मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर भारत की प्रतिबद्धता: जेपी नड्डा ने जिनेवा में PMNCH से की द्विपक्षीय बैठक

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मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर भारत की प्रतिबद्धता: जेपी नड्डा ने जिनेवा में PMNCH से की द्विपक्षीय बैठक

सारांश

जिनेवा में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के मौके पर स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने PMNCH से द्विपक्षीय बैठक की और मातृ-शिशु स्वास्थ्य एजेंडे पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत प्रतिवर्ष 20 लाख डॉलर अनुदान देता है और PMNCH बोर्ड का उपाध्यक्ष है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 20 मई 2026 को जिनेवा में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान PMNCH बोर्ड चेयर हेलेन क्लार्क से द्विपक्षीय बैठक की।
भारत 2005 से PMNCH का सदस्य है और वर्तमान में बोर्ड का उपाध्यक्ष तथा स्थायी समिति का अध्यक्ष है।
भारत प्रतिवर्ष PMNCH को 20 लाख डॉलर की स्थायी अनुदान राशि प्रदान करता है।
भारत ने MMR और IMR में वैश्विक औसत से तेज गति से सुधार दर्ज किया है।
भारत ने 2014 में किशोरों के लिए विशेष राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया था।
नड्डा ने भारत के डिजिटल एवं साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य मॉडलों को वैश्विक मंच पर साझा करने की पेशकश की।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 20 मई 2026 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह प्रतिबद्धता पार्टनरशिप फॉर मैटरनल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हेल्थ (PMNCH) की बोर्ड चेयर हेलेन क्लार्क के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में व्यक्त की गई।

भारत और PMNCH: दो दशकों की साझेदारी

नड्डा ने बैठक में स्पष्ट किया कि भारत 2005 में PMNCH की स्थापना के समय से ही इस वैश्विक साझेदारी का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इस साझेदारी को आगे भी जारी रखने और इसके उद्देश्यों में सार्थक योगदान देने पर गर्व महसूस करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के वित्तपोषण पर दबाव बढ़ रहा है।

भारत वर्तमान में PMNCH बोर्ड का उपाध्यक्ष और स्थायी समिति का अध्यक्ष है। इसके अतिरिक्त, भारत की ओर से प्रतिवर्ष 20 लाख डॉलर की स्थायी अनुदान राशि देने की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार

मंत्री ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत ने मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है, और यह सुधार वैश्विक औसत की तुलना में तेज गति से हुआ है। गौरतलब है कि भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था जिसने 2014 में किशोरों के लिए एक विशेष राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया, जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और सामुदायिक स्तर पर देशभर के युवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की गई।

वैश्विक मंच पर भारत के मॉडल की पेशकश

नड्डा ने इस बात पर बल दिया कि भारत के पास प्रमाण-आधारित सर्वोत्तम स्वास्थ्य मॉडल और बड़े पैमाने पर लागू सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम हैं, जिन्हें अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है। उन्होंने PMNCH को भारत के सफल मॉडलों और नवाचारों को भौतिक एवं डिजिटल मंचों के माध्यम से वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का निमंत्रण दिया।

उन्होंने तकनीकी संसाधनों और डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया, विशेष रूप से बढ़ते गैर-संचारी रोगों (NCD) के संदर्भ में।

हेलेन क्लार्क की सराहना और आगे की राह

PMNCH बोर्ड चेयर हेलेन क्लार्क ने वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के निरंतर नेतृत्व और योगदान की सराहना की। उन्होंने PMNCH और व्यापक वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की समयसीमा 2030 निकट आ रही है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के कई वैश्विक लक्ष्य अभी भी अधूरे हैं। भारत की सक्रिय भागीदारी इन लक्ष्यों की प्राप्ति में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब पश्चिमी देशों द्वारा बहुपक्षीय स्वास्थ्य वित्तपोषण पर दबाव बढ़ रहा है। हालाँकि MMR और IMR में सुधार के दावे उत्साहजनक हैं, आलोचकों का कहना है कि ये आँकड़े राज्यों के बीच गहरी असमानता को छुपाते हैं — उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में स्थिति अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। वैश्विक मंच पर भारत के 'सफल मॉडल' की पेशकश तभी विश्वसनीय होगी जब घरेलू स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुँच सुनिश्चित हो।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PMNCH क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
PMNCH यानी 'पार्टनरशिप फॉर मैटरनल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हेल्थ' एक वैश्विक स्वास्थ्य साझेदारी है जो 2005 में स्थापित हुई थी। भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है और वर्तमान में बोर्ड का उपाध्यक्ष तथा स्थायी समिति का अध्यक्ष है।
भारत PMNCH को कितना वित्तीय योगदान देता है?
भारत की ओर से PMNCH को प्रतिवर्ष 20 लाख डॉलर की स्थायी अनुदान राशि दी जाती है। स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने जिनेवा बैठक में इस प्रतिबद्धता को जारी रखने की पुष्टि की।
भारत ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य में क्या उपलब्धियाँ हासिल की हैं?
भारत ने मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में वैश्विक औसत से तेज गति से कमी दर्ज की है। इसके अलावा, भारत 2014 में किशोरों के लिए विशेष राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करने वाले शुरुआती देशों में शामिल था।
79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में नड्डा की बैठक का महत्व क्या है?
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब SDG 2030 लक्ष्यों की समयसीमा निकट है और वैश्विक मातृ-शिशु स्वास्थ्य वित्तपोषण पर दबाव बढ़ रहा है। भारत ने इस मंच पर अपने डिजिटल और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य मॉडलों को वैश्विक स्तर पर साझा करने की पेशकश की।
भारत वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अन्य देशों की कैसे मदद करना चाहता है?
नड्डा ने कहा कि भारत के पास प्रमाण-आधारित सर्वोत्तम स्वास्थ्य मॉडल और बड़े पैमाने पर लागू सफल कार्यक्रम हैं। उन्होंने PMNCH को इन मॉडलों को भौतिक और डिजिटल मंचों के जरिए दुनिया के सामने रखने का निमंत्रण दिया और अन्य देशों को तकनीकी मार्गदर्शन देने की इच्छा जताई।
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