क्या शहबाज शरीफ शासन और सुधारों की चुनौतियों से निपटने में नाकाम हैं?

सारांश
Key Takeaways
- शहबाज शरीफ की सरकार ने शासन सुधारों के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।
- आईएमएफ के ऋण कार्यक्रम के चलते गरीबों की अनदेखी हो रही है।
- लगातार बाढ़ ने सरकार की तैयारी को उजागर किया है।
- खाद्य सुरक्षा संकट और जलवायु परिवर्तन की समस्याएँ बढ़ रही हैं।
- सरकार को बुनियादी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
इस्लामाबाद, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने शासन और सुधारों से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप विकसित करने में असफलता दिखाई है। यह एक नई रिपोर्ट में कहा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम के तहत अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के प्रयास में सरकार ने देश की गरीब आबादी के कल्याण की अनदेखी की है।
इस्लामाबाद आधारित वरिष्ठ पत्रकार फरहान बुख़ारी ने पाकिस्तानी समाचार पत्र द न्यूज़ इंटरनेशनल में लिखा, “जब देश की करीब 40 से 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जी रही हो, तो बेहतर भविष्य की आशा एक दूर का सपना बन जाती है। पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में असफलता दिखाई है।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश में लगातार आ रही बाढ़ ने सरकार की कमजोर तैयारियों और तात्कालिक सुधार लागू करने की अक्षमता को उजागर कर दिया है। इससे केंद्रीय और प्रांतीय स्तर पर जारी यथास्थिति सुधारों की गति धीमी हो रही है।
बुख़ारी के अनुसार, “जलवायु परिवर्तन से जुड़े घटनाक्रम हर वर्ष भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। महंगी होती ईंधन लागत के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पेड़ों की कटाई कर लकड़ी जलाने पर मजबूर हैं। इससे वनों की कटाई तेज हुई है और पाकिस्तान का पर्यावरणीय संकट और गहरा गया है।”
उन्होंने यह भी लिखा कि गरीबी में वृद्धि के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट जारी है। कृषि क्षेत्र के लिए प्रभावी नीतियों की कमी से खाद्य सुरक्षा का संकट और गहरा हो गया है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मौजूदा आपातकालीन हालात में पंजाब सरकार जैसी प्रांतीय सरकारों को अनावश्यक परियोजनाओं को रोकना चाहिए। बुखारी ने लिखा, “हाई-स्पीड ट्रेन और मोटरवे जैसे प्रोजेक्ट जमीनी हकीकत और गरीब जनता की समस्याओं से पूरी तरह अलग लगते हैं। इनकी बजाय सरकार को खाद्य असुरक्षा और गरीबी जैसी बुनियादी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”