बच्चों में दस्त की अनदेखी पड़ सकती है भारी — NHM के 3 उपाय जो बचा सकते हैं जान
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 11 जून को चेतावनी दी कि बच्चों में दस्त की समस्या को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ करना गंभीर खतरे को न्योता देना है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, समय पर उपचार न मिलने पर दस्त निर्जलीकरण और कुपोषण जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकता है, जो शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, स्वच्छता और तत्काल उपचार — ये तीन स्तंभ ही बच्चों की सुरक्षा की असली ढाल हैं।
दस्त से बच्चों को क्यों है सबसे अधिक खतरा
NHM के अनुसार, दस्त के दौरान बच्चों के शरीर से पानी और ज़रूरी लवण तेज़ी से निकल जाते हैं, जिससे निर्जलीकरण (Dehydration) की स्थिति बन सकती है। यह कमज़ोरी, सुस्ती और गंभीर मामलों में जानलेवा भी हो सकती है। गौरतलब है कि पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दस्त वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है, और भारत में भी यह एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।
बचाव के तीन मुख्य उपाय
पहला उपाय — स्तनपान: NHM ने स्पष्ट किया है कि छह माह तक के शिशुओं को केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए। स्तनपान बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राकृतिक रूप से मज़बूत करता है और संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है।
दूसरा उपाय — स्वच्छता और टीकाकरण: साफ़-सफ़ाई, हाथों की नियमित धुलाई और सुरक्षित पेयजल का उपयोग संक्रमण की रोकथाम में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही रोटावायरस और खसरा जैसी बीमारियों के विरुद्ध समय पर टीकाकरण कराना भी आवश्यक है, जो बच्चों को दीर्घकालिक सुरक्षा देता है।
तीसरा उपाय — तत्काल उपचार: दस्त होने पर विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे को हर बार ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल पिलाना चाहिए ताकि शरीर में पानी और लवणों की कमी पूरी हो सके। चिकित्सीय सलाह के अनुसार 14 दिनों तक जिंक की गोली देना भी लाभकारी माना जाता है, जो दस्त की अवधि और गंभीरता दोनों को कम करने में सहायक है।
माता-पिता के लिए ज़रूरी सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को दस्त के शुरुआती लक्षण — जैसे बार-बार पतला मल, बुखार, उल्टी या बच्चे का सुस्त पड़ जाना — दिखते ही तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए। NHM ने यह भी स्पष्ट किया है कि घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना और उपचार में देरी करना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
आगे की राह
NHM के अनुसार, स्वच्छता, स्तनपान और नियमित टीकाकरण मिलकर स्वस्थ बचपन की मज़बूत नींव रखते हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब गर्मियों और मानसून के मौसम में दस्त के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामुदायिक जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप ही बाल स्वास्थ्य की रक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है।