क्या सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों और हाईवे से आवारा पशुओं को हटाने के लिए निर्देश जारी किए?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों और हाईवे से आवारा पशुओं को हटाने के लिए निर्देश जारी किए?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों और मवेशियों को सार्वजनिक स्थानों और हाईवे से हटाने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। जानें क्या हैं ये निर्देश और उनका महत्व।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
सार्वजनिक स्थानों पर बाड़ लगाने का निर्देश दिया गया है।
आवारा जानवरों को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में भेजने का आदेश दिया गया है।
राज्यों को अनुपालन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
यह निर्देश जन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय छवि को ध्यान में रखते हुए हैं।

नई दिल्ली, 7 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से बचाने और राजमार्गों से आवारा मवेशियों तथा अन्य जानवरों को हटाने के लिए कई निर्देश दिए हैं।

देशभर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए हर शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर उचित बाड़ लगाई जाए।

न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थानीय नगर निकायों को ऐसे परिसरों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 के तहत अनिवार्य टीकाकरण और नसबंदी के बाद जानवरों को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश भी दिया।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन सार्वजनिक स्थानों से हटाए गए कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं लाया जाना चाहिए। इसके अलावा, कोर्ट ने समय-समय पर निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजमार्गों से आवारा पशुओं और अन्य जानवरों को तुरंत हटाने का आदेश भी दिया। पीठ ने कहा कि ऐसे जानवरों को बिना किसी देरी के निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में पहुंचाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, "सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। अन्यथा, अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।" साथ ही, निर्देशों को लागू करने के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं के लिए आठ हफ़्तों के अंदर अनुपालन स्थिति रिपोर्ट (कंप्लायंस स्टेटस रिपोर्ट) मांगी गई है।

इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने एबीसी नियमों के क्रियान्वयन में खामियों को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रति नाराजगी व्यक्त की थी। न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पीठ इस बात पर जोर दे रही है कि आवारा पशुओं से जुड़ी कई घटनाएं न केवल जन सुरक्षा से समझौता करती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को भी खराब करती हैं।

पीठ ने टिप्पणी की, "लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी खराब होती है। हम समाचार रिपोर्ट भी पढ़ रहे हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

आवारा पशुओं की समस्या केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि उन्हें इस समस्या का गंभीरता से समाधान करना चाहिए। हम सभी को इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों और हाईवे से आवारा पशुओं को हटाना और जन सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
क्या आवारा जानवरों को वापस उसी स्थान पर लाया जा सकता है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए जानवरों को उसी स्थान पर वापस नहीं लाया जाना चाहिए।
क्या स्थानीय नगर निकायों को निगरानी का निर्देश दिया गया है?
जी हां, स्थानीय नगर निकायों को ऐसे परिसरों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
आवारा पशुओं को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में कब भेजा जाएगा?
आवारा पशुओं को बिना किसी देरी के निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में भेजने का आदेश दिया गया है।
क्या राज्यों को अनुपालन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता है?
जी हां, राज्यों को निर्देशों के अनुपालन के लिए आठ हफ्तों के अंदर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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