इंदौर में लोकायुक्त ने दो अधिकारियों को 90 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा
सारांश
Key Takeaways
- लोकायुक्त ने इंदौर में दो अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ा।
- गिरफ्तारी 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए हुई।
- यह कार्रवाई महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश पर की गई।
- शिकायतकर्ता की फर्म ने 20 लाख रुपए का काम किया था।
- अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
इंदौर, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग के दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश पर की गई, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया।
गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में बालकुमार जैन, जो सहायक यंत्री एवं प्रभारी कार्यपालन अधिकारी हैं, और धीरेंद्र कुमार नीमा, जो उपयंत्री एवं प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, शामिल हैं। दोनों को कुल 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
यह कार्रवाई ग्वालियर निवासी राघवेन्द्र सिंह गुर्जर की शिकायत के आधार पर की गई। वे एक निजी फर्म में लायजनिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी फर्म को सितंबर 2025 में राऊ से बामपुरा तक इलेक्ट्रिक सिटिंग का काम लगभग 20 लाख रुपए में मिला था। फर्म ने निर्धारित समय सीमा में काम पूरा कर लिया, लेकिन करीब 17 लाख रुपए का भुगतान विभाग द्वारा रोक लिया गया था।
आरोप है कि इस लंबित भुगतान को जारी करने के बदले अधिकारियों ने रिश्वत की मांग की। बालकुमार जैन ने 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपए और धीरेंद्र नीमा ने 2 प्रतिशत के हिसाब से 30 हजार रुपए की मांग की थी।
शिकायत की प्रारंभिक जांच और सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई। पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के नेतृत्व में एक विशेष ट्रैप दल गठित किया गया। 7 अप्रैल 2026 को सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया गया और दोनों आरोपियों को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।