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पाकिस्तान में 16.1 करोड़ लोग पौष्टिक भोजन से महरूम, 63% आबादी स्वस्थ आहार वहन करने में असमर्थ

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पाकिस्तान में 16.1 करोड़ लोग पौष्टिक भोजन से महरूम, 63% आबादी स्वस्थ आहार वहन करने में असमर्थ

सारांश

पाकिस्तान में 16.1 करोड़ लोग पौष्टिक भोजन का खर्च नहीं उठा सकते — और यह तब है जब दक्षिण एशिया में खाद्य पदार्थ सबसे सस्ते वहीं हैं। असली समस्या कीमत नहीं, बल्कि ध्वस्त होती क्रय शक्ति है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की 63 प्रतिशत आबादी — लगभग 16.1 करोड़ लोग — वर्ष 2025 में न्यूनतम स्वस्थ आहार वहन करने में असमर्थ रहे।
महंगाई समायोजन के बाद वास्तविक घरेलू आय में 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
गरीबी दर 21.9% से बढ़कर 28.9% हुई; 2.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी रेखा के नीचे आए।
14 में से 13 प्रमुख खाद्य वस्तुओं की प्रति व्यक्ति खपत घटी — दालें 26% , चावल 19% , दूध 10% , मांस 18% ।
दक्षिण एशिया में सबसे सस्ते खाद्य पदार्थ होने के बावजूद पाकिस्तान स्वस्थ भोजन पहुँच में क्षेत्र में सबसे पीछे ।
वैश्विक भूख दर 2022 के 8.6% से घटकर 2025 में 7.8% हुई, लेकिन पाकिस्तान इस सुधार से अछूता रहा।

पाकिस्तान की लगभग 63 प्रतिशत आबादी — यानी करीब 16.1 करोड़ लोग — वर्ष 2025 में न्यूनतम स्वस्थ और पौष्टिक आहार का खर्च उठाने में असमर्थ रहे। द न्यूज पाकिस्तान में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, आवास, परिवहन और बिजली-पानी जैसी बुनियादी गैर-खाद्य ज़रूरतें पूरी करने के बाद अधिकांश परिवारों के पास अनाज, दाल, दूध, अंडे, फल और सब्ज़ियाँ खरीदने के लिए पर्याप्त आय नहीं बचती। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह ध्यान में आता है कि दक्षिण एशिया में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की सबसे कम कीमत होने के बावजूद पाकिस्तान स्वस्थ भोजन की पहुँच के मामले में पूरे क्षेत्र में सबसे पीछे है।

खाद्य संकट की गहराती जड़ें

रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के उच्च महंगाई स्तर से कुछ राहत मिलने के बाद भी भोजन की वहनीयता पाकिस्तान में एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई की रफ्तार भले ही धीमी हुई हो, लेकिन पिछले वर्षों की ऊँची महंगाई ने आम लोगों की क्रय शक्ति को जो नुकसान पहुँचाया, उसकी भरपाई अब तक नहीं हो सकी है। महंगाई को समायोजित करने के बाद वास्तविक घरेलू आय में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

गरीबी रेखा के नीचे 2.5 करोड़ अतिरिक्त लोग

आर्थिक दबाव का सीधा असर गरीबी दर पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है, जिससे अनुमानित 2.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भूख की स्थिति में मामूली सुधार देखा जा रहा है — वर्ष 2025 में दुनिया की 7.8 प्रतिशत आबादी भूख से प्रभावित रही, जबकि 2024 में यह आँकड़ा 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत था।

खानपान पर असर: 13 खाद्य वस्तुओं की खपत घटी

खाद्य संकट का सबसे ठोस प्रमाण लोगों की थाली में दिखता है। दो नवीनतम सर्वेक्षणों के बीच 14 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 13 की प्रति व्यक्ति खपत में गिरावट दर्ज की गई। प्रति व्यक्ति मासिक चावल की खपत लगभग 19 प्रतिशत, दालों की 26 प्रतिशत और दूध की 10 प्रतिशत घटी। इसके अलावा, मटन, बीफ और चिकन की संयुक्त खपत में भी करीब 18 प्रतिशत की कमी आई है।

दक्षिण एशिया में सबसे बुरी स्थिति

गौरतलब है कि पाकिस्तान में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की कीमतें दक्षिण एशियाई देशों में सबसे कम हैं, फिर भी स्वस्थ आहार की पहुँच के मामले में वह क्षेत्र में सबसे निचले पायदान पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विरोधाभास दर्शाता है कि समस्या केवल कीमतों की नहीं, बल्कि आय और रोज़गार की संरचनात्मक कमज़ोरी की है। आने वाले समय में यदि वास्तविक आय में सुधार नहीं हुआ, तो पाकिस्तान में कुपोषण और खाद्य असुरक्षा की स्थिति और गहरा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आय के ढाँचागत पतन की समस्या है। दक्षिण एशिया में सबसे सस्ता खाना होने के बावजूद सबसे बुरी खाद्य पहुँच — यह विरोधाभास बताता है कि IMF राहत पैकेज और मुद्रास्फीति नियंत्रण के दावों के बीच आम पाकिस्तानी की थाली खाली होती जा रही है। 2.5 करोड़ लोगों का एक झटके में गरीबी रेखा के नीचे जाना किसी नीतिगत विफलता से कम नहीं है। जब तक वास्तविक मज़दूरी और रोज़गार में ठोस सुधार नहीं होता, महंगाई के आँकड़े चाहे जो कहें, पाकिस्तान का खाद्य संकट और गहराता रहेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में कितने लोग पौष्टिक भोजन वहन करने में असमर्थ हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 में पाकिस्तान की लगभग 63 प्रतिशत आबादी यानी करीब 16.1 करोड़ लोग न्यूनतम स्वस्थ आहार का खर्च उठाने में असमर्थ रहे। आवास, परिवहन और बिजली-पानी जैसे ज़रूरी खर्चों के बाद पोषक खाद्य पदार्थों के लिए पर्याप्त आय नहीं बचती।
पाकिस्तान में गरीबी दर कितनी बढ़ी है?
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में गरीबी दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है, जिससे अनुमानित 2.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए हैं। महंगाई समायोजन के बाद वास्तविक घरेलू आय में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट इसकी प्रमुख वजह बताई गई है।
पाकिस्तान में किन खाद्य वस्तुओं की खपत सबसे ज़्यादा घटी?
दो नवीनतम सर्वेक्षणों के बीच 14 में से 13 प्रमुख खाद्य वस्तुओं की प्रति व्यक्ति खपत घटी। दालों की खपत 26 प्रतिशत, चावल की 19 प्रतिशत, दूध की 10 प्रतिशत और मटन-बीफ-चिकन की संयुक्त खपत लगभग 18 प्रतिशत कम हुई।
दक्षिण एशिया में सस्ता खाना होने के बावजूद पाकिस्तान में खाद्य संकट क्यों है?
विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या कीमतों की नहीं बल्कि आय की है। दक्षिण एशिया में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की सबसे कम कीमत होने के बावजूद पाकिस्तान में वास्तविक घरेलू आय में 13 प्रतिशत की गिरावट ने लोगों की क्रय शक्ति को इतना कमज़ोर कर दिया है कि वे सस्ता खाना भी नहीं खरीद पा रहे।
वैश्विक भूख की स्थिति की तुलना में पाकिस्तान कहाँ खड़ा है?
वैश्विक स्तर पर भूख की दर 2022 के 8.6 प्रतिशत से घटकर 2025 में 7.8 प्रतिशत हो गई है। लेकिन पाकिस्तान इस सुधार से लाभ नहीं उठा सका और स्वस्थ भोजन की पहुँच के मामले में दक्षिण एशिया में सबसे खराब स्थिति में बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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