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जेपीएससी 14वीं पीटी परीक्षा रद्द करने की मांग: भाजयुमो ने बैरिकेड तोड़े, रांची में पुलिस से झड़प

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जेपीएससी 14वीं पीटी परीक्षा रद्द करने की मांग: भाजयुमो ने बैरिकेड तोड़े, रांची में पुलिस से झड़प

सारांश

रांची में भाजयुमो और BJP कार्यकर्ताओं ने जेपीएससी की 14वीं पीटी परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में बैरिकेड तोड़े और पुलिस से भिड़े। CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग के साथ आंदोलन और तेज होने की चेतावनी दी गई है।

मुख्य बातें

भाजयुमो और BJP कार्यकर्ताओं ने 22 जुलाई को रांची में जेपीएससी मुख्यालय का घेराव किया और बैरिकेडिंग तोड़ी।
प्रदर्शन का नेतृत्व BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और भाजयुमो अध्यक्ष शशांक राज ने किया।
आरोप: परिणाम बिना कट-ऑफ के जारी, मेरिट सूची पर हस्ताक्षर नहीं, ओएमआर शीट अभ्यर्थियों को नहीं दी गई।
मांग: 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा और CBI जांच।
राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी; सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे और सीआईडी छापेमारी के बाद विवाद और गहरा हुआ।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में कथित अनियमितताओं के विरोध में बुधवार, 22 जुलाई को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ताओं ने रांची स्थित जेपीएससी मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आयोग परिसर की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस से तीखी झड़प हुई और कुछ देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

मार्च और घेराव का घटनाक्रम

BJP प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू तथा भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज के नेतृत्व में राज्यभर के विभिन्न जिलों से हजारों कार्यकर्ता और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी बुधवार सुबह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए। सभा के बाद यह जत्था मार्च करते हुए जेपीएससी मुख्यालय की ओर बढ़ा।

प्रशासन ने पहले से ही आयोग कार्यालय के इर्द-गिर्द भारी पुलिस बल, रैपिड एक्शन टीम और कई स्तरों की बैरिकेडिंग तैनात कर रखी थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन और दंगा नियंत्रण बल को भी अलर्ट पर रखा गया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोका और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

अभ्यर्थियों के आरोप और मांगें

प्रदर्शनकारियों ने जेपीएससी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। उनके अनुसार परीक्षा परिणाम बिना कट-ऑफ अंक सार्वजनिक किए जारी किया गया, मेरिट सूची पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे और अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट उपलब्ध नहीं कराई गई।

BJP नेताओं ने कहा कि हाल में सीआईडी द्वारा जेपीएससी मुख्यालय और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी पर की गई छापेमारी तथा आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे से यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को तत्काल रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की।

BJP का राज्य सरकार पर हमला

BJP नेताओं ने राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि राज्य की एजेंसियां निष्पक्ष जांच करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए CBI जांच अनिवार्य है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अभ्यर्थियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

गौरतलब है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, जिससे अभ्यर्थियों का आयोग की कार्यप्रणाली पर भरोसा कमज़ोर हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार का पक्ष और आगे की स्थिति

राज्य सरकार का कहना है कि परीक्षा परिणाम से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच पहले ही सीआईडी को सौंपी जा चुकी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समाचार लिखे जाने तक जेपीएससी मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डटे हुए थे और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। आने वाले दिनों में BJP और भाजयुमो के अगले कदम पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार की एजेंसी निष्पक्ष जांच दे पाएगी या यह मामला भी लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ जाएगा। BJP की CBI जांच की मांग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, पर इसमें एक वैध सार्वजनिक हित भी छुपा है — पारदर्शिता। जब तक ओएमआर शीट सार्वजनिक नहीं होती और कट-ऑफ स्पष्ट नहीं होता, लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी 14वीं पीटी परीक्षा विवाद क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम पर कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, मेरिट सूची पर अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे और ओएमआर शीट उपलब्ध नहीं कराई गई।
भाजयुमो और BJP की मुख्य मांगें क्या हैं?
BJP और भाजयुमो ने 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को तत्काल रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार की एजेंसियां निष्पक्ष जांच में सक्षम नहीं हैं।
राज्य सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने परीक्षा परिणाम से जुड़ी शिकायतों पर जांच सीआईडी को सौंपी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सीआईडी पहले ही जेपीएससी मुख्यालय और परीक्षा एजेंसी पर छापेमारी कर चुकी है।
जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे का इस विवाद से क्या संबंध है?
BJP नेताओं के अनुसार, आयोग अध्यक्ष का इस्तीफा और सीआईडी की छापेमारी यह संकेत देते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, इस्तीफे की आधिकारिक वजह स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है।
आगे आंदोलन का क्या रुख रहेगा?
BJP और भाजयुमो नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अभ्यर्थियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। समाचार लिखे जाने तक जेपीएससी मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डटे हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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