क्या ट्रंप के टैरिफ संकेत और भारत-ईयू समझौता भारतीय शेयर बाजार में सुधार लाएंगे?

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क्या ट्रंप के टैरिफ संकेत और भारत-ईयू समझौता भारतीय शेयर बाजार में सुधार लाएंगे?

सारांश

क्या ट्रंप के टैरिफ संकेत और भारत-ईयू समझौता भारतीय शेयर बाजार में सुधार लाएंगे? जानिए इस हफ्ते की संभावनाओं के बारे में।

Key Takeaways

  • सेंसेक्स और निफ्टी 50 में सुधार की उम्मीद है।
  • अमेरिका से टैरिफ में राहत का संकेत मिला है।
  • भारत-ईयू समझौता व्यापार को मजबूत कर सकता है।
  • आरबीआई नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है।
  • निफ्टी के लिए 24,850 का स्तर महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 से उम्मीद की जा रही है कि छुट्टियों वाले इस छोटे हफ्ते में इनमें कुछ सुधार (रिकवरी) देखने को मिल सकता है। इसके पीछे अमेरिका की ओर से टैरिफ में राहत की उम्मीद और भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार समझौते में प्रगति की संभावनाएं हैं।

गणतंत्र दिवस 2026 के कारण सोमवार यानी 26 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार बंद है। बीएसई और एनएसई में ट्रेडिंग मंगलवार से फिर शुरू होगी।

पिछले शुक्रवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी, जिसकी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, वैश्विक तनाव, केंद्रीय बजट से पहले सतर्कता और दिसंबर तिमाही के मिले-जुले नतीजे रहे।

हालांकि, वीकेंड पर हुई कुछ अहम घटनाक्रमों से बाजार का माहौल बेहतर हो सकता है।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को वापस लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद काफी कम कर दी है। इससे भारतीय शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है।

इसी बीच 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के लिए यूरोपीय नेता भारत पहुंचे हैं। इस बैठक में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार मजबूत हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक बाजारों से बेहतर जुड़ने, निर्यात बढ़ाने और नई सप्लाई चेन बनाने में मदद कर सकता है।

जानकारों का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 तक भारत के कुल निर्यात का 17.3 प्रतिशत और आयात का 8.4 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय संघ से जुड़ा है। उनका अनुमान है कि यह समझौता 2031 तक भारत के निर्यात में 50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ेगा, तकनीक का आदान-प्रदान होगा और आईटी सेवाओं के निर्यात को भी फायदा मिलेगा।

एक्सपर्ट के मुताबिक, बाजार इस समझौते को सकारात्मक रूप से ले सकता है। हालांकि, भारत-अमेरिका समझौता, रुपए की स्थिरता और वैश्विक हालात का शांत होना भी जरूरी है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि वह बाजार में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी डालेगा।

इसके तहत 30 जनवरी को 25,000 करोड़ रुपए की 90-दिन की रेपो नीलामी होगी। इसके अलावा 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर (करीब 91,000 करोड़ रुपए) की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी की जाएगी।

आरबीआई सरकार के बॉंड भी खरीदेगा। इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपए के ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत 5 और 12 फरवरी को 50-50 हजार करोड़ रुपए के बॉंड खरीदे जाएंगे।

पिछले हफ्ते निफ्टी 50 में 2.51 प्रतिशत की गिरावट आई। सभी सेक्टरों में बिकवाली के चलते बाजार कमजोर दिखा।

तकनीकी रूप से निफ्टी अपने 200 दिन के औसत स्तर (ईएमए) से नीचे बंद हुआ है, जो कमजोरी का संकेत माना जाता है। इसके अलावा 21 दिन का ईएमए, 55 दिन के ईएमए से नीचे चला गया है, जिससे गिरावट का रुख साफ होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,850 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर यह टूटता है, तो निफ्टी 24,600 तक जा सकता है। ऊपर की ओर 25,250 पर रेजिस्टेंस है। अगर इससे ऊपर मजबूती आती है, तो निफ्टी 25,500 तक जा सकता है। उस समय तक एक्सपर्ट ने तेजी में बेचने की रणनीति अपनाने की सलाह दी है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भारतीय बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हम अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करें और नई रणनीतियों के साथ आगे बढ़ें।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

क्या अमेरिका के टैरिफ में कमी से भारत को फायदा होगा?
जी हां, यदि अमेरिका अपने टैरिफ को कम करता है, तो इससे भारत के निर्यात में वृद्धि हो सकती है।
भारत-ईयू व्यापार समझौता क्या है?
यह एक व्यापार समझौता है जो दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
आरबीआई का बाजार में नकदी डालने का क्या असर होगा?
आरबीआई द्वारा नकदी डालने से बाजार में तरलता बढ़ेगी, जो निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है।
निफ्टी को सुधार की उम्मीद क्यों है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से टैरिफ में राहत और भारत-ईयू समझौते की प्रगति से निफ्टी में सुधार हो सकता है।
क्या भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का कारण क्या है?
गिरावट का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव रहा है।
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