20 अगस्त 2026
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थूथुकुडी गोलीबारी: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से माँगा आयोग सिफारिशों पर एक सप्ताह में जवाब

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थूथुकुडी गोलीबारी: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से माँगा आयोग सिफारिशों पर एक सप्ताह में जवाब

सारांश

थूथुकुडी गोलीबारी के आठ साल बाद भी न्याय अधूरा है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार से अरुणा जगदीसन आयोग की सिफारिशों पर एक सप्ताह में जवाब माँगा है — जबकि सरकार ने माना कि सिफारिशें केवल आंशिक रूप से स्वीकार हुई हैं और विभागीय कार्रवाई अभी विचाराधीन है।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार को एक सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अरुणा जगदीसन आयोग की सिफारिशें तमिलनाडु सरकार ने केवल आंशिक रूप से स्वीकार की हैं; शेष विचाराधीन हैं।
पीठ ने पूछा कि गोलीबारी पीड़ितों को केवल ₹30 लाख मुआवजा दिया गया है या नहीं।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि वे इस मामले में आठ साल से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 20 अगस्त को तमिलनाडु सरकार को थूथुकुडी गोलीबारी मामले में न्यायमूर्ति अरुणा जगदीसन आयोग की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा एक सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

मदुरै के बीबी कुलम क्षेत्र के निवासी कथिरेशन और अन्य याचिकाकर्ताओं ने मदुरै बेंच के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि स्टरलाइट कॉपर को स्थायी रूप से बंद करने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों पर सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने गोली चलाई और मानक पुलिस प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ताओं ने गोलीबारी के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश देने की माँग की।

अदालत के तीखे सवाल

यह याचिका न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। पीठ ने सरकार से सीधे पूछा कि क्या न्यायमूर्ति अरुणा जगदीसन आयोग की रिपोर्ट को राज्य सरकार ने स्वीकार किया है। न्यायाधीशों ने यह भी जानना चाहा कि गोलीबारी में मारे गए और प्रभावित लोगों को केवल ₹30 लाख का मुआवजा दिया गया है या नहीं।

पीठ ने सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति, कौन-सी कार्रवाइयाँ रोकी गई हैं और कौन-सी जारी हैं — इन सभी पहलुओं पर स्पष्टीकरण माँगा।

सरकार का पक्ष

तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि आयोग की सिफारिशों को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है और इस पर कैबिनेट में चर्चा हो चुकी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सहित शेष सिफारिशें अभी विचाराधीन हैं। सरकार ने पीड़ितों को दिए गए मुआवजे, सरकारी रोजगार के विवरण और विभागीय कार्रवाई की स्थिति समेत सभी पहलुओं पर हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय माँगा, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।

आठ साल का इंतजार

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीठ को याद दिलाया कि वे इस मामले में आठ साल से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस पर न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि धैर्य सागर से भी बड़ा होता है। यह टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि अदालत मामले की धीमी गति से अवगत है और अब त्वरित जवाबदेही की अपेक्षा रख रही है।

आगे क्या होगा

मदुरै पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त के लिए निर्धारित की है। तब तक तमिलनाडु सरकार को आयोग की सिफारिशों पर की गई समस्त कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे और सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कदमों का पूरा ब्यौरा शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करना होगा। यह सुनवाई थूथुकुडी गोलीबारी के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सरकार की ओर से आयोग की सिफारिशें केवल 'आंशिक रूप से स्वीकृत' हैं — यह जवाबदेही की नहीं, टालमटोल की भाषा है। सादे कपड़ों में गोली चलाने के आरोप और मानक प्रक्रियाओं के उल्लंघन की बात स्रोत में स्पष्ट है, फिर भी आपराधिक मामला दर्ज न होना न्यायिक प्रक्रिया की सीमाओं को उजागर करता है। ₹30 लाख मुआवजे पर अदालत का सीधा सवाल यह दर्शाता है कि पीड़ितों की क्षतिपूर्ति भी अधूरी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सुनवाई की तारीखों पर टिकी रहती है — असली सवाल यह है कि विभागीय कार्रवाई किन अधिकारियों के विरुद्ध रुकी हुई है और क्यों।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थूथुकुडी गोलीबारी मामला क्या है?
थूथुकुडी गोलीबारी उस घटना को कहते हैं जिसमें स्टरलाइट कॉपर संयंत्र को स्थायी रूप से बंद करने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने मानक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना फायरिंग की।
न्यायमूर्ति अरुणा जगदीसन आयोग की सिफारिशों पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि आयोग की सिफारिशें आंशिक रूप से स्वीकार की गई हैं और कैबिनेट में इस पर चर्चा हो चुकी है। संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सहित शेष सिफारिशें अभी विचाराधीन हैं।
मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को क्या निर्देश दिया है?
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में आयोग सिफारिशों पर की गई कार्रवाई, पीड़ितों को दिया गया मुआवजा, सरकारी रोजगार का विवरण और विभागीय कार्रवाई की स्थिति शामिल होनी चाहिए।
थूथुकुडी गोलीबारी मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त के लिए निर्धारित की है। तब तक तमिलनाडु सरकार को अदालत में हलफनामा दाखिल करना होगा।
थूथुकुडी पीड़ितों को कितना मुआवजा दिया गया है?
अदालत ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या गोलीबारी में मारे गए और प्रभावित लोगों को केवल ₹30 लाख का मुआवजा दिया गया है। सरकार से इस पर भी हलफनामे में स्पष्टीकरण माँगा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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