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पाकिस्तान के युवाओं के लिए विकल्प: चुप रहो या देश छोड़ो

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पाकिस्तान के युवाओं के लिए विकल्प: चुप रहो या देश छोड़ो

सारांश

पाकिस्तानी युवाओं के लिए बुरी खबर है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक संकट और दमन के कारण युवा 'चुप रहना' या 'देश छोड़ना' जैसे विकल्पों के बीच फंसे हुए हैं। क्या पाकिस्तान के भविष्य के लिए यह खतरनाक संकेत है?

मुख्य बातें

आर्थिक संकट के कारण 8 लाख से अधिक युवा पाकिस्तान छोड़ चुके हैं।
सुरक्षा समस्या के रूप में युवाओं की नाराजगी।
युवाओं के विरोध प्रदर्शनों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ा है।
पाकिस्तान की 75% जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है।
युवाओं के पास केवल दो विकल्प बचे हैं: चुप रहना या देश छोड़ना।

इस्लामाबाद, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तानी अधिकारियों ने युवाओं की असंतोष को आर्थिक विफलता के बजाय सुरक्षा संकट के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यहां के युवा, सड़कों पर या ऑनलाइन खुलकर बोलने और विरोध करने के बजाय, विदेश जाने को अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प मानते हैं। लंबे समय से चल रहे दमन ने युवा प्रदर्शनकारियों के बीच एकता को कमजोर कर दिया है। यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है जो कि गुरुवार को प्रकाशित हुई।

गैर-लाभकारी समाचार एजेंसी द न्यू ह्यूमैनिटेरियन की रिपोर्ट में कहा गया, "पिछले दो वर्षों में 8 लाख से अधिक युवा पाकिस्तान छोड़ चुके हैं। इसके पीछे केवल गंभीर आर्थिक अस्थिरता नहीं है, बल्कि राज्य के कड़े नियंत्रण और विरोध प्रदर्शनों पर दमन भी एक प्रमुख कारण है।"

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि लगभग 25 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए यह आंकड़ा बहुत चिंताजनक है, जबकि पाकिस्तान की लगभग 75 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है। युवाओं में बेरोजगारी दर लगभग 10 प्रतिशत है, इसलिए यह स्थिति कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, जब भी पाकिस्तान में युवा परिवर्तन के लिए संगठित होते हैं, तो उन्हें हिंसा और सरकार द्वारा लागू सेंसरशिप का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद क्षेत्र में युवाओं ने नागरिक अधिकार संगठन अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी अधिकारियों की असाधारण जीवनशैली की आलोचना की, जबकि स्थानीय लोग बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे थे। पाकिस्तानी अधिकारियों की हिंसक कार्रवाई में 10 लोग मारे गए और सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया, "मुजफ्फराबाद में युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर इतनी कठोर प्रतिक्रिया पाकिस्तान में कोई असामान्य बात नहीं है। यह दरअसल एक बड़े मुद्दे का संकेत है। नेताओं को वास्तविक डर है कि पूरे महाद्वीप में फैल रहे तथाकथित जेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शनों की लहर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकती है।"

रिपोर्ट के अनुसार, दशकों से पाकिस्तान में छात्र संघों पर प्रतिबंध है, जो संगठित छात्र आंदोलनों के प्रति राज्य के गहरे डर को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, "बांग्लादेश और नेपाल के विपरीत, जहां छात्र राजनीतिक रूप से जागरूक और सक्रिय हैं, पाकिस्तानी कैंपस पर कड़ी निगरानी रखी जाती है, जहां बोलने की आज़ादी या राजनीतिक राय के लिए कोई प्लेटफार्म नहीं है। पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में छात्रों के गायब होने की लहर आई है, खासकर बलूच छात्रों की, जिन्होंने लंबे समय से सरकार पर बलूचिस्तान के संसाधनों का दुरुपयोग करने और स्थानीय आबादी को अलग-थलग करने का आरोप लगाया है।"

रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के कई शिक्षित और कुशल युवा देश में किसी सार्थक बदलाव की आशा नहीं रखते। अब उनके पास जिंदा रहने के लिए चुप रहना या अपना देश छोड़ देना ही दो विकल्प हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान के युवा गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उनकी आवाज़ों को दबाने और उनके भविष्य को अनिश्चित बनाने के कारण, यह स्थिति न केवल देश के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में युवा क्यों देश छोड़ रहे हैं?
युवाओं का देश छोड़ने का मुख्य कारण आर्थिक अस्थिरता और सरकार के द्वारा लागू किए गए दमनात्मक उपाय हैं।
क्या पाकिस्तान में युवाओं पर दमन हो रहा है?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार, जब भी युवा विरोध करने का प्रयास करते हैं, उन्हें हिंसा और सेंसरशिप का सामना करना पड़ता है।
पाकिस्तान के युवा कितने सक्रिय हैं?
हालांकि युवा सक्रिय हैं, लेकिन सरकार के दमन और प्रतिबंधों के कारण उनकी एकता कमजोर हो गई है।
क्या सरकार ने विरोध प्रदर्शनों पर नियंत्रण किया है?
जी हाँ, सरकार ने विरोध प्रदर्शनों पर कठोर नियंत्रण लगा रखा है, जिससे युवा अपनी आवाज़ नहीं उठा पा रहे हैं।
पाकिस्तान में छात्रों की स्थिति क्या है?
पाकिस्तान में लंबे समय से छात्र संघों पर प्रतिबंध है, जिससे छात्रों के सक्रियता में कमी आई है।
राष्ट्र प्रेस
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