9 अक्टूबर 2026
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एसआईआर में गड़बड़ी पर केटीआर का बड़ा हमला, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से माँगा इस्तीफा

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एसआईआर में गड़बड़ी पर केटीआर का बड़ा हमला, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से माँगा इस्तीफा

सारांश

बीआरएस के केटीआर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला है — एसआईआर में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए इस्तीफे की माँग की और सर्वोच्च न्यायालय से स्वत: संज्ञान का आग्रह किया। शनिवार को हैदराबाद में प्रदर्शन और फिर दिल्ली अभियान की योजना — यह मुद्दा अब राष्ट्रीय रूप लेने की ओर है।

मुख्य बातें

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने 9 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की।
केटीआर ने एक्स पर पोस्ट कर मतदाता सूची के एसआईआर में कथित अनियमितताओं की ओर ध्यान खींचा और सर्वोच्च न्यायालय से स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया।
हरीश राव ने संविधान के अनुच्छेद 324, 325, 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए इस्तीफे की माँग दोहराई।
पार्टी ने आरोप लगाया कि बीआरएस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए गए।
बीआरएस शनिवार, 10 अक्टूबर को हैदराबाद में सीईओ कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेगी और बाद में मुद्दे को नई दिल्ली तक ले जाएगी।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने 9 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की, जिसे उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं से जोड़ा। हैदराबाद से उठी यह माँग उस वक्त और गहरी हो गई जब बीआरएस ने शनिवार को तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन का ऐलान कर दिया।

केटीआर के आरोप और माँग

केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भारतीय संविधान से बड़ा कुछ नहीं है। किसी भी भारतीय नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।' उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और कोई भी व्यक्ति संस्था से बड़ा नहीं है।

केटीआर ने प्रश्न उठाया, 'क्या एक व्यक्ति 140 करोड़ भारतीयों के अधिकारों से बड़ा हो सकता है?' उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने और किसी मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जाँच कराने का भी आग्रह किया।

हरीश राव की संवैधानिक दलीलें

तेलंगाना विधानसभा में बीआरएस के उपनेता टी. हरीश राव ने भी एक्स पर पोस्ट के ज़रिए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में विश्वसनीय, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव प्रणाली सुनिश्चित करना संवैधानिक दायित्व है।

हरीश राव ने कहा कि निर्वाचन आयोग भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है, न कि सत्ता में बैठे लोगों को बचाने का माध्यम। उनके अनुसार, 'यदि निर्वाचन आयोग जनता का विश्वास हासिल करने में विफल रहता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए।'

बीआरएस की मुख्य चिंता: मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप

पार्टी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत बीआरएस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। बीआरएस ने इन कथित अनियमितताओं की व्यापक और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। गौरतलब है कि एसआईआर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इस बार इसके क्रियान्वयन को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष है।

आगे की रणनीति: हैदराबाद से दिल्ली तक

बीआरएस ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सामने प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसके बाद पार्टी इस मुद्दे को नई दिल्ली तक ले जाने की योजना बना रही है। यह दो-चरणीय अभियान बीआरएस के लिए राज्य की सीमाओं से परे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का भी प्रयास है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ सामने आ रही हैं। बीआरएस की यह माँग अगले कुछ दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के रुख पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विपक्ष की उस बड़ी चिंता का प्रतिबिंब है जो मतदाता सूची की शुचिता को लेकर कई राज्यों में उभर रही है। असली सवाल यह है कि एसआईआर जैसी नियमित प्रक्रिया चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में इतनी विवादास्पद क्यों बन गई — और चुनाव आयोग ने अब तक विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया। बीआरएस का दिल्ली अभियान संकेत देता है कि यह मुद्दा तेलंगाना की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा — और सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केटीआर ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग क्यों की?
केटीआर ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। बीआरएस का आरोप है कि पार्टी विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है। इसमें डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार यह प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण तरीके से की गई।
बीआरएस ने सर्वोच्च न्यायालय से क्या माँग की है?
बीआरएस के केटीआर ने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने और किसी मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जाँच कराने का आग्रह किया है। पार्टी चाहती है कि एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और व्यापक जाँच हो।
बीआरएस का आगे क्या अभियान है?
बीआरएस शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेगी। इसके बाद पार्टी इस मुद्दे को नई दिल्ली तक ले जाने की योजना बना रही है।
हरीश राव ने किन संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया?
बीआरएस उपनेता टी. हरीश राव ने संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के तहत किसी भी पात्र मतदाता को मनमाने तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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