तमिलनाडु पल्स पोलियो अभियान 29 जून से: सीएम विजय करेंगे शुभारंभ, 52.91 लाख बच्चों को खुराक का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय रविवार, 29 जून 2025 को चेन्नई के पलावक्कम स्थित आदि द्रविड़ कल्याण उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर से राज्यव्यापी पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने पाँच वर्ष से कम आयु के 52.91 लाख बच्चों को पोलियो की निःशुल्क खुराक पिलाने का लक्ष्य तय किया है। यह अभियान भारत के पोलियो-मुक्त दर्जे को बनाए रखने की दिशा में हर वर्ष उठाया जाने वाला अनिवार्य कदम है।
अभियान की तैयारियाँ और ढाँचा
तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में 43,051 टीकाकरण केंद्र स्थापित किए हैं। ये केंद्र सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, टोल प्लाजा, चेक पोस्ट और हवाई अड्डों पर बनाए गए हैं — ताकि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रह जाए।
अभियान के शुभारंभ से एक दिन पहले शनिवार को ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के आयुक्त जी.एस. समीरन ने पलावक्कम स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दूरदराज क्षेत्रों तक पहुँच
पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तथा अलग-थलग बसे गाँवों में रहने वाले बच्चों तक पहुँचने के लिए विशेष मोबाइल चिकित्सा दल तैनात किए गए हैं। ये टीमें घर-घर जाकर पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जिससे भौगोलिक दूरी टीकाकरण में बाधा न बने।
विशेषज्ञों की सलाह और अभिभावकों से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अनुरोध किया है कि वे पाँच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को निकटतम केंद्र पर अवश्य लाएँ — भले ही उन्हें पहले नियमित टीकाकरण या पोलियो की खुराक मिल चुकी हो। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार दी जाने वाली पोलियो खुराक बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने और बीमारी की पुनः वापसी रोकने के लिए आवश्यक है।
भारत का पोलियो-मुक्त दर्जा और अभियान की अहमियत
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2014 में भारत को पोलियो-मुक्त घोषित किया था। यह ऐसे समय में आया था जब दशकों के सघन टीकाकरण अभियानों ने इस अत्यधिक संक्रामक बीमारी को देश से लगभग समाप्त कर दिया था। हालाँकि, पोलियो वायरस की संभावित बाहरी वापसी के खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम के तहत यह वार्षिक अभियान अनिवार्य रूप से जारी रखा जाता है।
यह अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि की निरंतर रक्षा का प्रयास है — जो आने वाली पीढ़ियों को पोलियो-मुक्त भविष्य देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।