सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बरकरार रखा, डॉग लवर्स की याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बरकरार रखा, डॉग लवर्स की याचिका खारिज

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से हटाने का आदेश बरकरार रखा और बदलाव की माँग वाली याचिका खारिज कर दी। श्रीगंगानगर में एक माह में 1,084 और तमिलनाडु में चार महीनों में दो लाख मामलों का हवाला देते हुए अदालत ने राज्यों को अवमानना की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई 2025 को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का पूर्व आदेश बरकरार रखा।
पशु अधिकार समर्थकों की याचिका को अदालत ने जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा के आधार पर खारिज किया।
राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1,084 और तमिलनाडु में चार महीनों में करीब दो लाख कुत्ते के काटने के मामले दर्ज।
IGI एयरपोर्ट, दिल्ली और सूरत में भी घटनाएँ; एक जर्मन यात्री भी शिकार हुआ।
अदालत ने राज्यों को अवमानना, अनुशासनात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की चेतावनी दी।
ABC कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू न करने को समस्या की मुख्य वजह बताया गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई 2025 को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड सहित सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इस निर्देश में बदलाव की माँग की गई थी। पशु अधिकार समर्थकों की ओर से दायर इस याचिका को शीर्ष अदालत ने जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा के आधार पर अस्वीकार किया।

मुख्य घटनाक्रम

अदालत ने 22 अगस्त और 7 नवंबर 2025 को जारी अपने निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि इन आदेशों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू न किए जाने के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का आदेश अत्यधिक कठोर है और इससे पशुओं के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने ABC कार्यक्रम को अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इन दलीलों को नकारते हुए नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

आँकड़ों की भयावह तस्वीर

अदालत ने देशभर से सामने आए आँकड़ों का उल्लेख करते हुए चिंता व्यक्त की। राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में मात्र एक महीने में कुत्तों के काटने के 1,084 मामले दर्ज किए गए, जिनमें कई छोटे बच्चों के चेहरे पर गंभीर चोटें शामिल हैं। तमिलनाडु में वर्ष के पहले चार महीनों में करीब दो लाख कुत्ते के काटने के मामले सामने आए।

न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) सहित देश के व्यस्त हवाई अड्डों पर भी ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। सूरत में एक जर्मन यात्री को भी आवारा कुत्ते ने काट लिया। अदालत ने कहा कि ये घटनाएँ शहरी प्रशासन और गवर्नेंस पर जनता के विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।

सरकार और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी

सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि यदि पूर्व निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई, अनुशासनात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि न्यायालय इस मामले में किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि देशभर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाले हमलों ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या खड़ी कर दी है। बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएँ कई राज्यों से लगातार सामने आ रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब रेबीज़ नियंत्रण को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं।

क्या होगा आगे

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद राज्य सरकारों पर ABC कार्यक्रम को सख्ती से लागू करने और सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने का दबाव और बढ़ गया है। अवमानना की चेतावनी के मद्देनज़र प्रशासनिक तंत्र को अब ठोस और सत्यापन-योग्य कदम उठाने होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर ज़मीन पर इसकी पकड़ कमज़ोर रही है। अवमानना की चेतावनी तब तक खोखली रहेगी जब तक राज्य सरकारें नसबंदी और टीकाकरण के सत्यापन-योग्य आँकड़े प्रस्तुत नहीं करतीं। मुख्यधारा की कवरेज इस बहस को 'लवर्स बनाम कोर्ट' तक सीमित कर देती है, जबकि असली मुद्दा नगर निगमों की जवाबदेही और बजट आवंटन है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर क्या आदेश दिया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व आदेश को 19 मई 2025 को बरकरार रखा। साथ ही उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें इस आदेश में बदलाव की माँग की गई थी।
डॉग लवर्स की याचिका में क्या माँग की गई थी?
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश कठोर है और पशुओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने ABC (पशु जन्म नियंत्रण) कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने को विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
देश में कुत्तों के काटने की स्थिति कितनी गंभीर है?
आँकड़े चिंताजनक हैं — राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1,084 मामले और तमिलनाडु में वर्ष के पहले चार महीनों में करीब दो लाख मामले दर्ज किए गए। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट और सूरत में भी घटनाएँ हुई हैं।
राज्य सरकारों को अदालत ने क्या चेतावनी दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि 22 अगस्त और 7 नवंबर 2025 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई, अनुशासनात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
ABC कार्यक्रम क्या है और यह क्यों विफल रहा?
पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के ज़रिए उनकी आबादी नियंत्रित करने की सरकारी योजना है। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इसे प्रभावी ढंग से लागू न किए जाने के कारण ही देश में आवारा कुत्तों की समस्या और गंभीर हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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