केरल विधानसभा ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित किया, BJP ने जलाई प्रति
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूची से अनुचित तरीके से हटाए गए योग्य नागरिकों के मताधिकार की बहाली और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की माँग की गई है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा पेश किया गया और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के विधायकों के समर्थन से पारित हुआ।
प्रस्ताव में क्या है
मुख्यमंत्री सतीशन ने बताया कि इस प्रस्ताव में तीन प्रमुख माँगें रखी गई हैं — पहली, मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को दूर करना; दूसरी, गलत तरीके से सूची से हटाए गए योग्य मतदाताओं के मतदान अधिकार बहाल करना; और तीसरी, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना तथा चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए गठित समिति में संरचनात्मक सुधार करना।
प्रस्ताव में यह भी सुनिश्चित करने की माँग की गई है कि किसी भी योग्य नागरिक को संवैधानिक मताधिकार से वंचित न किया जाए।
विधानसभा में पक्ष-विपक्ष
140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के 102 सदस्य, LDF के 35 सदस्य और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 3 सदस्य हैं। LDF के विधायकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि BJP के तीनों विधायकों ने इसका विरोध किया।
गौरतलब है कि सत्तारूढ़ LDF के पास स्वयं केवल 35 सीटें हैं, अर्थात बहुमत के लिए उसे UDF के समर्थन की आवश्यकता पड़ी — यह संसदीय राजनीति की दृष्टि से एक उल्लेखनीय तथ्य है।
मुख्यमंत्री सतीशन का बयान
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि केरल ने इतिहास रचा है, क्योंकि पहली बार किसी राज्य विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग करते हुए प्रस्ताव पारित किया है।
उन्होंने सदन में कहा, 'हमारी चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वोट देने का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।'
BJP का विरोध और विधानसभा के बाहर का दृश्य
प्रस्ताव पारित होते ही BJP समर्थकों ने विधानसभा परिसर के बाहर प्रस्ताव की एक प्रति जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। BJP विधायकों ने सदन में भी इस प्रस्ताव का विरोध किया।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कई विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की घटनाएँ एक से अधिक राज्यों में सामने आई हैं।
आगे क्या होगा
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य विधानसभा के प्रस्ताव का CEC को हटाने पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होता — यह एक राजनीतिक संदेश है, कानूनी तंत्र नहीं। CEC को हटाने की शक्ति संसद के पास है। हालाँकि, इस प्रस्ताव के ज़रिए केरल ने केंद्र और चुनाव आयोग पर नैतिक दबाव बनाने की कोशिश की है। यह देखना होगा कि अन्य विपक्षी-शासित राज्य इसी राह पर चलते हैं या नहीं।