30 जुलाई 2026
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जेपीएससी परीक्षा विवाद: रांची में लोक भवन के बाहर सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन, सीबीआई जांच और 14वीं पीटी रद्द करने की मांग

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जेपीएससी परीक्षा विवाद: रांची में लोक भवन के बाहर सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन, सीबीआई जांच और 14वीं पीटी रद्द करने की मांग

सारांश

रांची में लोक भवन के बाहर सैकड़ों छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ प्रदर्शन किया। 14वीं पीटी रद्द करने, सीबीआई जांच और 45 दिन में नए परीक्षा कैलेंडर की माँग के साथ छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

30 जुलाई को रांची के लोक भवन के बाहर सैकड़ों छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा विवाद पर प्रदर्शन किया।
प्रमुख माँग: 14वीं जेपीएससी पीटी रद्द करना, जांच सीबीआई को सौंपना और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच ईडी से कराना।
छात्रों ने एक सप्ताह के भीतर सीआईडी जांच की स्थिति सार्वजनिक करने और 45 दिनों में नया परीक्षा कैलेंडर जारी करने की माँग रखी।
प्रदर्शनकारियों ने 2002 से जेपीएससी से जुड़े लंबित विवादों का हवाला देते हुए राज्य एजेंसियों पर अविश्वास जताया।
10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित; माँगें न मानने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।

रांची के लोक भवन के बाहर 30 जुलाई को सैकड़ों छात्र एकजुट हुए और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) को तत्काल रद्द करने, मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने और 45 दिनों के भीतर नया परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग रखी। राज्य सरकार के खिलाफ तीखी नारेबाजी के बीच छात्रों ने चेतावनी दी कि माँगें न मानी गईं तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

मुख्य मांगें और आरोप

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक माँग 14वीं जेपीएससी पीटी को रद्द करना है। इसके साथ ही जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा, कथित विवादित नियुक्तियों तथा 11वीं, 12वीं और 13वीं जेपीएससी से जुड़ी प्रक्रियाओं की निष्पक्ष समीक्षा की माँग भी उठाई गई। छात्रों का कहना था कि वर्ष 2002 से लेकर अब तक जेपीएससी से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी माँग की कि एक सप्ताह के भीतर सरकार सीआईडी जांच की पूरी स्थिति सार्वजनिक करे, अब तक हुई गिरफ्तारियों और की गई कार्रवाई का ब्योरा सामने लाए तथा पूरे मामले में जवाबदेही तय करे। कथित वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की माँग भी रखी गई।

छात्रों की पीड़ा और सरकार पर अविश्वास

प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि झारखंड के हजारों युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं — परिवार, माता-पिता और सामाजिक जीवन से दूर रहकर केवल नौकरी की उम्मीद में। उन्होंने कहा, 'यदि समय पर परीक्षाएँ नहीं हुईं और लगातार विवाद सामने आते रहे तो युवाओं की पूरी उत्पादक उम्र इसी संघर्ष में निकल जाएगी।'

छात्रा राधिका ने आरोप लगाया कि सरकार नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और कई महत्वपूर्ण भर्तियाँ वर्षों से लंबित हैं।

प्रदर्शनकारी अमन साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे योग्य युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

सीआईडी जांच पर अविश्वास, सीबीआई की माँग

छात्रों ने राज्य सरकार की सीआईडी जांच को केवल औपचारिकता करार देते हुए कहा कि पहले भी जांच हुई, कई गिरफ्तारियाँ हुईं, लेकिन कथित तौर पर कई आरोपी बाद में नौकरी तक पहुँच गए। उनका तर्क था कि राज्य सरकार की एजेंसियों पर विश्वास नहीं रह गया है और किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी — यानी सीबीआई — से जांच कराना ही उचित होगा।

आगे का आंदोलन और राजनीतिक जवाबदेही की माँग

आंदोलनकारी नेताओं ने घोषणा की कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव प्रस्तावित है। उन्होंने तर्क दिया कि जेपीएससी और जेएसएससी सीधे कार्मिक विभाग से जुड़े हैं, जिसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास है। इसलिए कथित अनियमितताओं की नैतिक जवाबदेही भी सरकार को लेनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा विवादों के बाद जवाबदेही की माँग पहले से ही तेज है।

गौरतलब है कि झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद कोई नई बात नहीं है — 2002 से लेकर अब तक जेपीएससी से जुड़े कई मामले न्यायालयों और जांच एजेंसियों तक पहुँचे हैं। यदि सरकार ने माँगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन के व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें हर बार जांच हुई, गिरफ्तारियाँ हुईं, लेकिन व्यवस्था जस की तस रही। सीबीआई जांच की माँग इस बात का संकेत है कि राज्य की एजेंसियों में छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है — और यह अविश्वास बिना ठोस आधार के नहीं है। असली सवाल यह है कि जेपीएससी और जेएसएससी जैसी संस्थाएँ, जो सीधे कार्मिक विभाग के अधीन हैं, बार-बार विवादों में क्यों घिरती हैं और जवाबदेही की श्रृंखला कहाँ टूटती है। जब तक संरचनात्मक सुधार — स्वतंत्र निगरानी, डिजिटल पारदर्शिता और सत्यापन-योग्य भर्ती परिणाम — नहीं होते, तब तक हर नई जांच महज एक और औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी परीक्षा विवाद क्या है और छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और अनियमित नियुक्तियों के आरोपों को लेकर छात्र आंदोलित हैं। 30 जुलाई को रांची के लोक भवन के बाहर सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन कर 14वीं जेपीएससी पीटी रद्द करने और सीबीआई जांच की माँग रखी।
छात्रों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
छात्रों की माँगें हैं: 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा तत्काल रद्द हो; जांच सीबीआई को सौंपी जाए; कथित वित्तीय लेन-देन की जांच ईडी करे; एक सप्ताह में सीआईडी जांच की स्थिति सार्वजनिक हो; और 45 दिनों के भीतर नया परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।
छात्र राज्य की सीआईडी जांच पर भरोसा क्यों नहीं कर रहे?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2002 से अब तक जेपीएससी से जुड़े कई विवादों में जांच हुई और गिरफ्तारियाँ भी हुईं, लेकिन कथित तौर पर कई आरोपी बाद में नौकरी तक पहुँच गए। इस पृष्ठभूमि में छात्र राज्य एजेंसियों पर अविश्वास जताते हुए किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच की माँग कर रहे हैं।
आगे आंदोलन का क्या कार्यक्रम है?
आंदोलनकारी नेताओं ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। यदि सरकार ने माँगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी गई है।
इस विवाद में मुख्यमंत्री की जवाबदेही क्यों माँगी जा रही है?
छात्रों का तर्क है कि जेपीएससी और जेएसएससी सीधे कार्मिक विभाग से जुड़े हैं और कार्मिक विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास है। इसलिए भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही भी सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर है।
राष्ट्र प्रेस
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