सीईसी ज्ञानेश कुमार पर घमासान: केरल CM वीडी सतीशन ने माँगा इस्तीफा, पूर्व मुख्य सचिव का BJP टिकट वाला आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 27 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की। यह माँग राज्य के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के उस कथित आरोप के बाद सामने आई है, जिसमें थॉमसन ने दावा किया है कि 2016 में दिल्ली जाने वाली एक फ्लाइट में ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था।
थॉमसन का आरोप: क्या है दावा
पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के अनुसार, 2016 की वह बातचीत दिल्ली जाने वाली उड़ान के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने सुझाव दिया था कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद वे 2019 के आम चुनाव में BJP उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। थॉमसन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह प्रस्ताव उसी समय ठुकरा दिया था।
गौरतलब है कि यह बातचीत ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त होने से कई वर्ष पहले की बताई जा रही है। थॉमसन का यह विवरण अभी तक एक आरोप ही है — मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में इस फ्लाइट वार्तालाप की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में सतीशन ने थॉमसन के दावे को 'बेहद गंभीर' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस आरोप से देश के शीर्ष चुनाव अधिकारी की निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े होते हैं। सतीशन ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने अपने कार्यकाल में ऐसे काम किए जिनसे BJP को फायदा पहुँचा, हालाँकि उन्होंने अपने बयान में इस संबंध में किसी विशेष चुनाव आयोग के फैसले का उल्लेख नहीं किया।
सतीशन ने तर्क दिया कि सीईसी का पद पर बने रहना लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को और कमज़ोर करेगा, खासतौर पर ऐसे समय में जब चुनाव आयोग पहले से ही अपने कामकाज को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा है।
राजनीतिक संदर्भ और विपक्षी माँग
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस जारी है। मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि थॉमसन के दावे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पहले जताई गई चिंताओं को और बल दिया है। विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को मिलकर आगे बढ़ाया है।
इसके साथ ही, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों के तरीके को लेकर आयोग सदस्यों के बीच मतभेद की खबरों ने इस राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया है।
आरोप की सीमाएँ और आगे की राह
विश्लेषकों का कहना है कि 2016 की कथित निजी बातचीत पर आधारित यह आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना फिलहाल संभव नहीं है। यह पहली बार नहीं है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को राजनीतिक पक्षपात के आरोपों का सामना करना पड़ा हो — लेकिन इस मामले की विशिष्टता यह है कि आरोप किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह ने सीधे तौर पर लगाए हैं।
चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई स्थिति स्पष्ट करती है।