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केरल सरकार ने दिलीप की बरी होने की अपील को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की

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केरल सरकार ने दिलीप की बरी होने की अपील को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की

सारांश

केरल सरकार ने अभिनेता दिलीप को बरी करने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला 2017 में हुई अभिनेत्री अपहरण और यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, जिसमें छह अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया। जानिए इस विवादास्पद मामले की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

केरल सरकार ने दिलीप के बरी होने के खिलाफ अपील की है।
यह मामला 2017 में हुई अभिनेत्री अपहरण और यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।
दिलीप को बरी किया गया था, लेकिन छह अन्य आरोपी दोषी पाए गए।
राज्य सरकार ने अपील में बरी किए गए आरोपियों को दोषी ठहराने की मांग की है।
कानूनी लड़ाई का नया चरण शुरू हो चुका है।

कोच्चि, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल सरकार ने शुक्रवार को केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एर्नाकुलम के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय के उस हालिया फैसले को चुनौती दी, जिसमें 2017 के अभिनेत्री अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम अभिनेता दिलीप को बरी कर दिया गया था, जबकि छह अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

दिसंबर 2025 में सत्र न्यायालय की न्यायाधीश हनी एम. वर्गीज ने दिलीप को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन छह अन्य आरोपियों को दोषी पाया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

फैसले के बाद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। राज्य के विधि मंत्री पी. राजीव ने 8 दिसंबर को ही घोषणा की थी कि राज्य सरकार इस निर्णय को चुनौती देगी और पीड़िता के साथ खड़ी रहेगी।

अपील में राज्य सरकार ने दिलीप और अन्य तीन बरी किए गए आरोपियों चार्ली थॉमस, सनिलकुमार उर्फ मेस्थिरी सनिल और शरत जी. नायर को दोषी ठहराने की मांग की है। साथ ही, सरकार ने छह दोषी ठहराए गए व्यक्तियों की सजा बढ़ाने की भी मांग की है। ये लोग हैं सुनील एन. एस. उर्फ पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी, मणिकंदन बी., विजीश वी. पी., सलीम एच. उर्फ वडिवाल सलीम और प्रदीप

फरवरी 2017 में पीड़िता को कोच्चि में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अपहरण कर चलती गाड़ी में यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया था। इस घटना का वीडियो भी बनाया गया था। अगले ही दिन वाहन चालक मार्टिन एंटनी को गिरफ्तार किया गया, और एक सप्ताह के भीतर मुख्य आरोपी पल्सर सुनी भी पकड़ा गया।

जुलाई 2017 में दिलीप को कथित रूप से प्रतिशोध की भावना से हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य न होने की बात कही थी। लगभग तीन महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

छह दोषियों को आपराधिक साजिश, अपहरण, अवैध बंधक बनाना, बल प्रयोग, सामूहिक दुष्कर्म तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत सीधे तौर पर केवल पल्सर सुनी को दोषी ठहराया गया।

दोषी ठहराए गए कई आरोपियों ने सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है, जिससे राज्य के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक में कानूनी लड़ाई का नया चरण शुरू हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय प्रणाली की विश्वसनियता पर भी सवाल उठाता है। राज्य सरकार का कदम संभावित रूप से पीड़ितों के प्रति समर्थन का प्रतीक है, जबकि बरी किए गए आरोपियों के कानूनी अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या दिलीप को बरी किया गया है?
हाँ, दिलीप को 2017 के मामले में बरी किया गया था, लेकिन केरल सरकार ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की है।
इस मामले में कितने आरोपी हैं?
इस मामले में कुल सात आरोपी हैं, जिनमें से एक को बरी किया गया है और छह को दोषी ठहराया गया है।
क्या अपील में क्या मांग की गई है?
अपील में राज्य सरकार ने दिलीप और अन्य तीन बरी किए गए आरोपियों को दोषी ठहराने और दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई कब होगी?
अभी तक हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है।
क्या यह मामला मीडिया में प्रमुखता से उभरा है?
जी हाँ, यह मामला समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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