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ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेडी-कांग्रेस की 11 विधायकों की अयोग्यता याचिका खारिज की, विपक्ष ने कानूनी विकल्प की चेतावनी दी

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ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेडी-कांग्रेस की 11 विधायकों की अयोग्यता याचिका खारिज की, विपक्ष ने कानूनी विकल्प की चेतावनी दी

सारांश

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने बीजेडी और कांग्रेस की उन याचिकाओं को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया, जिनमें राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की माँग थी। विपक्ष ने अब कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने 22 जून 2026 को बीजेडी और कांग्रेस की अयोग्यता याचिकाएँ खारिज कीं।
याचिकाएँ नियम 6(6) और 6(7) के तहत अनिवार्य शपथपत्र और हस्ताक्षरित परिशिष्ट न होने के कारण निरस्त की गईं।
विवाद में 8 बीजेडी और 3 कांग्रेस विधायक शामिल हैं, जिन्होंने मार्च के राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।
भाजपा ने फैसले का स्वागत किया; बीजेडी और कांग्रेस ने आलोचना करते हुए कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही।
आवेदन नियम 7(2) के तहत खारिज किया गया; मामला अदालत तक पहुँचने की संभावना।

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने 22 जून 2026 को बीजू जनता दल (बीजेडी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) द्वारा दाखिल उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की माँग की गई थी। ये विधायक मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर अपनी-अपनी पार्टी का व्हिप तोड़ चुके थे। इस फैसले ने ओडिशा की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

याचिका खारिज होने के कारण

अध्यक्ष सुरमा पाधी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि याचिकाएँ ओडिशा विधानसभा के सदस्यों (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1987 के नियम 6(6) और 6(7) के तहत अपेक्षित अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं करती थीं। उन्होंने कहा कि याचिकाओं के साथ आवश्यक शपथपत्र दाखिल नहीं किए गए थे और संलग्न परिशिष्टों पर उचित हस्ताक्षर व सत्यापन भी नहीं था।

अध्यक्ष ने यह भी कहा कि याचिकाएँ संक्षिप्त, अस्पष्ट और निराधार थीं, जो मेरिट पर निर्णय के लिए कानूनी मानकों को पूरा नहीं करती थीं। आवेदन को नियम 7(2) के तहत निरस्त किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आया था, जब आठ बीजेडी विधायकों (जिनमें दो निलंबित पार्टी सदस्य भी शामिल थे) और तीन कांग्रेस विधायकों ने अपनी-अपनी पार्टियों का व्हिप नजरअंदाज करते हुए भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में मतदान किया था। विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक और दलीय अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया था। इन विधायकों पर पार्टी नेतृत्व के विरुद्ध सार्वजनिक बयानबाजी का भी आरोप लगाया गया था।

गौरतलब है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया तकनीकी और प्रक्रियागत रूप से जटिल होती है, और याचिकाकर्ताओं को सभी अनिवार्य दस्तावेज़ी औपचारिकताएँ पूरी करनी होती हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

सत्तारूढ़ भाजपा ने अध्यक्ष के फैसले का स्वागत किया। दूसरी ओर, बीजेडी और कांग्रेस ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की और संकेत दिया कि वे उच्च न्यायालय सहित अन्य कानूनी विकल्प तलाशेंगे। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

आगे क्या होगा

बीजेडी और कांग्रेस के कानूनी विकल्प तलाशने की घोषणा के बाद यह मामला न्यायालय तक पहुँच सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में भाजपा सरकार और विपक्ष के बीच पहले से तनातनी का माहौल है। विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा अब विधानसभा से बाहर अदालत के गलियारों में जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दल-बदल विरोधी कानून की व्यावहारिक कमज़ोरियों को भी उजागर करता है — जहाँ प्रक्रियागत खामियाँ मेरिट पर सुनवाई से पहले ही याचिका को समाप्त कर देती हैं। यह पहली बार नहीं है कि राज्यसभा क्रॉस वोटिंग के बाद अयोग्यता की कार्यवाही तकनीकी बाधाओं में उलझ गई हो। असली सवाल यह है कि क्या विपक्षी दल अदालत में बेहतर तैयारी के साथ लौटेंगे, या यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सिमट जाएगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष ने 11 विधायकों की अयोग्यता याचिका क्यों खारिज की?
अध्यक्ष सुरमा पाधी ने याचिकाएँ इसलिए खारिज कीं क्योंकि उनमें ओडिशा विधानसभा के सदस्यों (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1987 के नियम 6(6) और 6(7) के तहत अनिवार्य शपथपत्र और उचित रूप से हस्ताक्षरित परिशिष्ट नहीं थे। याचिकाएँ संक्षिप्त, अस्पष्ट और निराधार पाई गईं।
किन विधायकों पर अयोग्यता की माँग की गई थी?
बीजेडी के 8 विधायकों (जिनमें 2 निलंबित पार्टी सदस्य शामिल थे) और कांग्रेस के 3 विधायकों पर अयोग्यता की माँग की गई थी। इन सभी ने मार्च के राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर अपनी पार्टी का व्हिप तोड़ा था।
बीजेडी और कांग्रेस अब क्या करेंगे?
दोनों दलों ने स्पीकर के फैसले की आलोचना की है और कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही है। संभावना है कि वे उच्च न्यायालय का रुख करें।
दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया क्या होती है?
दल-बदल विरोधी कानून के तहत याचिका दाखिल करने के लिए अनिवार्य शपथपत्र, हस्ताक्षरित और सत्यापित परिशिष्ट तथा पर्याप्त तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत करना होता है। ओडिशा के नियम 6(6), 6(7) और 7(2) इन प्रक्रियागत शर्तों को परिभाषित करते हैं।
भाजपा ने इस फैसले पर क्या रुख अपनाया?
सत्तारूढ़ भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले का स्वागत किया है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में हुई क्रॉस वोटिंग से पार्टी को राज्यसभा चुनाव में लाभ मिला था।
राष्ट्र प्रेस
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