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पाकिस्तान में गरीबी और आय असमानता में बढ़ोतरी, आर्थिक हालात गंभीर: एक विश्लेषण

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पाकिस्तान में गरीबी और आय असमानता में बढ़ोतरी, आर्थिक हालात गंभीर: एक विश्लेषण

सारांश

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि वहां की गरीबी और आय असमानता में चिंताजनक वृद्धि हुई है। अब लगभग 70 मिलियन लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। क्या यह सुधारों के दावों के विपरीत है?

मुख्य बातें

पाकिस्तान में गरीबी दर 29% पर पहुँच गई है।
आय असमानता का स्तर 32.7 पर है।
बेरोजगारी दर 7.1% हो गई है।
आईएमएफ की रिपोर्ट आर्थिक स्थिरता की आवश्यकता पर जोर देती है।
सरकार की वित्तीय स्थिति में सुधार की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भले ही पाकिस्तान की सहायता कार्यक्रमों की सराहना कर रहा है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही दर्शाते हैं। डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया आँकड़े यह बताते हैं कि पाकिस्तान में गरीबी और आय में असमानता में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे हालिया सुधारों की सामाजिक लागत को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकोषीय संतुलन और चालू खाते जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों में सुधार हुआ है, लेकिन लाखों लोग बढ़ती समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जो आर्थिक स्थिरीकरण और आम लोगों की वास्तविक स्थिति के बीच बढ़ती खाई को दर्शाता है।

लंबे समय तक दोहरे घाटे, मुद्रा अस्थिरता और घटते विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति के बाद, मामूली प्राथमिक अधिशेष को अब बेहतर राजकोषीय अनुशासन का संकेत माना जा रहा है।

करंट अकाउंट बैलेंस में सुधार से कुछ बाहरी दबाव कम हुआ है। हालांकि, विश्लेषकों के अनुसार, यह मुख्य रूप से कम आयात, अधिक रेमिटेंस और बाइलेटरल डेट रोलओवर के कारण हुआ है, न कि मजबूत निर्यात वृद्धि के कारण। इन उपलब्धियों के बावजूद चिंताएँ बरकरार हैं। सरकार की वित्तीय स्थिति के लिए राजस्व में कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है।

हाल ही में संघीय संवैधानिक न्यायालय द्वारा सुपर टैक्स पर दिए गए फैसले से कुछ अस्थायी राहत मिली है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता के लिए कर आधार का विस्तार करना आवश्यक होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ कार्यक्रम के तहत संरचनात्मक सुधारों और अन्य प्रमुख लक्ष्यों पर प्रगति भी धीमी बनी हुई है। ये सुधार अल्पकालिक स्थिरीकरण को टिकाऊ आर्थिक विकास में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

आईएमएफ की गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक रिपोर्ट ने भी रेखांकित किया है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता मजबूत संस्थानों और विश्वसनीय शासन पर निर्भर करती है। इसी बीच नए आँकड़ों ने स्थिरीकरण उपायों की भारी सामाजिक लागत को उजागर किया है।

हाल के गरीबी के अनुमानों के अनुसार, लगभग ७० मिलियन पाकिस्तानी अब ८,४८४ रुपये की मासिक गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। यह राशि बेसिक ज़रूरतों को भी पूरा नहीं करती। योजना मंत्री अहसान इकबाल ने आधिकारिक सर्वेक्षण के नतीजे जारी करते हुए बताया कि गरीबी दर बढ़कर लगभग २९ प्रतिशत हो गई है, जो ११ वर्षों में सबसे अधिक है, जबकि २०१९ में यह २२ प्रतिशत से थोड़ी कम थी।

आय असमानता भी तेजी से बढ़ी है। असमानता इंडेक्स ३२.७ पर पहुँच गया है, जो लगभग तीन दशकों में सबसे अधिक है, क्योंकि बढ़ती महंगाई और आर्थिक मंदी के कारण असली आय और घरेलू खपत में गिरावट आई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रम बाजार की स्थिति भी खराब हुई है, जिसमें बेरोजगारी दर बढ़कर ७.१ प्रतिशत हो गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक समायोजन का बोझ निम्न और मध्यम आय वर्ग पर अधिक पड़ा है। यदि विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित समानांतर रणनीति नहीं अपनाई गई, तो वर्तमान स्थिरीकरण दीर्घकाल में टिकाऊ नहीं रह पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में गरीबी दर कितनी बढ़ी है?
पाकिस्तान में गरीबी दर बढ़कर लगभग 29 प्रतिशत हो गई है।
आय असमानता का स्तर क्या है?
आय असमानता का इंडेक्स 32.7 पर पहुँच गया है, जो तीन दशकों में सबसे अधिक है।
बेरोजगारी दर कितनी है?
पाकिस्तान में बेरोजगारी दर अब 7.1 प्रतिशत हो गई है।
आईएमएफ की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
आईएमएफ की रिपोर्ट में आर्थिक स्थिरता के लिए मजबूत संस्थानों की जरूरत पर जोर दिया गया है।
क्या सरकार ने कोई सुधार किए हैं?
सरकार ने कुछ सुधार किए हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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