जेपीएससी परीक्षा विवाद: रांची में लोक भवन के बाहर सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन, सीबीआई जांच और 14वीं पीटी रद्द करने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
रांची के लोक भवन के बाहर 30 जुलाई को सैकड़ों छात्र एकजुट हुए और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) को तत्काल रद्द करने, मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने और 45 दिनों के भीतर नया परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग रखी। राज्य सरकार के खिलाफ तीखी नारेबाजी के बीच छात्रों ने चेतावनी दी कि माँगें न मानी गईं तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
मुख्य मांगें और आरोप
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक माँग 14वीं जेपीएससी पीटी को रद्द करना है। इसके साथ ही जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा, कथित विवादित नियुक्तियों तथा 11वीं, 12वीं और 13वीं जेपीएससी से जुड़ी प्रक्रियाओं की निष्पक्ष समीक्षा की माँग भी उठाई गई। छात्रों का कहना था कि वर्ष 2002 से लेकर अब तक जेपीएससी से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी माँग की कि एक सप्ताह के भीतर सरकार सीआईडी जांच की पूरी स्थिति सार्वजनिक करे, अब तक हुई गिरफ्तारियों और की गई कार्रवाई का ब्योरा सामने लाए तथा पूरे मामले में जवाबदेही तय करे। कथित वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की माँग भी रखी गई।
छात्रों की पीड़ा और सरकार पर अविश्वास
प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि झारखंड के हजारों युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं — परिवार, माता-पिता और सामाजिक जीवन से दूर रहकर केवल नौकरी की उम्मीद में। उन्होंने कहा, 'यदि समय पर परीक्षाएँ नहीं हुईं और लगातार विवाद सामने आते रहे तो युवाओं की पूरी उत्पादक उम्र इसी संघर्ष में निकल जाएगी।'
छात्रा राधिका ने आरोप लगाया कि सरकार नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और कई महत्वपूर्ण भर्तियाँ वर्षों से लंबित हैं।
प्रदर्शनकारी अमन साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे योग्य युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सीआईडी जांच पर अविश्वास, सीबीआई की माँग
छात्रों ने राज्य सरकार की सीआईडी जांच को केवल औपचारिकता करार देते हुए कहा कि पहले भी जांच हुई, कई गिरफ्तारियाँ हुईं, लेकिन कथित तौर पर कई आरोपी बाद में नौकरी तक पहुँच गए। उनका तर्क था कि राज्य सरकार की एजेंसियों पर विश्वास नहीं रह गया है और किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी — यानी सीबीआई — से जांच कराना ही उचित होगा।
आगे का आंदोलन और राजनीतिक जवाबदेही की माँग
आंदोलनकारी नेताओं ने घोषणा की कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव प्रस्तावित है। उन्होंने तर्क दिया कि जेपीएससी और जेएसएससी सीधे कार्मिक विभाग से जुड़े हैं, जिसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास है। इसलिए कथित अनियमितताओं की नैतिक जवाबदेही भी सरकार को लेनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा विवादों के बाद जवाबदेही की माँग पहले से ही तेज है।
गौरतलब है कि झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद कोई नई बात नहीं है — 2002 से लेकर अब तक जेपीएससी से जुड़े कई मामले न्यायालयों और जांच एजेंसियों तक पहुँचे हैं। यदि सरकार ने माँगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन के व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।