30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल हाई कोर्ट का सरकार को कड़ा संदेश: दिलीप मीडिया ट्रायल जांच में देरी पर जस्टिस सेबेस्टियन की सख्त चेतावनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल हाई कोर्ट का सरकार को कड़ा संदेश: दिलीप मीडिया ट्रायल जांच में देरी पर जस्टिस सेबेस्टियन की सख्त चेतावनी

सारांश

केरल हाई कोर्ट ने दिलीप के मीडिया ट्रायल मामले की जांच में बार-बार देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने अवमानना कार्यवाही की चेतावनी दोहराई। अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई को राज्य सरकार को दिलीप मीडिया ट्रायल जांच में देरी पर कड़ी फटकार लगाई।
जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने चेतावनी दी कि मामले को 'बहुत गंभीरता से लिया जाएगा'; अवमानना कार्यवाही की संभावना बरकरार।
हाई कोर्ट ने 20 फरवरी को दो महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया था, जो पूरा नहीं हुआ।
अभिनेता दिलीप को एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने पिछले वर्ष 2017 के अभिनेत्री हमले मामले में बरी किया था; राज्य ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी है।
डिवीजन बेंच ने पल्सर सुनी , वदिवल सलीम और प्रदीप की सजा निलंबित करने की अर्जी खारिज की।
अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित।

केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई, क्योंकि सरकार 2017 के अभिनेत्री हमले मामले से जुड़े कथित मीडिया ट्रायल की जांच तय समयसीमा में पूरी करने में बार-बार नाकाम रही है। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला अभिनेता दिलीप की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि 2017 के अभिनेत्री हमले मामले की ट्रायल कार्यवाही की गोपनीय जानकारी गैर-कानूनी तरीके से लीक की गई और व्यापक स्तर पर प्रचारित की गई, जिससे उनके विरुद्ध लगातार मीडिया ट्रायल चलता रहा। इस शिकायत के आधार पर आपराधिक मामले दर्ज हुए थे।

20 फरवरी को हाई कोर्ट ने राज्य को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था। समयसीमा बीत जाने के बाद पिछले महीने कोर्ट ने मौखिक रूप से चेतावनी दी थी कि पालन न करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

गुरुवार की सुनवाई में जब पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने जांच एजेंसी से निर्देश लेने के लिए और समय माँगा, तो जस्टिस सेबेस्टियन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'आप इस कोर्ट के निर्देशों का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं? मामले को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। यह ठीक नहीं है।' अब मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।

दिलीप मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि दिलीप को 2017 के अभिनेत्री हमले मामले में आठवें आरोपी के रूप में नामजद किया गया था और उन पर हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप था। एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने पिछले वर्ष उन्हें बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस बरी किए जाने को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी है, जो दोषी आरोपियों की सजा के विरुद्ध अपीलों पर भी सुनवाई कर रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब उसी डिवीजन बेंच ने इस महीने की शुरुआत में मुख्य आरोपी पल्सर सुनी और सह-दोषियों वदिवल सलीम तथा प्रदीप की सजा निलंबित करने की अर्जी खारिज कर दी थी।

न्यायिक दबाव और आगे की राह

हाई कोर्ट की यह नवीनतम चेतावनी न्यायालय-निर्देशित जांच की समयसीमा का पालन न होने पर बढ़ती न्यायिक अधीरता का स्पष्ट संकेत है। डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड भी पहले ही मंगवा लिए हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में राज्य को ठोस प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी, अन्यथा अवमानना कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर मौखिक चेतावनी को नजरअंदाज करना और अब फिर समय माँगना — यह क्रम जांच की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाता है। जब एक ओर डिवीजन बेंच बरी किए जाने को चुनौती दे रही है और दूसरी ओर एकल पीठ मीडिया ट्रायल की जांच में ढिलाई पर नाराज है, तो राज्य दोनों मोर्चों पर दबाव में है। 5 अगस्त की सुनवाई तय करेगी कि क्या यह चेतावनी केवल शब्दों तक सीमित रहेगी या अवमानना की ठोस कार्यवाही में बदलेगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने दिलीप मामले में राज्य सरकार को क्यों फटकार लगाई?
राज्य सरकार 20 फरवरी को दिए गए उस आदेश का पालन करने में नाकाम रही, जिसमें दो महीने के भीतर दिलीप के कथित मीडिया ट्रायल से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच पूरी करने का निर्देश था। बार-बार मौके और मौखिक चेतावनी के बावजूद जांच अधूरी रहने पर जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई।
दिलीप मीडिया ट्रायल मामला क्या है?
अभिनेता दिलीप ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 2017 के अभिनेत्री हमले मामले की ट्रायल कार्यवाही की गोपनीय जानकारी गैर-कानूनी तरीके से लीक की गई और व्यापक स्तर पर मीडिया में प्रचारित की गई, जिससे उनके विरुद्ध लगातार मीडिया ट्रायल हुआ। इस शिकायत पर आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनकी जांच की निगरानी हाई कोर्ट कर रहा है।
2017 के अभिनेत्री हमले मामले में दिलीप की कानूनी स्थिति क्या है?
एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने दिलीप को पिछले वर्ष बरी कर दिया था, जबकि उन पर हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप था। राज्य सरकार ने इस फैसले को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी है।
पल्सर सुनी और अन्य दोषियों की सजा निलंबन याचिका का क्या हुआ?
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस महीने की शुरुआत में मुख्य आरोपी पल्सर सुनी और सह-दोषियों वदिवल सलीम तथा प्रदीप की सजा निलंबित करने की अर्जी खारिज कर दी। डिवीजन बेंच ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी और क्या हो सकता है?
मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित है। यदि राज्य सरकार तब भी ठोस प्रगति नहीं दिखा पाई, तो कोर्ट पालन न करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही शुरू कर सकता है, जैसी चेतावनी पहले भी दी जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले