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क्या केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला विवाद की विस्तृत जांच का आदेश दिया?

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क्या केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला विवाद की विस्तृत जांच का आदेश दिया?

सारांश

केरल हाईकोर्ट का सबरीमाला विवाद पर आदेश, जांच की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम। क्या इस विवाद के पीछे की सच्चाई उजागर होगी? जानें कैसे कोर्ट ने पारदर्शिता और गंभीरता पर जोर दिया है।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला विवाद की जांच का आदेश दिया।
जांच का नेतृत्व एक सेवानिवृत्त जिला जज करेंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
सोने की थाली के वजन और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।

कोच्चि, 29 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सबरीमाला मंदिर में द्वारपाल की मूर्ति पर सोने की परत चढ़ाने के विवाद की विस्तृत जांच करने के लिए आदेश दिए। कोर्ट ने इस मामले में पूरी जांच और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।

कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के मुख्य सतर्कता अधिकारी को इस जांच के लिए निर्देशित किया है और कहा है कि इसका नेतृत्व एक सेवानिवृत्त जिला जज करेंगे।

इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि आंतरिक मंदिर से संबंधित सभी मामलों की पूरी जांच करना आवश्यक है, जिसमें कीमती वस्तुओं की सुरक्षा और उनका रिकॉर्ड रखना भी शामिल है।

मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने कहा कि सोने की प्लेट पर सोने की परत और उसके वजन में बताई गई गड़बड़ी को लेकर कई संदेह उत्पन्न हुए हैं।

विशेष रूप से इसमें उल्लेख किया गया कि सोने से ढकी थाली का वजन कथित तौर पर 2019 में वापस आने पर लगभग चार किलोग्राम कम हो गया था, जिससे मंदिर में रिकॉर्ड की सटीकता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच गोपनीय तरीके से की जाए और किसी भी बाहरी व्यक्ति को इसकी कोई जानकारी न दी जाए।

कोर्ट ने कहा कि स्ट्रांग रूम में रखे सामान की जांच की जाए, तिरुभवाराणम रजिस्टर की पड़ताल की जाए और देवस्वोम अधिकारियों की किसी भी चूक को रिपोर्ट में शामिल किया जाए।

इससे पहले, कोर्ट ने मंदिर समिति की इस बात के लिए आलोचना की थी कि सोने की थाली वापस आने पर उसने उचित रिकॉर्ड नहीं रखा और न ही थाली का वजन आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज किया गया।

कोर्ट ने कहा कि पवित्र संपत्ति के प्रबंधन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी वाली मंदिर समिति के लिए यह चूक स्वीकार्य नहीं है। यह मामला 15 अक्टूबर को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जब कोर्ट चल रही जांच की प्रगति और रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

हाई कोर्ट के निर्देशों से केरल के सबसे चर्चित मंदिर विवादों में से एक को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सबरीमाला की सोने की थाली से संबंधित सभी मामलों की जांच गंभीरता और पारदर्शिता के साथ की जाए, जैसा कि इस मामले की मांग है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसमें प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का भी बड़ा मुद्दा है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक स्थलों का प्रबंधन सही तरीके से हो, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला विवाद क्या है?
यह विवाद सबरीमाला मंदिर में द्वारपाल की मूर्ति पर सोने की परत चढ़ाने से संबंधित है, जिसके संबंध में गंभीर संदेह उत्पन्न हुए हैं।
केरल हाईकोर्ट ने किसकी जांच का आदेश दिया?
केरल हाईकोर्ट ने इस विवाद की विस्तृत जांच का आदेश दिया है, जिसमें सोने की थाली के वजन और उसके रिकॉर्ड की जांच शामिल है।
जांच का नेतृत्व कौन करेगा?
जांच का नेतृत्व एक सेवानिवृत्त जिला जज करेंगे।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट ने पारदर्शिता पर क्यों जोर दिया?
कोर्ट ने पवित्र संपत्ति के प्रबंधन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक माना।
राष्ट्र प्रेस
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