सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बरकरार रखा, डॉग लवर्स की याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई 2025 को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड सहित सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इस निर्देश में बदलाव की माँग की गई थी। पशु अधिकार समर्थकों की ओर से दायर इस याचिका को शीर्ष अदालत ने जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा के आधार पर अस्वीकार किया।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत ने 22 अगस्त और 7 नवंबर 2025 को जारी अपने निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि इन आदेशों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू न किए जाने के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का आदेश अत्यधिक कठोर है और इससे पशुओं के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने ABC कार्यक्रम को अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इन दलीलों को नकारते हुए नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
आँकड़ों की भयावह तस्वीर
अदालत ने देशभर से सामने आए आँकड़ों का उल्लेख करते हुए चिंता व्यक्त की। राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में मात्र एक महीने में कुत्तों के काटने के 1,084 मामले दर्ज किए गए, जिनमें कई छोटे बच्चों के चेहरे पर गंभीर चोटें शामिल हैं। तमिलनाडु में वर्ष के पहले चार महीनों में करीब दो लाख कुत्ते के काटने के मामले सामने आए।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) सहित देश के व्यस्त हवाई अड्डों पर भी ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। सूरत में एक जर्मन यात्री को भी आवारा कुत्ते ने काट लिया। अदालत ने कहा कि ये घटनाएँ शहरी प्रशासन और गवर्नेंस पर जनता के विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
सरकार और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि यदि पूर्व निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई, अनुशासनात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि न्यायालय इस मामले में किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि देशभर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाले हमलों ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या खड़ी कर दी है। बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएँ कई राज्यों से लगातार सामने आ रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब रेबीज़ नियंत्रण को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं।
क्या होगा आगे
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद राज्य सरकारों पर ABC कार्यक्रम को सख्ती से लागू करने और सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने का दबाव और बढ़ गया है। अवमानना की चेतावनी के मद्देनज़र प्रशासनिक तंत्र को अब ठोस और सत्यापन-योग्य कदम उठाने होंगे।