ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेडी-कांग्रेस की 11 विधायकों की अयोग्यता याचिका खारिज की, विपक्ष ने कानूनी विकल्प की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने 22 जून 2026 को बीजू जनता दल (बीजेडी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) द्वारा दाखिल उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की माँग की गई थी। ये विधायक मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर अपनी-अपनी पार्टी का व्हिप तोड़ चुके थे। इस फैसले ने ओडिशा की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
याचिका खारिज होने के कारण
अध्यक्ष सुरमा पाधी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि याचिकाएँ ओडिशा विधानसभा के सदस्यों (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1987 के नियम 6(6) और 6(7) के तहत अपेक्षित अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं करती थीं। उन्होंने कहा कि याचिकाओं के साथ आवश्यक शपथपत्र दाखिल नहीं किए गए थे और संलग्न परिशिष्टों पर उचित हस्ताक्षर व सत्यापन भी नहीं था।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि याचिकाएँ संक्षिप्त, अस्पष्ट और निराधार थीं, जो मेरिट पर निर्णय के लिए कानूनी मानकों को पूरा नहीं करती थीं। आवेदन को नियम 7(2) के तहत निरस्त किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आया था, जब आठ बीजेडी विधायकों (जिनमें दो निलंबित पार्टी सदस्य भी शामिल थे) और तीन कांग्रेस विधायकों ने अपनी-अपनी पार्टियों का व्हिप नजरअंदाज करते हुए भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में मतदान किया था। विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक और दलीय अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया था। इन विधायकों पर पार्टी नेतृत्व के विरुद्ध सार्वजनिक बयानबाजी का भी आरोप लगाया गया था।
गौरतलब है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया तकनीकी और प्रक्रियागत रूप से जटिल होती है, और याचिकाकर्ताओं को सभी अनिवार्य दस्तावेज़ी औपचारिकताएँ पूरी करनी होती हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सत्तारूढ़ भाजपा ने अध्यक्ष के फैसले का स्वागत किया। दूसरी ओर, बीजेडी और कांग्रेस ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की और संकेत दिया कि वे उच्च न्यायालय सहित अन्य कानूनी विकल्प तलाशेंगे। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
आगे क्या होगा
बीजेडी और कांग्रेस के कानूनी विकल्प तलाशने की घोषणा के बाद यह मामला न्यायालय तक पहुँच सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में भाजपा सरकार और विपक्ष के बीच पहले से तनातनी का माहौल है। विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा अब विधानसभा से बाहर अदालत के गलियारों में जाने की संभावना है।