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संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट 2025: वैश्विक भूख दर 7.8% पर, एशिया में सुधार का श्रेय भारत को

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संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट 2025: वैश्विक भूख दर 7.8% पर, एशिया में सुधार का श्रेय भारत को

सारांश

संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट में वैश्विक भूख दर 2025 में 7.8% पर आई — लगातार तीसरे साल गिरावट। एशिया में इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह भारत है, जहाँ भूख दर 10% से नीचे आ गई। लेकिन बच्चों में कुपोषण और जलवायु जोखिम अभी भी बड़ी चुनौती हैं।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में वैश्विक भूख दर 7.8% रही, जो 2024 में 8.1% और 2022 में 8.6% थी।
भारत में भूख की दर घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आई; एशिया में सुधार का सबसे बड़ा कारण भारत को बताया गया।
दुनिया में 64.5 करोड़ लोग अभी भी भूख से प्रभावित हैं।
डोमिनिकन गणराज्य वैश्विक भूख मानचित्र की श्रेणी से बाहर हुआ; इथियोपिया, तंजानिया, ज़िम्बाब्वे, सेनेगल, ज़ाम्बिया में भी सुधार।
बच्चों में कुपोषण , महिलाओं में एनीमिया और वयस्कों में मोटापा अब भी गंभीर चुनौती।
FAO ने चेताया — जलवायु परिवर्तन और वैश्विक व्यापार व्यवधान इस प्रगति को खतरे में डाल सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2025' के अनुसार, वर्ष 2025 में लगातार तीसरे साल वैश्विक भूख दर में गिरावट दर्ज की गई है — और एशिया में इस सुधार का सबसे बड़ा कारण भारत को बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 64.5 करोड़ आबादी यानी 7.8 प्रतिशत लोग वर्ष 2025 में भूख से प्रभावित रहे, जो 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत था।

भारत की भूमिका और उपलब्धि

दुनिया की लगभग पाँचवें हिस्से की आबादी वाले भारत में भूख की दर घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और कृषि उत्पादकता में वृद्धि ने इस सुधार में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांकों में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है।

अफ्रीका में भी सकारात्मक संकेत

रिपोर्ट में इथियोपिया, तंजानिया, ज़िम्बाब्वे, सेनेगल और ज़ाम्बिया में भूख की स्थिति में सुधार के संकेत दर्ज किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि डोमिनिकन गणराज्य अब वैश्विक भूख मानचित्र में शामिल देशों की श्रेणी से बाहर हो गया है — जो इस रिपोर्ट की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

गाजा संघर्ष और वैश्विक आँकड़े

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने रिपोर्ट जारी करते हुए स्पष्ट किया कि गाजा में जारी युद्ध का वैश्विक भूख के आँकड़ों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट दीर्घकालिक और लगातार बने रहने वाले कुपोषण को मापती है, न कि युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न तात्कालिक खाद्य असुरक्षा को।

टोरेरो ने यह भी कहा कि हाल के समय में गाजा में खाद्य आपूर्ति बढ़ी है, जिससे वहाँ की स्थिति कुछ हद तक स्थिर हुई है। हालाँकि उन्होंने चेताया कि युद्ध में कृषि ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है और उत्पादन को पूरी तरह बहाल करने में कई वर्ष लगेंगे। उनके शब्दों में, 'हमारा उद्देश्य कृषि उत्पादन को फिर से स्थापित करने में मदद करना है, क्योंकि कृषि से जुड़ा बड़ा बुनियादी ढाँचा नष्ट हो चुका है।'

कुपोषण, एनीमिया और मोटापे की चुनौती

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भूख दर में गिरावट के बावजूद बच्चों में कुपोषण अब भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा महिलाओं में एनीमिया के मामलों में वृद्धि और वयस्कों में मोटापे की समस्या भी लगातार बढ़ रही है। दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार तक पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आगे की राह और चेतावनियाँ

संयुक्त राष्ट्र की पाँच एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार इस रिपोर्ट में सरकारों से ऐसी नीतियाँ अपनाने का आह्वान किया गया है जो भोजन की उपलब्धता के साथ-साथ उसके पोषण स्तर और वहनीयता को भी सुनिश्चित करें। रिपोर्ट ने यह भी चेताया है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएँ और वैश्विक व्यापार में व्यवधान इस प्रगति को पलट सकते हैं। गौरतलब है कि यह लगातार तीसरे वर्ष की गिरावट है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 2030 तक शून्य भूख के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए यह गति पर्याप्त नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन घरेलू स्तर पर तस्वीर उतनी सरल नहीं है — राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण जैसे स्वतंत्र स्रोत बच्चों में स्टंटिंग और वेस्टिंग की दरों पर चिंताजनक आँकड़े दर्शाते हैं। FAO की यह रिपोर्ट दीर्घकालिक कुपोषण मापती है, तात्कालिक खाद्य असुरक्षा नहीं — इस तकनीकी अंतर को अक्सर मुख्यधारा की कवरेज नज़रअंदाज़ कर देती है। असली सवाल यह है कि क्या कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच उन सबसे वंचित तबकों तक हो रही है जो आँकड़ों में दिखते हैं लेकिन नीति में अदृश्य रहते हैं। 2030 के शून्य-भूख लक्ष्य को देखते हुए, यह प्रगति उत्साहजनक तो है, पर पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र की 2025 की भूख रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2025' के अनुसार वर्ष 2025 में वैश्विक भूख दर घटकर 7.8% रह गई, जो 2022 में 8.6% थी। यह लगातार तीसरे साल की गिरावट है और दुनिया में अब भी 64.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित हैं।
भारत में भूख दर कितनी है और इसमें सुधार कैसे आया?
भारत में भूख की दर घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और कृषि उत्पादकता में वृद्धि इस सुधार के मुख्य कारण हैं, और भारत को एशिया में हंगर रेट सुधार का सबसे बड़ा कारण बताया गया है।
गाजा युद्ध का वैश्विक भूख आँकड़ों पर क्या असर पड़ा?
FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार गाजा में जारी युद्ध का वैश्विक भूख के आँकड़ों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि यह रिपोर्ट दीर्घकालिक कुपोषण मापती है, न कि युद्ध से उत्पन्न तात्कालिक खाद्य असुरक्षा को। हालाँकि गाजा में कृषि ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है और उत्पादन बहाली में कई वर्ष लगेंगे।
भूख दर घटने के बावजूद कौन-सी चुनौतियाँ बनी हुई हैं?
रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में कुपोषण अब भी गंभीर चुनौती है, महिलाओं में एनीमिया के मामले बढ़ रहे हैं और वयस्कों में मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और वैश्विक व्यापार में व्यवधान इस प्रगति को पलट सकते हैं।
अफ्रीका के किन देशों में भूख की स्थिति में सुधार आया है?
रिपोर्ट के अनुसार इथियोपिया, तंजानिया, ज़िम्बाब्वे, सेनेगल और ज़ाम्बिया में भूख की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। डोमिनिकन गणराज्य अब वैश्विक भूख मानचित्र में शामिल देशों की श्रेणी से बाहर हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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