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क्या सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों के मामले में सख्ती बरतेगा?

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क्या सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों के मामले में सख्ती बरतेगा?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई जारी रखी है, जिसमें कुत्तों के काटने और सड़क हादसों की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई गई है। क्या न्यायालय राज्य सरकारों से सख्ती से नियमों का पालन कराने में सफल होगा?

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों के मामले में सख्त रुख कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि राज्यों को नियमों का पालन करने की आवश्यकता सड़क हादसों का प्रमुख कारण एनिमल बर्थ कंट्रोल का महत्व

नई दिल्ली, ८ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई जारी रखेगा। न्यायालय इस मामले की विस्तृत जांच करेगा और यह देखेगा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि और नगर निगम अधिकारियों और स्थानीय निकायों द्वारा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने में असफलता पर चिंता व्यक्त की थी।

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच, जो सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, ने कहा कि बच्चों और बड़ों दोनों को कुत्ते काट रहे हैं और लगातार लापरवाही के कारण लोगों की जानें जा रही हैं।

जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हमें पता है कि यह सब हो रहा है। बच्चों और बड़ों को कुत्ते काट रहे हैं, लोग मर रहे हैं। पिछले २० दिनों में ही दो जज जानवरों से जुड़े सड़क हादसों में शामिल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर आवारा जानवरों की उपस्थिति केवल काटने की समस्या नहीं है, बल्कि यह हादसों का एक बड़ा कारण भी है।

सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने जस्टिस नाथ की बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के बाद, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई है और लगभग १,४०० किलोमीटर के हाईवे के खतरनाक हिस्सों की पहचान की है।

हालांकि, उन्होंने बताया कि इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा मिलकर काम करने की आवश्यकता होगी, जिसमें शेल्टर बनाना और एबीसी केंद्रों के लिए मानव संसाधन शामिल है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे कई बड़े राज्यों ने अभी तक कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल नहीं किए हैं।

जस्टिस नाथ की बेंच ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट नियमों का पालन न करने पर सख्त रुख अपनाएगा। कोर्ट ने कहा कि जो राज्य जवाब नहीं देंगे, उनके साथ हम सख्ती से पेश आएंगे।

पशु कल्याण समूहों का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने तर्क किया कि नसबंदी और टीकाकरण के माध्यम से आबादी को नियंत्रित करना ही एकमात्र टिकाऊ समाधान है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुत्तों को उनके इलाकों से अंधाधुंध हटाने से समस्या और बढ़ सकती है।

अधिकारियों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि गेटेड कम्युनिटी के निवासियों के कल्याण संघ को वोटिंग से यह तय करने की अनुमति दी जानी चाहिए कि उनके परिसर में आवारा जानवरों को अनुमति दी जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि जानवरों के प्रति दया निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकती।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें मानव और पशु कल्याण दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख यह दर्शाता है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवता से जुड़ा हुआ है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में क्या निर्णय लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है और राज्यों के नियमों के पालन पर ध्यान देने की बात की है।
क्या आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं?
हां, सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे लोगों की जानें जा रही हैं।
राज्यों को सुप्रीम कोर्ट से क्या निर्देश मिले हैं?
राज्यों को सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिला है कि वे आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए नियमों का पालन करें और अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
राष्ट्र प्रेस
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