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सबरीमाला सोना गबन मामला: केरल हाईकोर्ट का SIT को 30 दिन में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

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सबरीमाला सोना गबन मामला: केरल हाईकोर्ट का SIT को 30 दिन में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

सारांश

सात साल पुराना सबरीमाला सोना गबन मामला अब अंतिम मोड़ पर है। केरल हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद SIT ने 30 दिनों में एक मामले में अंतिम रिपोर्ट देने का वादा किया है। पूर्व देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष और सबरीमाला तंत्री समेत कई आरोपी पहले ही जमानत पर हैं।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने SIT को सबरीमाला सोना गबन मामले की जांच बिना देरी के पूरी करने का निर्देश दिया।
SIT ने दो में से एक मामले में 30 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का आश्वासन दिया।
2025 में दर्ज मामले में अब तक 54 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
मामले में पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष पी.
प्रशांत और सबरीमाला तंत्री आरोपी हैं; सभी आरोपी वैधानिक जमानत पर हैं।
कथित साजिश 2019 में रची गई थी — पैनलों पर कम सोने के उपयोग को छिपाने के लिए।
अगली सुनवाई 3 सितंबर को निर्धारित।

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला सोना गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को बिना किसी और विलंब के जांच पूरी करने का सख्त निर्देश दिया है। 20 जुलाई को हुई सुनवाई में SIT ने अदालत को आश्वस्त किया कि वह दो में से एक मामले में 30 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर देगी। कथित अनियमितताएं सामने आने के करीब सात साल बाद यह जांच अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

मुख्य घटनाक्रम

SIT ने अदालत को बताया कि वह दो अलग-अलग आपराधिक मामलों की जांच कर रही है — एक में 30 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जाएगी, जबकि दूसरे मामले की जांच अभी जारी है। 2025 में दर्ज उस मामले में, जिसमें सोने की परत चढ़े द्वारपालक पैनलों को ले जाने के प्रयास का आरोप है, अब तक 54 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

SIT ने यह भी बताया कि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिली है और इससे कथित अपराध को अंजाम देने के तरीके को समझने में सहायता मिली है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को निर्धारित की है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक (रक्षक देवता) पैनलों पर सोने की परत चढ़ाने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। SIT की जांच के अनुसार, आरोपियों ने 2019 में कथित तौर पर एक आपराधिक साजिश रची, जिसका उद्देश्य पैनलों पर सोने की परत चढ़ाने के दौरान आधिकारिक रूप से घोषित मात्रा से कम सोने के उपयोग को छिपाना था।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि पैनलों को हटाकर चेन्नई ले जाने की प्रक्रिया त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के नियमों का उल्लंघन थी। SIT ने इसे कई वर्षों तक चलने वाली एक योजनाबद्ध प्रक्रिया बताया है, जिसमें प्रायोजक और बोर्ड के कुछ अधिकारी कथित तौर पर शामिल थे।

आरोपी और जमानत की स्थिति

SIT ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी अंतरिम रिपोर्ट में पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष पी. एस. प्रशांत, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड और सबरीमाला तंत्री (मुख्य पुजारी) को आरोपी बताया है। मामले में सभी आरोपियों को तय समय सीमा के बाद वैधानिक जमानत मिल गई थी, क्योंकि SIT उस अवधि में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रही थी। इसके अलावा, एक आरोपी की बीमारी के कारण मृत्यु भी हो चुकी है।

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

यह मामला इसलिए अधिक संवेदनशील है क्योंकि यह केरल के सबसे प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में से एक सबरीमाला से जुड़ा है। इस प्रकरण ने मंदिर की संपत्ति और लाखों श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए मूल्यवान चढ़ावे के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर प्रतिवर्ष करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है, और इस घोटाले ने धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।

क्या होगा आगे

SIT द्वारा 30 दिनों के भीतर पहली अंतिम रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद अदालत आगे की कानूनी कार्रवाई और आरोपियों के विरुद्ध मुकदमे की दिशा तय करेगी। दूसरे मामले में जांच की प्रगति पर 3 सितंबर की सुनवाई में अपडेट अपेक्षित है। अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया को निर्णायक मोड़ दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ न्याय की समयसीमा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। SIT का वैज्ञानिक जांच पर निर्भर रहना और 54 गवाहों के बयान दर्ज करना दर्शाता है कि मामला जटिल है, लेकिन अदालत की सख्ती के बिना यह प्रक्रिया और लंबी खिंच सकती थी। असली परीक्षा अब अंतिम रिपोर्ट के बाद होगी — क्या अभियोजन उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेगा जितनी मजबूती से जांच हुई है?
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला सोना गबन मामला क्या है?
यह मामला सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक पैनलों पर सोने की परत चढ़ाने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि 2019 में एक आपराधिक साजिश के तहत आधिकारिक रूप से घोषित मात्रा से कम सोने का उपयोग किया गया और पैनलों को अनियमित तरीके से चेन्नई ले जाया गया।
SIT अंतिम रिपोर्ट कब दाखिल करेगी?
SIT ने केरल हाईकोर्ट को बताया कि वह दो में से एक मामले में 30 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर देगी। दूसरे मामले की जांच अभी जारी है और उस पर 3 सितंबर की सुनवाई में अपडेट अपेक्षित है।
इस मामले में कौन-कौन आरोपी हैं?
SIT की अंतरिम रिपोर्ट में पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष पी. एस. प्रशांत, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड और सबरीमाला तंत्री (मुख्य पुजारी) को आरोपी बताया गया है। सभी आरोपियों को वैधानिक जमानत मिल चुकी है और एक आरोपी की बीमारी के कारण मृत्यु हो चुकी है।
आरोपियों को जमानत कैसे मिली?
चूंकि SIT तय समय सीमा के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई, इसलिए मामले के सभी आरोपियों को कानूनी प्रावधानों के तहत वैधानिक जमानत मिल गई। यह जांच में देरी का सीधा परिणाम था।
वैज्ञानिक जांच से इस मामले में क्या मदद मिली?
SIT के अनुसार, वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट से कथित अपराध को अंजाम देने के तरीके को समझने में सहायता मिली है और जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि हुई है। इससे जांच को आगे बढ़ाने की दिशा स्पष्ट हुई।
राष्ट्र प्रेस
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