8 अक्टूबर 2026
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बिहार एसआईआर विवाद: तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन का राजभवन मार्च, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

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बिहार एसआईआर विवाद: तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन का राजभवन मार्च, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

सारांश

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने 8 अक्टूबर को पटना में राजभवन मार्च कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। मीसा भारती, मुकेश सहनी समेत प्रमुख नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। बिहार चुनाव से पहले एसआईआर विवाद अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में राजभवन की ओर विरोध मार्च निकाला।
मार्च में मुकेश सहनी (VIP) , राजेश राम (कांग्रेस) , मीसा भारती (RJD) और वाम दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
महागठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की; प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति मिली, शेष प्रदर्शनकारियों को रोका गया।
मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि 'लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ हुआ और वोट चोरी से चुनाव प्रभावित किया गया।'

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर महागठबंधन ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में राजभवन की ओर विरोध मार्च निकाला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। राजभवन पहुँचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा।

मार्च में शामिल प्रमुख नेता

विरोध मार्च में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पाटलिपुत्र से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सांसद मीसा भारती और वाम दलों के वरिष्ठ नेता शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर तथा चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

गौरतलब है कि महागठबंधन की ओर से एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ इससे पहले भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। यह मार्च उसी सिलसिले की नवीनतम और अब तक की सबसे बड़ी कड़ी मानी जा रही है।

पुलिस बंदोबस्त और तनातनी

पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए मार्ग में कई स्थानों पर भारी बैरिकेडिंग की थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। सांसद मीसा भारती ने कहा कि 'पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई थी और चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान मौजूद थे।' उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन ने शांतिपूर्ण मार्च की अनुमति माँगी थी।

कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनातनी की स्थिति भी बताई गई। एसडीपीओ सचिवालय अनु कुमारी ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल भवन में राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी गई थी, जबकि शेष प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड के पीछे रोका गया।

राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में क्या था

राजभवन पहुँचने के बाद महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भेंट की और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग वाला ज्ञापन सौंपा। मुकेश सहनी ने राजभवन से बाहर निकलने के बाद कहा कि 'लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया गया और वोट चोरी के जरिए चुनाव को प्रभावित किया गया।'

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इसे लेकर उठाए जा रहे सवालों का समाधान होना चाहिए।

आम जनता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ नज़दीक हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। आलोचकों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना कठिन होगा।

विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी माँगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। आने वाले दिनों में महागठबंधन की अगली रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव की एक नई और गंभीर मिसाल है। दूसरी ओर, यह भी जाँचने योग्य है कि एसआईआर प्रक्रिया में वास्तव में क्या खामियाँ हैं और क्या ये आरोप तथ्यात्मक आधार पर टिके हैं या केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं। बिना ठोस साक्ष्य-आधारित बहस के यह विवाद संस्थागत विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा की एक प्रक्रिया है जो चुनाव आयोग द्वारा कराई जाती है। बिहार में महागठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इसके जरिए मतदाता सूची को प्रभावित किया जा रहा है।
महागठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँगा?
महागठबंधन का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के संचालन में चुनाव आयोग की भूमिका पक्षपातपूर्ण रही है और 'वोट चोरी' के जरिए चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। इसी आधार पर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की है।
8 अक्टूबर के राजभवन मार्च में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
मार्च का नेतृत्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने किया। इनके साथ VIP प्रमुख मुकेश सहनी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, RJD सांसद मीसा भारती और वाम दलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
राजभवन मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच क्या हुआ?
पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर कई स्थानों पर भारी बैरिकेडिंग की और बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनातनी की भी स्थिति बनी। प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी गई, जबकि बाकी लोगों को बैरिकेड के पीछे रोका गया।
महागठबंधन आगे क्या कदम उठा सकता है?
विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि यदि एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इससे पहले भी महागठबंधन इस मुद्दे पर कई विरोध कार्यक्रम आयोजित कर चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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