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मध्य प्रदेश पल्स पोलियो अभियान: 1 करोड़ 6 लाख से अधिक बच्चों को मिली वैक्सीन खुराक

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मध्य प्रदेश पल्स पोलियो अभियान: 1 करोड़ 6 लाख से अधिक बच्चों को मिली वैक्सीन खुराक

सारांश

मध्य प्रदेश में तीन दिवसीय राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में 1 करोड़ 6 लाख से अधिक बच्चों को वैक्सीन दी गई। बूथ, घर-घर भ्रमण और रेलवे स्टेशनों तक फैले इस अभियान ने राज्य की पोलियो उन्मूलन प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश में तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान में 1 करोड़ 6 लाख 51 हज़ार 737 बच्चों को वैक्सीन खुराक दी गई।
अभियान शून्य से पाँच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को लक्षित था।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अभियान को पोलियो उन्मूलन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर विशेष काउंटर लगाए गए; दुर्गम क्षेत्रों में घर-घर भ्रमण किया गया।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं , आशा कार्यकर्ताओं , स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर अभियान को सफल बनाया।

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत शून्य से पाँच वर्ष आयु वर्ग के 1 करोड़ 6 लाख 51 हज़ार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई। 4 जुलाई 2026 को भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार, तीन दिवसीय इस अभियान में बूथ स्तर से लेकर घर-घर भ्रमण तक व्यापक व्यवस्थाएँ की गईं, ताकि कोई भी पात्र बच्चा इस जीवन-रक्षक खुराक से वंचित न रह जाए।

अभियान का दायरा और क्रियान्वयन

तीन दिनों तक चले इस राज्यव्यापी अभियान में स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर काम किया। दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष दल तैनात किए गए। अभियान के शुभारंभ अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न पोलियो बूथों का उद्घाटन किया।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन की दिशा में अंतिम मील की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भारत को 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था, और इस दर्जे को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण अभियान अनिवार्य माने जाते हैं।

छूटे बच्चों तक पहुँच की विशेष व्यवस्था

अभियान के दौरान जो बच्चे पोलियो बूथों तक नहीं पहुँच सके, उन्हें चिन्हित कर घर-घर जाकर खुराक पिलाई गई। इसके अतिरिक्त, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर भी विशेष काउंटर लगाए गए, जहाँ यात्रा के दौरान बच्चों को वैक्सीन दी गई। इस बहु-स्तरीय रणनीति ने सुनिश्चित किया कि अधिकतम बच्चे अभियान के दायरे में आ सकें।

उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अभियान की सफलता को स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण और जनसहयोग का प्रतिफल बताया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सफलता पोलियो उन्मूलन के प्रति प्रदेश की दृढ़ प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण तथा जनसहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार भविष्य में भी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के प्रति प्रतिबद्ध है।

आम जनता और समुदाय की भागीदारी

गौरतलब है कि इस अभियान की सफलता में समुदाय की सक्रिय सहभागिता निर्णायक रही। अभिभावकों ने स्वेच्छा से अपने बच्चों को नज़दीकी पोलियो बूथों पर लाया, जबकि स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सामूहिक प्रयास भविष्य के टीकाकरण अभियानों के लिए एक मज़बूत नींव तैयार करता है।

आगामी समय में राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसी तर्ज़ पर अन्य टीकाकरण अभियान चलाए जाने की उम्मीद है, जो मध्य प्रदेश को बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि दुर्गम क्षेत्रों में छूटे बच्चों का अनुपात क्या रहा और उन्हें कितनी तेज़ी से कवर किया गया। भारत के पोलियो-मुक्त दर्जे को बनाए रखने के लिए शत-प्रतिशत कवरेज ज़रूरी है, न कि केवल संख्या की उपलब्धि। राज्य सरकार को अगले चरण में ज़िलावार कवरेज डेटा सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो और कमज़ोर क्षेत्रों की पहचान हो सके।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश पल्स पोलियो अभियान 2026 में कितने बच्चों को खुराक दी गई?
इस अभियान में शून्य से पाँच वर्ष आयु वर्ग के कुल 1 करोड़ 6 लाख 51 हज़ार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई। यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत किया गया।
मध्य प्रदेश पोलियो अभियान में छूटे बच्चों तक कैसे पहुँचा गया?
छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर घर-घर भ्रमण के ज़रिए खुराक दी गई। इसके अलावा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर विशेष काउंटर लगाए गए, जहाँ यात्रा के दौरान बच्चों को वैक्सीन दी जा सकती थी।
पल्स पोलियो अभियान क्यों ज़रूरी है?
भारत को 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन इस दर्जे को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण अभियान अनिवार्य हैं। पोलियो एक लाइलाज बीमारी है जो बच्चों को स्थायी विकलांगता दे सकती है, इसलिए वैक्सीन कवरेज बनाए रखना ज़रूरी है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अभियान के बारे में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह अभियान पोलियो उन्मूलन के प्रति प्रदेश की दृढ़ प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण और जनसहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भविष्य में भी बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराती रहेगी।
अभियान में किन-किन विभागों और संस्थाओं ने भाग लिया?
अभियान में स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न पोलियो बूथों का उद्घाटन कर अभियान की शुरुआत की।
राष्ट्र प्रेस
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