ओडिशा डीजीपी नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट बुधवार को करेगा विस्तृत सुनवाई, प्रकाश सिंह दिशा-निर्देश उल्लंघन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति से जुड़े विवाद पर बुधवार को विस्तृत सुनवाई का आश्वासन दिया है। याचिका में राज्य सरकार पर 2018 के ऐतिहासिक 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया गया है। यह मामला पुलिस सुधारों की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन को लेकर एक बड़ी संवैधानिक चुनौती के रूप में उभरा है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने की। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता एक स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र हैं और पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह की याचिकाएँ दायर करना अत्यंत असामान्य है। चिदंबरम ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता ने ओडिशा के बहुचर्चित चिट फंड घोटाले को उजागर करने में साहसिक भूमिका निभाई थी।
मुख्य आरोप: एडीजीपी की कथित अनियमित पदोन्नति
चिदंबरम ने अदालत के सामने मुख्य दलील रखते हुए आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) को जानबूझकर पदोन्नत कर डीजीपी पद के लिए पात्र अधिकारियों की सूची में शामिल करने का प्रयास कर रही है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों की मूल भावना के विरुद्ध है, जिनका उद्देश्य पुलिस नियुक्तियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखना था।
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने पिछली सुनवाई का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत पहले ही यह रेखांकित कर चुकी है कि यदि राज्य सरकार की ओर से कोई उल्लंघन होता है, तो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को उचित कार्रवाई का पूर्ण अधिकार है। सीजेआई ने कहा, "हमें उम्मीद है कि यदि कोई उल्लंघन हुआ है तो यूपीएससी हमारे फैसले के अनुसार ही उचित कार्रवाई करेगा।"
प्रकाश सिंह मामला: पुलिस सुधारों की आधारशिला
गौरतलब है कि 2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए राज्यों को पुलिस नियुक्तियों में पारदर्शिता और स्वायत्तता सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के तहत डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी द्वारा तैयार पात्र अधिकारियों की सूची से ही चयन अनिवार्य किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में पुलिस नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगातार उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बुधवार को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई का आश्वासन दिया है। अदालत का यह निर्णय ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया और राज्य सरकार की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता प्रदान कर सकता है।