अक्षय खन्ना का दमदार कमबैक: 'धुरंधर' से मिली नई पहचान
सारांश
Key Takeaways
- अक्षय खन्ना ने 'धुरंधर' में दमदार प्रदर्शन किया।
- पर्दे से गायब रहने के बाद भी उनकी वापसी सफल रही।
- उनकी फिल्में युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
मुंबई, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिसंबर 2025 में प्रदर्शित आदित्य धर की मेगा-ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' में जब अक्षय खन्ना ने कराची के notorious डॉन का किरदार निभाया, तो 'रहमान डकैत' की भूमिका दर्शकों के बीच काफी सराही गई।
यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि बॉलीवुड के कई प्रमुख सितारों ने इस भूमिका को ठुकरा दिया था, लेकिन अक्षय खन्ना ने इस चुनौती को स्वीकार किया। जब 'धुरंधर' बड़े पर्दे पर आई, तो उनके 'रहमान डकैत' का किरदार सबको रोमांचित कर गया। फिल्म में उनका आकर्षक डांस जेनरेशन Z के लिए एक नए एंथम जैसा बन गया।
वहीं, साल 2025 में आई 'छावा' में उनके 'औरंगजेब' के किरदार ने भी आलोचकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया।
लेकिन 51 साल के इस 'शोस्टॉपर' की कहानी किसी साधारण सुपरस्टार की तरह नहीं है। दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना के पुत्र अक्षय खन्ना ने उस समय बॉलीवुड में कदम रखा, जब सिनेमा की दुनिया में संवादों का शोर और ओवर-द-टॉप एक्टिंग का चलन था। 1997 में उनकी पहली फिल्म 'हिमालय पुत्र' की असफलता के बाद, महज 21 वर्षीय अक्षय ने जे.पी. दत्ता की हिट फिल्म 'बॉर्डर' से अपनी खास पहचान बनाई। फिल्म के अंतिम दृश्यों में 'धर्मवीर भाकरी' का किरदार दर्शकों के दिलों में बसा रहा।
हालांकि, 28 मार्च 1975 को मुंबई में जन्मे अक्षय खन्ना के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साल 2001 में फरहान अख्तर की फिल्म 'दिल चाहता है' के साथ आया। जिस दौर में उनके समकालीन अभिनेता एक्शन वाले रोल में व्यस्त थे, उस समय अक्षय ने 'सिद्धार्थ' के रूप में एक शांत और परिपक्व प्रेमी का किरदार निभाया। 'सिड' का अपनी उम्र से बड़ी तलाकशुदा महिला के प्रति निश्छल प्रेम हिंदी सिनेमा के सबसे संवेदनशील किरदारों में शामिल हो गया।
उनकी आंखों में छिपी उदासी ने हिंदी सिनेमा में एक नए 'संवेदनशील मर्द' की परिभाषा गढ़ी। इस फिल्म में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला।
'हमराज', 'हंगामा', 'रेस' जैसी फिल्मों में अपनी विलेनरी और कॉमेडी का लोहा मानवाने के बाद, और 'गांधी, माई फादर' जैसी फिल्म में ऐतिहासिक अभिनय के बावजूद, एक समय ऐसा आया जब अक्षय खन्ना अचानक गायब हो गए।
2012 से 2016 के बीच, चार साल तक वे बड़े पर्दे से दूर रहे। कास्टिंग डायरेक्टर्स की सूची से जैसे उनका नाम ही हटा दिया गया था।
लेकिन, 'इत्तेफाक', 'मॉम' और 'दृश्यम 2' में तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी के रूप में उन्होंने अपनी जबरदस्त वापसी की। इसी ताकत ने उन्हें अपनी दूसरी पारी में 2025 के उस शिखर तक पहुँचाया, जहाँ तक पहुँचना आसान नहीं था।