एसआईआर और वोट चोरी पर इंडिया गठबंधन एकजुट, बिहार में राजभवन कूच; राजेश राम का ज्ञानेश कुमार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नवंबर 2025 के चुनाव के बाद पहली बार एसआईआर (मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन पूरी ताकत से एकजुट हो रहा है। राम के अनुसार, राहुल गांधी की अगुवाई में दिल्ली में हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि यह आंदोलन पूरे देश में संयुक्त रूप से लड़ा जाएगा।
बिहार में राजभवन कूच की तैयारी
राजेश राम ने बताया कि इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल गुरुवार को बिहार में राजभवन तक संयुक्त मार्च करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन दो स्तरों पर एक साथ चलेगा — पार्टी स्तर पर अलग-अलग और गठबंधन स्तर पर संयुक्त रूप से। यह पहली बार है जब नवंबर 2025 की चुनावी प्रक्रिया के बाद इंडिया गठबंधन एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध इतने बड़े पैमाने पर एकजुट हो रहा है।
राजेश राम के आरोप: मोदी सरकार पर 'मिशन' का तंज
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पहला 'मिशन' नोटबंदी था, जिसमें आधी रात को घोषणा की गई और बैंकों की लाइनों में कई लोगों की जान चली गई। दूसरा 'मिशन' कोरोना काल में थाली-ताली बजाने का था, जबकि कथित तौर पर लाखों लोग ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ते रहे और हजारों प्रवासी मजदूर बिना किसी सरकारी सहायता के पैदल घर लौटने पर मजबूर हुए।
राम ने आरोप लगाया कि तीसरा 'मिशन' प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए इस्तेमाल करना था। उनका कहना था कि इन केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग विपक्ष की आवाज कुचलने के लिए किया गया।
वोट चोरी और एसआईआर पर केंद्रीय आरोप
राजेश राम ने दावा किया कि 2014 के बाद देश में हुए विभिन्न चुनावों में एसआईआर के माध्यम से 13 से 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उनके अनुसार, यह चुनाव आयोग के साथ कथित साजिश का हिस्सा था। उन्होंने आगे दावा किया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने राहुल गांधी के उन दावों को प्रमाणित किया है, जो वे पिछले तीन वर्षों से वोट चोरी के संदर्भ में करते आ रहे हैं। गौरतलब है कि ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक असर
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन देशभर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना विरोध तेज कर रहा है। बिहार, जो कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रदेश है, में यह राजभवन मार्च गठबंधन की एकजुटता का प्रतीकात्मक प्रदर्शन माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
आने वाले दिनों में इंडिया गठबंधन के इस आंदोलन का देशव्यापी विस्तार और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगी।