क्या पाकिस्तान में गरीबी 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है?
सारांश
Key Takeaways
- 29%25 जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।
- पाकिस्तान में गरीबी दर पिछले 11 वर्षों में सबसे अधिक है।
- आर्थिक अस्थिरता और महंगाई ने गरीबी को बढ़ाया है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 36.2%25 हो गई है।
- आय में असमानता 32.7%25 पर पहुँच गई है।
नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में गरीबी पिछले 11 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। योजना मंत्री अहसान इकबाल द्वारा प्रस्तुत एक आधिकारिक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 29 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 7 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे हैं। यह आंकड़ा 8,484 रुपये मासिक गरीबी रेखा पर आधारित है, जिसे बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न्यूनतम राशि माना गया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रारंभिक निष्कर्षों में दर्शाया गया है कि 2018-19 के बाद से, जब पिछला सर्वेक्षण किया गया था, गरीबी में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
2019 में गरीबी दर 21.9 प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की वर्तमान सरकार के पहले वर्ष में यह दर बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के बाद से यह सबसे ऊँचा स्तर है, जब गरीबी 29.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी। आय में असमानता की स्थिति भी तेज़ी से बिगड़ी है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि असमानता बढ़कर 32.7 हो गई है, जो 27 वर्षों में सबसे ऊँचा स्तर है।
पिछली बार असमानता इस स्तर पर 1998 में थी। पाकिस्तान पिछले 21 वर्षों में 7.1 प्रतिशत की उच्चतम बेरोजगारी दर का भी सामना कर रहा है।
योजना मंत्री ने स्वीकार किया कि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) कार्यक्रम के तहत आर्थिक स्थिरता के उपायों ने गरीबी बढ़ाने में योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि सब्सिडी समाप्त करने, एक्सचेंज रेट में गिरावट और उच्च महंगाई ने जीवन यापन की लागत बढ़ा दी है। प्राकृतिक आपदाओं और धीमी आर्थिक विकास ने भी अधिक लोगों को गरीबी में धकेलने में भूमिका निभाई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 13 वर्षों में पहली बार गरीबी घटने का रुझान उलट गया है। ग्रामीण क्षेत्रों पर अधिक प्रभाव पड़ा है, जहां गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गई है। शहरी गरीबी भी 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई है।
हर प्रांत में हालात और बिगड़ गए हैं। पंजाब में सात वर्षों में गरीबी 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत हो गई है। सिंध में यह 24.5 प्रतिशत से बढ़कर 32.6 प्रतिशत हो गई, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में दर 28.7 प्रतिशत से बढ़कर 35.3 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान सबसे बुरी तरह प्रभावित प्रांत बना हुआ है। यहाँ लगभग आधी जनसंख्या गरीबी में जी रही है और दर 42 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में 2019 में 35,454 रुपये से घटकर 31,127 रुपये हो गई, जो 12 प्रतिशत की गिरावट है।
इसी समय के दौरान घरेलू खर्च में भी 5 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। हालाँकि आय नाममात्र बढ़ी, लेकिन उच्च महंगाई ने कमाई को पीछे छोड़ दिया, जिससे खरीदारी की क्षमता कम हो गई।
-- राष्ट्र प्रेस
अर्पित याज्ञनिक/डीएससी