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मद्रास हाई कोर्ट का तमिलनाडु-पुडुचेरी को नोटिस, आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट आदेश पालन की रिपोर्ट तलब

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मद्रास हाई कोर्ट का तमिलनाडु-पुडुचेरी को नोटिस, आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट आदेश पालन की रिपोर्ट तलब

सारांश

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी को आवारा कुत्तों पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश-पालन का हिसाब देने को कहा है। स्कूलों-अस्पतालों को प्राथमिकता, हर ज़िले में ABC सेंटर अनिवार्य — और पालन न होने पर अवमानना की चेतावनी। अगली सुनवाई 21 जुलाई।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट ने 22 जून 2026 को तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकारों से आवारा कुत्तों पर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट माँगी।
धर्माधिकारी और जस्टिस जी.
अरुल मुरुगन की बेंच ने सुओ मोटो मामले में सुनवाई की।
यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के 19 मई 2026 के आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए उठाया गया।
हर ज़िले में कम से कम एक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर अनिवार्य किया गया है।
आदेश न मानने वाले अधिकारियों पर अदालती अवमानना की कार्रवाई संभव।
अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित।

मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार, 22 जून 2026 को तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकारों से आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। कोर्ट ने दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई से पहले कार्रवाई का ब्यौरा दाखिल करने का आदेश दिया।

मुख्य घटनाक्रम

चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने यह आदेश एक सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) मामले की सुनवाई के दौरान दिया। बेंच ने निर्देश दिया कि सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी रिकॉर्ड पर रखी जाए। विशेष रूप से स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर तत्काल ध्यान देने पर ज़ोर दिया गया।

मुख्य सचिवों सहित पशुपालन, स्वास्थ्य, नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभागों के सचिवों को नोटिस जारी किए गए हैं। अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि

यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के 19 मई 2026 के उस आदेश के अनुपालन में उठाया गया है, जिसमें देशभर के सभी हाई कोर्ट्स को सुओ मोटो रिट याचिकाएँ दर्ज कर आवारा कुत्तों के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी थी कि आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अदालती अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए बुनियादी ढाँचा मज़बूत करने का भी आदेश दिया था।

अनिवार्य बुनियादी ढाँचे की शर्तें

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, हर ज़िले में कम से कम एक पूरी तरह से कार्यरत एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।

आम जनता पर असर

आवारा कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाएँ — विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों पर — इस मामले की तात्कालिकता को रेखांकित करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में आवारा पशुओं से जुड़ी दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। अस्पतालों और स्कूलों के आसपास से कुत्तों को हटाने की प्राथमिकता सीधे तौर पर लाखों नागरिकों की दैनिक सुरक्षा से जुड़ी है।

क्या होगा आगे

दोनों राज्यों के विभागों को 21 जुलाई 2026 की सुनवाई से पहले अपनी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई, तो अदालत सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अवमानना कार्रवाई का रास्ता खुला रख सकती है। मद्रास हाई कोर्ट की यह सक्रियता अन्य राज्यों के हाई कोर्ट्स के लिए भी एक संकेत है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी स्वीकार्य नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या राज्य सरकारें महज़ रिपोर्ट दाखिल करने तक सीमित रहेंगी या ज़मीन पर ABC सेंटर और टीकाकरण अभियान वास्तव में चलाएँगी। देशभर में कुत्तों के हमलों की घटनाएँ बताती हैं कि यह केवल तमिलनाडु और पुडुचेरी की समस्या नहीं — यह राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है जिसे न्यायपालिका को बार-बार याद दिलाना पड़ रहा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर रिपोर्ट क्यों माँगी?
मद्रास हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के 19 मई 2026 के उस आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए यह रिपोर्ट माँगी है, जिसमें सभी हाई कोर्ट्स को सुओ मोटो मामले दर्ज कर आवारा कुत्तों के प्रबंधन की जाँच करने को कहा गया था। कोर्ट जानना चाहती है कि तमिलनाडु और पुडुचेरी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर क्या आदेश दिए थे?
सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने, हर ज़िले में कम से कम एक ABC सेंटर स्थापित करने और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध रखने का निर्देश दिया था। आदेश न मानने पर अवमानना की चेतावनी भी दी गई थी।
एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर क्या होता है?
ABC सेंटर वह सरकारी सुविधा है जहाँ आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया जाता है, ताकि उनकी संख्या नियंत्रित हो और रेबीज का प्रसार रोका जा सके। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रत्येक ज़िले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यरत ABC सेंटर होना अनिवार्य किया है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। तब तक तमिलनाडु और पुडुचेरी के संबंधित विभागों को अपनी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
किन स्थानों को प्राथमिकता देने का आदेश दिया गया है?
कोर्ट ने स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर आवारा कुत्तों से मुक्त करने पर ज़ोर दिया है। ये स्थान बड़ी संख्या में बच्चों और आम नागरिकों के आवागमन के केंद्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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