सबरीमाला सोना चोरी मामला: केरल हाई कोर्ट ने एसआईटी को दो हफ्ते का अतिरिक्त समय, 8 जून को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने 18 मई 2026 को सबरीमाला मंदिर के सोने में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को जांच पूरी करने के लिए दो हफ्ते का अतिरिक्त समय प्रदान किया। अदालत ने स्वीकार किया कि मामले में कई महत्वपूर्ण जांच अभी लंबित हैं और वैज्ञानिक रिपोर्टों का इंतजार जारी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और समय का महत्व
यह आदेश ऐसे संवेदनशील समय में आया है, जब कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने कुछ घंटे पहले ही केरल में सत्ता की बागडोर संभाली थी। गौरतलब है कि हाल के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सबरीमाला सोना घोटाले को विपक्ष ने एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में उठाया था। यह पहली बार नहीं है कि किसी धार्मिक संस्था से जुड़े वित्तीय विवाद ने केरल की राजनीति को गर्म किया हो।
खंडपीठ का आदेश और एसआईटी की रिपोर्ट
जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और जस्टिस के.वी. जयकुमार की खंडपीठ के समक्ष एसआईटी के जांच अधिकारी एस. ससीधरन ने विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। एसआईटी ने स्पष्ट किया कि जांच में देरी की मुख्य वजह जमशेदपुर स्थित नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (सीएसआईआर-एनएमएल) की प्रतीक्षित रिपोर्ट है, जहाँ जांच के लिए करीब 36 नमूने भेजे गए हैं।
वैज्ञानिक परीक्षण और फोरेंसिक प्रक्रिया
लैब में सोने की परत और धातु संरचना की जांच के लिए कई अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है — इनमें एक्स-रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी, इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री और ऑप्टिकल एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी शामिल हैं। एसआईटी के अनुसार, लैब की अंतिम रिपोर्ट अगले 10 दिनों में प्राप्त होने की संभावना है।
जांच एजेंसी का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोने की प्लेटिंग कितनी मात्रा में हुई, कितना सोना वास्तव में उपयोग किया गया और क्या तांबे की प्लेटों की अदला-बदली की गई थी। अब तक 391 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
जांच की व्यापकता
एसआईटी ने सफाई, बफिंग, गोल्ड प्लेटिंग, लेकर कोटिंग और पैकिंग की संपूर्ण प्रक्रिया का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया है। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है। इसके अलावा जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच भी समानांतर रूप से जारी है।
अदालत की टिप्पणी और आगे की राह
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्टें इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और सटीक निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नए मामले दर्ज किए जा सकते हैं और नए आरोपियों की पहचान भी संभव है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित की गई है।