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अभिमन्यु हत्याकांड: केरल हाई कोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए दिए अंतिम चार महीने

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अभिमन्यु हत्याकांड: केरल हाई कोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए दिए अंतिम चार महीने

सारांश

सात साल से लंबित अभिमन्यु हत्याकांड में केरल हाई कोर्ट ने अब अंतिम रेखा खींच दी है — एर्नाकुलम सेशंस कोर्ट को चार महीने में ट्रायल पूरा करना होगा, वरना यह न्यायिक विफलता का प्रतीक बन जाएगा। एक माँ की सात साल की लड़ाई अब फैसले की दहलीज़ पर है।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 4 अगस्त को एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट को अभिमन्यु हत्याकांड ट्रायल के लिए चार महीने की अंतिम समय-सीमा दी।
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ की पीठ ने स्पष्ट किया कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा।
21 वर्षीय अभिमन्यु की 1 जुलाई 2018 को महाराजा कॉलेज, एर्नाकुलम के परिसर में चाकू मारकर हत्या की गई थी।
एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी; मामला सात वर्षों से अधिक समय से लंबित है।
हाई कोर्ट ने इससे पहले 24 जनवरी 2025 को नौ महीने की समय-सीमा दी थी, जो पूरी नहीं हो सकी।
आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा और गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने के आरोप हैं।

केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार, 4 अगस्त को एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट को एसएफआई कार्यकर्ता अभिमन्यु की 2018 की हत्या के मामले में मुकदमा पूरा करने के लिए चार महीने की अंतिम समय-सीमा दी है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसके बाद किसी भी परिस्थिति में और समय नहीं दिया जाएगा।

अदालत का आदेश और पृष्ठभूमि

जस्टिस कौसर एडप्पागाथ की पीठ ने यह आदेश दो याचिकाओं की सुनवाई के बाद पारित किया। पहली याचिका प्रिंसिपल सेशंस जज की थी, जिसमें ट्रायल पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की माँग की गई थी। दूसरी याचिका अभिमन्यु की माँ ने दायर की थी, जिसमें सात वर्षों से अधिक समय से लंबित इस मामले के शीघ्र निपटारे की गुहार लगाई गई थी।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने इसी वर्ष 24 जनवरी को सेशंस कोर्ट को नौ महीने के भीतर ट्रायल समाप्त करने का निर्देश दिया था। वह निर्देश अभिमन्यु की माँ द्वारा 2024 में दायर उस याचिका पर आया था, जिसमें बताया गया था कि चार्जशीट दाखिल होने के वर्षों बाद भी सुनवाई प्रारंभ नहीं हुई थी।

घटना का विवरण

एर्नाकुलम के महाराजा कॉलेज के 21 वर्षीय छात्र अभिमन्यु की 1 जुलाई 2018 को कॉलेज परिसर में हुई झड़प के दौरान चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस हमले में एसएफआई के चार अन्य कार्यकर्ता भी घायल हुए थे।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हमलावर कथित तौर पर अब प्रतिबंधित संगठन 'कैंपस फ्रंट' से जुड़े थे और उन्होंने कैंपस में पोस्टर लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद छात्रों पर हमला किया था।

कानूनी कार्यवाही की स्थिति

एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद मामला प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट को सौंपा गया। पुलिस ने आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा और गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं।

यह मामला सात वर्षों से अधिक समय से ट्रायल कोर्ट में लंबित है, जिसके चलते हाई कोर्ट को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक विलंब को लेकर देशभर में चिंताएँ बढ़ रही हैं।

हाई कोर्ट का संदेश

मंगलवार के आदेश के साथ केरल हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि इस मामले में और देरी स्वीकार्य नहीं होगी। केरल के सबसे चर्चित कैंपस हत्याकांड मुकदमों में से एक के लिए अदालत ने व्यावहारिक रूप से अंतिम समय-सीमा तय कर दी है।

अब सभी की निगाहें एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा कर पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निचली अदालतों में संसाधन और क्षमता की कमी को संबोधित किए बिना ऐसे आदेश कितने प्रभावी होंगे। अभिमन्यु की माँ की याचिका इस व्यवस्था की विफलता का मानवीय चेहरा है — और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिमन्यु हत्याकांड क्या है?
अभिमन्यु एर्नाकुलम के महाराजा कॉलेज के 21 वर्षीय एसएफआई कार्यकर्ता थे, जिनकी 1 जुलाई 2018 को कॉलेज परिसर में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन 'कैंपस फ्रंट' से जुड़े थे और पोस्टर विवाद के बाद उन्होंने हमला किया था।
केरल हाई कोर्ट ने चार महीने की समय-सीमा क्यों दी?
ट्रायल कोर्ट ने हाई कोर्ट को सूचित किया कि पहले दी गई नौ महीने की समय-सीमा में कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद जस्टिस कौसर एडप्पागाथ की पीठ ने चार महीने की अंतिम मोहलत देते हुए स्पष्ट किया कि इसके बाद कोई और विस्तार नहीं मिलेगा।
यह मामला इतने साल से लंबित क्यों है?
एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन ट्रायल सात वर्षों से अधिक समय से लंबित है। अभिमन्यु की माँ ने 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि चार्जशीट के वर्षों बाद भी सुनवाई शुरू नहीं हुई थी।
आरोपियों पर क्या आरोप हैं?
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा और गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने जैसे संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन 'कैंपस फ्रंट' से जुड़े बताए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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