिक सक्रियता से आगे बढ़ा रहा है तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के प्रयास में है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और वियतनाम की सहभागिता
जयशंकर ने वियतनाम के प्रधानमंत्री की 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में सार्थक भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस भागीदारी ने दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को और प्रगाढ़ किया है।
आगे की राह
विदेश मंत्री ने बैठक को 'उपयोगी और सकारात्मक चर्चा का अवसर' बताते हुए उम्मीद जताई कि दोनों देश व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में नए मील के पत्थर स्थापित करेंगे। भारत-वियतनाम साझेदारी आने वाले वर्षों में हिंद-प्रशांत की भू-राजनीतिक संरचना में और अधिक प्रासंगिक होती जाएगी।