क्या कर्नाटक में आबकारी विभाग के अधिकारियों की गिरफ्तारी ने भ्रष्टाचार की कहानी को उजागर किया?

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क्या कर्नाटक में आबकारी विभाग के अधिकारियों की गिरफ्तारी ने भ्रष्टाचार की कहानी को उजागर किया?

सारांश

कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने आबकारी विभाग के अधिकारियों की गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों को उजागर किया है। यह कहानी जाल बिछाने और रिश्वतखोरी के नेटवर्क की तस्वीर पेश करती है। क्या यह कर्नाटक में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई शुरुआत है?

Key Takeaways

  • कर्नाटक में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
  • आबकारी विभाग के अधिकारियों की गिरफ्तारी से सनसनी।
  • सीबीआई की जांच में तेजी।

बेंगलुरु, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के आरोप में आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, लक्ष्मीनारायण नामक व्यक्ति ने आबकारी विभाग में बार लाइसेंस (सी7) के लिए आवेदन किया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उपायुक्त जगदीश नायक और अधीक्षक केएम थम्मैया ने लाइसेंस देने के बदले 80 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। लक्ष्मीनारायण ने लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया, जिन्होंने जाल बिछाकर दोनों को 25 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। रिश्वत की रकम पहुंचाने में कथित तौर पर शामिल आबकारी कांस्टेबल लक्कप्पा गनी को भी गिरफ्तार किया गया है।

लोकायुक्त पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। उपायुक्त और अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी से आबकारी विभाग में सनसनी फैल गई है, और अन्य संभावित भ्रष्टाचार का पता लगाने के लिए गहन जांच जारी है।

इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रिश्वतखोरी के एक मामले में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग क्षेत्र से दो सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में राजस्व विभाग का एक पटवारी और उसी हल्का सोफ शाली, कोकरनाग में तैनात एक चौकीदार शामिल है।

सीबीआई के मुताबिक, दोनों आरोपियों को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।

सीबीआई ने इस मामले में गुरुवार को आरोपी पटवारी के खिलाफ केस दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पटवारी ने शिकायतकर्ता की जमीन की निशानदेही करने के एवज में 30,000 रुपए की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद आरोप को सही पाए जाने पर सीबीआई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जाल बिछाने का फैसला किया।

जांच एजेंसी ने गुरुवार को योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाया। आरोपी पटवारी ने बिचौलिए के रूप में काम कर रहे चौकीदार के माध्यम से शिकायतकर्ता से 15,000 रुपए की रिश्वत ली। इसी दौरान सीबीआई की टीम ने दोनों आरोपियों को मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद दोनों सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

Point of View

यह घटना कर्नाटक में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की गंभीरता को दर्शाती है। अधिकारियों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि सरकार सच में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

कर्नाटक में आबकारी विभाग के अधिकारियों की गिरफ्तारी का कारण क्या था?
उन पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे, जिसमें 80 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का मामला शामिल है।
क्या लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाकर अधिकारियों को पकड़ा?
हां, लोकायुक्त पुलिस ने 25 लाख रुपए की रिश्वत लेते समय अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा।
इस मामले में सीबीआई की भूमिका क्या थी?
सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर में रिश्वतखोरी के एक अलग मामले में दो सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया।
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