अभिमन्यु हत्याकांड: केरल हाई कोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए दिए अंतिम चार महीने
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार, 4 अगस्त को एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट को एसएफआई कार्यकर्ता अभिमन्यु की 2018 की हत्या के मामले में मुकदमा पूरा करने के लिए चार महीने की अंतिम समय-सीमा दी है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसके बाद किसी भी परिस्थिति में और समय नहीं दिया जाएगा।
अदालत का आदेश और पृष्ठभूमि
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ की पीठ ने यह आदेश दो याचिकाओं की सुनवाई के बाद पारित किया। पहली याचिका प्रिंसिपल सेशंस जज की थी, जिसमें ट्रायल पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की माँग की गई थी। दूसरी याचिका अभिमन्यु की माँ ने दायर की थी, जिसमें सात वर्षों से अधिक समय से लंबित इस मामले के शीघ्र निपटारे की गुहार लगाई गई थी।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने इसी वर्ष 24 जनवरी को सेशंस कोर्ट को नौ महीने के भीतर ट्रायल समाप्त करने का निर्देश दिया था। वह निर्देश अभिमन्यु की माँ द्वारा 2024 में दायर उस याचिका पर आया था, जिसमें बताया गया था कि चार्जशीट दाखिल होने के वर्षों बाद भी सुनवाई प्रारंभ नहीं हुई थी।
घटना का विवरण
एर्नाकुलम के महाराजा कॉलेज के 21 वर्षीय छात्र अभिमन्यु की 1 जुलाई 2018 को कॉलेज परिसर में हुई झड़प के दौरान चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस हमले में एसएफआई के चार अन्य कार्यकर्ता भी घायल हुए थे।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हमलावर कथित तौर पर अब प्रतिबंधित संगठन 'कैंपस फ्रंट' से जुड़े थे और उन्होंने कैंपस में पोस्टर लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद छात्रों पर हमला किया था।
कानूनी कार्यवाही की स्थिति
एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद मामला प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट को सौंपा गया। पुलिस ने आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा और गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं।
यह मामला सात वर्षों से अधिक समय से ट्रायल कोर्ट में लंबित है, जिसके चलते हाई कोर्ट को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक विलंब को लेकर देशभर में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
हाई कोर्ट का संदेश
मंगलवार के आदेश के साथ केरल हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि इस मामले में और देरी स्वीकार्य नहीं होगी। केरल के सबसे चर्चित कैंपस हत्याकांड मुकदमों में से एक के लिए अदालत ने व्यावहारिक रूप से अंतिम समय-सीमा तय कर दी है।
अब सभी की निगाहें एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा कर पाती है या नहीं।