राजेश खन्ना और मुमताज: 1970s की वो जोड़ी जिसने हिंदी सिनेमा को दिए अविस्मरणीय रोमांटिक पल
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा के 1970 के दशक में राजेश खन्ना और मुमताज की जोड़ी पर्दे पर जब भी एक साथ उतरी, दर्शकों ने उसे सिर से आँखों पर बिठाया। दोनों की स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी स्वाभाविक थी कि उनके रोमांटिक दृश्य बनावटी नहीं, बल्कि जीवंत लगते थे। मुंबई की फिल्मी दुनिया में यह जोड़ी उस दौर की सबसे चर्चित और सफल जोड़ियों में गिनी जाती है।
मुमताज का सफर: एक्शन से रोमांस तक
मुमताज अस्करी का जन्म 31 जुलाई 1947 को मुंबई में हुआ था। बचपन से ही फिल्मी माहौल में पली-बढ़ीं मुमताज ने बेहद कम उम्र में परदे पर कदम रख दिया था। शुरुआती दौर में उन्हें छोटे किरदार मिले और एक समय वह मुख्यतः एक्शन फिल्मों की अभिनेत्री के रूप में जानी जाती थीं।
अभिनेता दारा सिंह के साथ कई फिल्मों में काम करने के बाद मुमताज को लोकप्रियता तो मिली, लेकिन असली पहचान तब बनी जब उन्होंने बड़े सितारों के साथ मुख्य भूमिकाएँ निभाईं। धीरे-धीरे उनकी खूबसूरती, अभिनय और नृत्य की चर्चा पूरे उद्योग में होने लगी।
यादगार फिल्में और राजेश खन्ना के साथ केमिस्ट्री
मुमताज ने 'दुश्मन', 'प्रेम नगर', 'रोटी', 'खिलौना', 'महबूबा', 'ये रात फिर ना आएगी', 'हमराज', 'ब्रह्मचारी' और 'चोर सिपाही' जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसी दौर में उनकी जोड़ी राजेश खन्ना के साथ बनी, जो उस समय हिंदी सिनेमा के शीर्ष रोमांटिक नायक थे और जिनके लाखों दीवाने थे।
दोनों ने 'दो रास्ते', 'सच्चा झूठा', 'आप की कसम' और 'अपना देश' जैसी फिल्मों में एक साथ काम किया। मुमताज की चंचलता और राजेश खन्ना का आकर्षक अंदाज परस्पर इतने पूरक थे कि दर्शक इस जोड़ी को बार-बार देखने के लिए सिनेमाघरों में उमड़ते थे। इन फिल्मों के गीत भी खूब लोकप्रिय हुए।
व्यक्तिगत रिश्ते पर चर्चाएँ और मुमताज का जवाब
पर्दे पर इस जोड़ी की अपार लोकप्रियता के कारण दोनों के निजी रिश्ते को लेकर भी कई तरह की अटकलें और चर्चाएँ होने लगीं। हालाँकि मुमताज ने कई अवसरों पर स्पष्ट किया कि उनके और राजेश खन्ना के बीच एक गहरी और अच्छी दोस्ती थी — इससे अधिक कुछ नहीं।
फिल्मफेयर पुरस्कार और करियर का शिखर
मुमताज के करियर का सबसे बड़ा सम्मान उन्हें फिल्म 'खिलौना' के लिए मिला, जिसमें उनके अभिनय की व्यापक सराहना हुई और उन्हें प्रतिष्ठित फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार से नवाज़ा गया। यह पुरस्कार उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण था।
शादी और परदे से विदाई
1974 में मुमताज ने व्यवसायी मयूर माधवानी से विवाह किया और परिवार को प्राथमिकता देते हुए फिल्मों से किनारा कर लिया। गौरतलब है कि यह फैसला उन्होंने अपने करियर के सर्वोच्च मुकाम पर लिया, जिसने उद्योग और दर्शकों दोनों को चौंका दिया। उनकी यह विदाई हिंदी सिनेमा के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत था, लेकिन उनकी फिल्में और राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी आज भी पुरानी पीढ़ी के दर्शकों की यादों में ताज़ी है।