केरल विधानसभा में सीएम सतीशन पेश करेंगे सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन सोमवार, 11 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र नागरिकों के मतदाधिकार बहाल करने और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की माँग वाला प्रस्ताव पेश करने वाले हैं। यह प्रस्ताव नियम 118 के तहत सूचीबद्ध किया गया है और विधानसभा बुलेटिन में इसे रविवार को जारी किया गया।
प्रस्ताव में क्या है
प्रस्ताव के मसौदे में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के चलते निर्वाचन आयोग के प्रति जनता का भरोसा कमजोर हुआ है। मसौदे के अनुसार, स्पष्ट मानदंडों या पूर्व सूचना के बिना लाखों पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
प्रस्ताव में वंचित समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों और युवा मतदाताओं को उन समूहों के रूप में चिह्नित किया गया है, जिनके मतदान के अधिकार प्रक्रियागत खामियों और कथित हेरफेर के कारण प्रभावित हो सकते हैं। मसौदे में तर्क दिया गया है कि पात्र नागरिकों को सूची से बाहर रखना वयस्क मताधिकार की संवैधानिक गारंटी के विरुद्ध है।
सॉफ्टवेयर और कानूनी प्रावधानों पर सवाल
प्रस्ताव में मतदाता सूची तैयार करने और सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर पर भी आपत्ति जताई गई है। मसौदे में आरोप है कि इस प्रणाली ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों को सीमित किया है।
इसके साथ ही प्रस्ताव में आरोप है कि फॉर्म-6 में नियमों के विपरीत संशोधन किए गए। मीडिया में आई उन खबरों का भी संदर्भ दिया गया है, जिनमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि निर्वाचन आयोग के अधिकांश सदस्यों ने इन उपायों पर असहमति जताई थी।
चयन समिति की संरचना बदलने की माँग
प्रस्ताव में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति की संरचना में बदलाव की माँग की गई है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश को शामिल करते हुए एक समिति गठित करने का सुझाव दिया गया है।
मसौदे में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा बाद में बनाए गए कानून में प्रधान न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर कर दिया गया, जिससे कार्यपालिका को बहुमत मिल गया और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता कमजोर हुई। गौरतलब है कि यह सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश के ठीक विपरीत है, जो 2023 में दिया गया था।
सीईसी को हटाने की माँग और प्रस्ताव की सीमाएँ
प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने के लिए कदम उठाने की माँग की गई है, यह कहते हुए कि संस्थागत विश्वसनीयता बहाल करने के लिए यह आवश्यक है। हालाँकि, विधानसभा बुलेटिन में केवल प्रस्ताव पेश किए जाने का उल्लेख है — इसके पारित होने का कोई संकेत नहीं दिया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच संबंधों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। केरल उन राज्यों में शामिल हो गया है जो मतदाता सूची में हुए बदलावों पर आधिकारिक स्तर पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर विधानसभा में होने वाली चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर इस बहस को और तेज़ कर सकती है।