भारत का लिंगानुपात 904 से बढ़कर 917 हुआ, सरकार ने जारी किया 'वूमेन एंड मेन इन इंडिया 2025' डेटा
सारांश
Key Takeaways
- भारत का लिंगानुपात 2017-19 के 904 से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया।
- ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी 2022-2025 के बीच 37.5%25 से बढ़कर 45.9%25 हुई।
- उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 28.5 से 30.2 हुआ, पुरुषों (28.9) से आगे।
- प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की संख्या में 2017-2025 के बीच 102.54%25 की वृद्धि, पुरुषों में 73.80%25।
- 2008-2023 के बीच बालिका और बालक दोनों की शिशु मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज।
- रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की वेबसाइट पर उपलब्ध।
भारत में लिंगानुपात राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर हुआ है — 2017-19 में यह आँकड़ा 904 था, जो 2021-23 में बढ़कर 917 हो गया है। यह सुधार लड़कियों के बेहतर जीवन-रक्षण का संकेत देता है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा में यह जानकारी सार्वजनिक की।
प्रकाशन का उद्देश्य और दायरा
सरकार ने 'वूमेन एंड मेन इन इंडिया 2025: सेलेक्टेड इंडिकेटर्स एंड डाटा' शीर्षक से यह रिपोर्ट जारी की। आधिकारिक बयान के अनुसार, इसका उद्देश्य जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी, निर्णय-निर्माण, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अन्य लैंगिक मुद्दों पर लैंगिक आधार पर विभाजित आँकड़े उपलब्ध कराना है। इसमें विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों से प्राप्त डेटा का उपयोग किया गया है।
गौरतलब है कि इस प्रकाशन में 50 प्रमुख संकेतकों से जुड़ी मेटाडेटा जानकारी भी दी गई है, जिससे अवधारणाओं, परिभाषाओं, स्रोतों और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया जा सके।
शिशु मृत्यु दर और स्वास्थ्य संकेतक
प्रकाशन के अनुसार, 2008 से 2023 के बीच बालिका और बालक दोनों के शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय और लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यह दीर्घकालिक सुधार स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुँच और सरकारी कार्यक्रमों के प्रभाव का संकेत देता है।
उच्च शिक्षा और श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी
उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 2021-22 से 2022-23 के बीच महिलाओं के लिए 28.5 से बढ़कर 30.2 और पुरुषों के लिए 28.3 से बढ़कर 28.9 हो गया। यह पहली बार है जब महिलाओं का नामांकन अनुपात पुरुषों से आगे निकला है, जो एक ऐतिहासिक बदलाव है।
15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल भागीदारी में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी ग्रामीण महिलाओं में रही, जहाँ यह 2022 से 2025 के बीच 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हो गई।
प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की तेज़ वृद्धि
2017 से 2025 के बीच प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत पुरुषों की संख्या में 73.80 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में महिलाओं की संख्या में 102.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आँकड़ा दर्शाता है कि नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों की तुलना में लगभग डेढ़ गुना तेज़ गति से बढ़ी है।
नीति निर्माण में उपयोग और आगे की राह
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अनुसार, यह प्रकाशन नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को साक्ष्य-आधारित लैंगिक-संवेदनशील नीतियाँ और कार्यक्रम तैयार करने में मदद करेगा। रिपोर्ट मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में अपनी प्रगति की समीक्षा कर रहा है, और लैंगिक समानता के मानदंड वैश्विक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।