केरल CM सतीशन का CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला, X पर इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 27 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़े पोस्ट के ज़रिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उनसे तत्काल इस्तीफे की मांग की। सतीशन ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को 'एक पल के लिए भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।'
जिजी थॉमसन के खुलासों का हवाला
मुख्यमंत्री सतीशन ने अपनी पोस्ट में केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के हालिया खुलासों को आधार बनाया। उन्होंने लिखा, 'केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो खुलासे किए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। यह साबित करने के लिए किसी और सबूत की जरूरत नहीं है कि ज्ञानेश कुमार ने भाजपा के एजेंट के तौर पर काम किया।' गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल लंबे समय से चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाते रहे हैं।
लोकतंत्र को खतरा बताया
सतीशन ने अपनी पोस्ट में ज्ञानेश कुमार पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 'भाजपा के इशारे पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाले एक ऑपरेटिव के तौर पर काम किया।' उन्होंने यह भी लिखा, 'इतिहास ज्ञानेश कुमार को उस व्यक्ति के तौर पर याद रखेगा जिसने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को भाजपा के हाथों बेच दिया और भारतीय लोकतंत्र को मौत की सजा सुनाई।' ये आरोप ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से अब तक खंडित नहीं किए गए हैं।
संविधान और संस्थागत पवित्रता का जिक्र
मुख्यमंत्री ने संवैधानिक मूल्यों का संदर्भ देते हुए कहा कि 'देश के सबसे ऊँचे संवैधानिक पदों में से एक पर रहते हुए लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाले ज्ञानेश कुमार को एक पल के लिए भी पद पर नहीं बने रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि संविधान स्वयं चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और शुचिता पर ज़ोर देता है। सतीशन ने ज्ञानेश कुमार को 'आपराधिक सोच वाले अधिकारी' तक कहा, जो भाषा की तीव्रता के लिहाज़ से असाधारण है।
राहुल गांधी के बयान का समर्थन
अपनी पोस्ट के अंत में सतीशन ने कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि 'विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जो बातें पहले कही थीं, वे अब सच साबित हो गई हैं।' यह बयान इंगित करता है कि विपक्षी एकता के स्वर में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर आरोप अब और मुखर होते जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर बहस जारी है।
आगे क्या
ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक टकराव से संस्थागत विश्वसनीयता पर बहस और तेज़ होगी, विशेषकर आगामी चुनावी चक्र को देखते हुए।